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लोहड़ी पर किस देवता की होती है पूजा?

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हमें फॉलो करें Lohri 2026 Puja

WD Feature Desk

, गुरुवार, 8 जनवरी 2026 (15:15 IST)
Lohri 2026 Puja: लोहड़ी एक महत्वपूर्ण पंजाबी त्योहार है, जो भारत में खासकर पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर भारत के अन्य हिस्सों में मनाया जाता है। यह सर्दियों के अंत और पौष मास की समाप्ति का प्रतीक है। लोहड़ी का त्योहार खासकर मकर संक्रांति से पहले मनाया जाता है, जब सूर्य का उत्तरायण होता है।ALSO READ: Lohri Geet: लोहड़ी में गाए जाते हैं ये 5 गीत
 
यह त्योहार फसल की कटाई और खुशियों के स्वागत का प्रतीक है। लोग इस दिन पारंपरिक रीतियों के अनुसार देवताओं की पूजा करते हैं और आग के चारों ओर नृत्य करते हुए खुशियां मनाते हैं। लोहड़ी का त्योहार मुख्य रूप से अग्नि देव और सूर्य देव को समर्पित है। हालांकि, इसमें किसी मूर्ति पूजा की बजाय प्रकृति के तत्वों और लोक नायकों के प्रति आभार व्यक्त किया जाता है। 
 
लोहड़ी पर इन देवताओं और शक्तियों की पूजा का महत्व है:
 
1. अग्नि देव : लोहड़ी की शाम को पवित्र अग्नि (अलाव) जलाई जाती है। लोग अग्नि के चारों ओर परिक्रमा करते हैं और इसमें तिल, गुड़, रेवड़ी और मूंगफली अर्पित करते हैं। अग्नि को शुद्धता और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि अग्नि देव को भोग लगाने से घर में संपन्नता आती है और नकारात्मकता दूर होती है।
 
इस दिन लोग लोहड़ी पर्व मनाते हुए अग्नि के चारों ओर गोल घूमते हुए नृत्य करते हैं, गीत गाते हैं, और अग्नि देव से शुभ फल की प्राप्ति की प्रार्थना करते हैं। अग्नि को जीवन की ऊर्जा और शुद्धता का प्रतीक माना जाता है, और लोग मानते हैं कि अग्नि के माध्यम से बुरे कर्म जलकर नष्ट हो जाते हैं और नए ऊर्जा का संचार होता है। 
 
2. सूर्य देव : लोहड़ी मकर संक्रांति से ठीक एक दिन पहले मनाई जाती है। यह उस समय का प्रतीक है जब सूर्य उत्तर की ओर गमन (उत्तरायण) करना शुरू करता है। जाड़े की भीषण ठंड के बाद सूर्य की गर्माहट का स्वागत करने के लिए सूर्य देव के प्रति कृतज्ञता प्रकट की जाती है। सूर्य देवता के प्रति आस्था को बढ़ावा देने के लिए लोग इस दिन सूर्य को अर्घ्य देकर उनकी पूजा करते हैं और उनसे समृद्धि, उन्नति और सुख-शांति की कामना करते हैं।
 
3. इंद्र देव : चूंकि यह फसल कटाई का त्योहार है, इसलिए अच्छी वर्षा और भरपूर पैदावार के लिए इंद्र देव को भी याद किया जाता है। साथ ही यह त्योहार खासतौर से कृषि समुदाय के लिए बहुत मायने रखता है, इसीलिये लोग सूर्य की पूजा करते हुए अच्छे फल की कामना करते हैं।
 
4. दुल्ला भट्टी (लोक नायक) : धार्मिक देवताओं के अलावा, लोहड़ी पर दुल्ला भट्टी का विशेष रूप से सम्मान किया जाता है। उन्हें सम्मान देने के लिए ही 'सुंदर मुंदरिये' वाला लोकगीत गाया जाता है। उन्हें पंजाब के इतिहास में एक रक्षक के रूप में पूजा जाता है।
 
लोहड़ी का मुख्य उद्देश्य अच्छी फसल की कामना और खुशहाली का प्रतीक है। इस दिन, लोग अग्नि के चारों ओर घूमकर परिवार, दोस्तों और समुदाय के साथ मिलकर खुशी मनाते हैं। लोहड़ी के दिन तिल, गुड़, मूंगफली, और सूरजमुखी के बीज को आग में डालने की परंपरा है, जोधन, सुख और समृद्धि की प्राप्ति का प्रतीक है।
 
अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: जनवरी में मकर संक्रांति के साथ पोंगल, लोहड़ी, भोगी पंडिगाई, मकरविलक्कु और माघ बिहु का महत्व

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