कैसे होगा महामानव का जन्म?

जीवन के रंगमंच से ...

जनकसिंह झाला
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हाल में ही ओशो की एक किताब में यह कहानी पढ़ी थी कि एक बार एक पादरी को चर्च में प्रेम पर भाषण देना था। उसने पूरी तैयारी कर ली थी। कई पुस्तकों का अध्ययन भी कर लिया। वह प्रेम पर भाषण देने के लिए घर से निकला। चर्च से कुछ दूर पहले रास्ते में उसे जमीन पर लेटा हुआ एक व्यक्ति मिला। वह दर्द से कराह रहा था। उसने पादरी से मदद की गुहार लगाई। एक पल के लिए पादरी के कदम रुके, लेकिन दूसरे ही पल उसको अपना काम याद आ गया। जिसके लिए वो घर से तैयारी करके निकला था।

पादरी ने मदद की बजाय दर्द से कराह रहे उस व्यक्ति से कहा, 'भाई साहब मुझे देर हो रही है, चर्च में कई लोग मेरा इंतजार कर रहे हैं। इसलिए इस पल में आपकी मदद नहीं कर सकता।' पादरी का ऐसा रवैया देखकर वो शख्स अचानक हँसने लगा।

और हँसी रोकते हुए कहा 'मुझे मालूम है कि आप उस चर्च के पादरी हैं, और प्रेम के बारे में लेक्चर देने के लिए जा रहे हैं। ऐसे में अगर आप मेरी मदद नहीं करेंगे तो मैं इस शहर के सभी आदमियों को बता दूँगा कि जो व्यक्ति प्रेम के बारे में लोगों को लेक्चर देता रहता है, उसमें प्रेम और दया की भावना ही नहीं है वरना, वो मुझे इस स्थिति में छोड़कर कभी न जाता।'

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उस शख्स की बात सुनकर पादरी के पैरों से मानो जमीन खिसक गई। उसने तुरंत पूछा, आखिर तुम कौन हो? वो आदमी बोला, मैं वही शख्स हूँ, जिसके कारण आज लोग आपको पूजते हैं आपको सम्मान देते हैं। असल में कहूँ तो मुझसे ही आपकी दुकानदारी चलती है। क्योंकि मैं कोई और नहीं, शैतान हूँ। जिसके अस्तित्व में रहने से ही तुम जैसे लोगों का अस्तित्व है। अगर आज मैं मर गया तो आज मेरे साथ-साथ तुम्हारी भी मौत हो जाएगी।

शैतान की बात सुनकर पादरी डर गया। क्योंकि वह शख्स सही बोल रहा था। पादरी ने कहा, 'शैतान भाई, आप घबराओ मत, मैं आपको मरने नहीं दूँगा आखिर आप मेरे दोस्त जो ठहरे। इतना कहकर वह उस शैतान को अपनी पीठ पर उठाकर अस्पताल ले गया।

यह कहानी यहाँ पर खत्म नहीं होती। क्योंकि उस दिन से उस पादरी और शैतान के बीच ऐसी दोस्ती हो गई कि जहाँ पर भी यह पादरी जाता है वहाँ पर यह शैतान आ ही जाता है। मंदिरों में भी देख लीजिए, आज पंडित और पंडे धर्म के नाम पर लोगों को लूटते हैं। नर्क का डर दिखाते हैं। दोस्तों, अब आप ही बताएँ अगर नर्क नहीं होता तो स्वर्ग की कामना इंसान कैसे कर सकता? इन पंडितों एवं पंडों की दुकानदारी कैसे चलती?

कई दोस्त मुझसे कहते हैं कि फलाँ व्यक्ति ने मेरे साथ ऐसा किया, और फलाँ ने मेरे साथ वैसा किया। मैं सिर्फ उनको इतना कहता हूँ कि अगर बुरे आदमी दुनिया में नहीं होंगे तो अच्छे आदमियों की पहचान कैसे बन पाएगी? क्योंकि एक सत्य तो यही है कि यह दुनिया कभी भी अच्छे आदमी का सर्जन नहीं कर पाएगी। हमने हर चीज में अद्यतन क्रांति लाने के लिए प्रयास किया है। बस! एक अच्छे आदमी का निर्माण नहीं कर पाए। यहाँ तक कि हमने बैंगन को भी नहीं छोडा, दुनिया में बैंगन की एक नई प्रजाति हमने खोजी, जिसको बीटी बैंगन के नाम से जाना जाता है। लेकिन आश्वर्य तब होता है, जब आपने द्वारा खोजी गई किसी चीज का विरोध हम खुद करते हुए उसको लेकर भेड़-बकरियों की तरह लड़ते-झगड़ते रहते हैं।

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महान विचारक नित्शे एवं गुरू पतंजलि ने कहा था कि एक दिन ऐसा भी आएगा, जब इंसान की नई प्रजाति जन्म लेगी, जिसको 'महामानव' कहा जाएगा। महामानव ने तो अब तक जन्म नहीं लिया, लेकिन महादानव जरूर पैदा हो गए। मुंबई पर हमला करने वाले अजमल कसाब और अन्य आतंकवादियों को आप इस श्रेणी में जरूर रख सकते हैं। कहा जाता है कि दानव की कभी मृत्यु नहीं होती। मिसाल के तौर पर देखा जाए तो अमेरिका को दहलाने वाला ओसामा बिन लादेन ऐसा ही एक दानव बन चुका है, जिसकी जीवन और मृत्यु को लेकर आज भी असमंजस बरकरार है।

फिलहाल, हम अपनी कहानी की मूल बात पर आते हैं। अगर आज अजमल कसाब और अफजल गुरू नहीं होते तो भला उन भ्रष्ट नेताओं को कौन पहचानता। वह भी जानते हैं कि सिर्फ सफेद चोला पहनने से लोगों की दृष्टि उन तक नहीं पहुँच सकती। कुछ ऐसा किया जाए कि लोग हमें देखें। वह चाहते तो उन महादानवों को कब की फाँसी लगवा देते, लेकिन फिर क्या होता, लोग इन नेताओं को ही भूल जाते। यानी मानव और शैतान का गठबंधन आज भी जारी है।

आम आदमी को खुद के लिए सोचने का समय नहीं मिल पाता तो फिर वह दूसरों की चिंता को कब तक कर पाएगा। कहने के लिए हमारे देश में विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। लेकिन आज भी यहाँ का हर शख्स जिम्मेदारियों, शारीरिक व मानसिक शोषण की कई जंजीरों से जकड़ा हुआ है।

काश! आज नित्शे और पतंजलि जिंदा होते तो मैं उनसे कहता कि आदरणीय संतों, आपकी कल्पना बहुत अच्छी है, लेकिन हम अपने भारत देश में चाहकर भी महामानव पैदा नहीं कर सकते। अब वह जमाना नहीं रहा, जब माताओं की गोद से महात्मा गाँधी, सुभाष चंद्र बोस और भगतसिंह जैसे लाल पैदा होते थे। आज के लाल पूरी तरह पीले हो चुके हैं। जिम्मेदारियों के बोझ से उन्हें पीलिया हो गया है। अब तो बस एक ही चीज हो सकती है। कृपया इस जीवन-मरण के चक्र से उन्हें मोक्ष दिलवाए या फिर आप खुद ही इस दुनिया में महामानव बनकर जन्म लें।

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