Publish Date: Sun, 02 Jun 2019 (10:36 IST)
Updated Date: Sun, 02 Jun 2019 (10:42 IST)
भोपाल। पहले विधानभा और अब लोकसभा चुनाव के नतीजों ने साफ कर दिया है कि सरकार बनाने में किसानों की भूमिका सबसे अहम हो गई है। इसी के चलते चुनाव भले ही खत्म हो गए हों लेकिन अब भी सियासी दलों में किसानों की पूछ-परख जारी है।
जहां केंद्र में दूसरी पारी की शुरुआत करते हुए मोदी सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट की बैठक में बड़ा निर्णय लेते हुए देश के सभी 15 करोड़ किसानों को हर साल 6,000 रुपए नकद देने के प्रस्ताव को मंजूरी देकर किसान वोटबैंक को स्थिर रखने की कोशिश की है, तो दूसरी ओर अब मध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकार किसानों पर धरना-प्रदर्शन और आंदोलन के दौरान दर्ज हुए केस वापस लेने जा रही है।
किसानों पर दर्ज ऐसे अधिकांश मामले 2 साल पहले मध्यप्रदेश में किसान आंदोलन के समय के हैं जिनको अब कांग्रेस सरकार ने वापस लेने का फैसला किया है। इसके लिए शनिवार को गृह और विधि विभाग के अधिकारियों की एक बैठक भी हुई। बैठक में गृहमंत्री बाला बच्चन के साथ कानून मंत्री पीसी शर्मा ने अधिकारियों के साथ मुकदमे वापस लेने की पूरी प्रकिया की समीक्षा की।
सरकार ने किसानों पर दर्ज केस वापस लेने के लिए जिला और राज्य स्तर पर समितियों का गठन किया, वहीं कानून मंत्री पीसी शर्मा का कहना है कि भाजपा सरकार के समय अपने हक की मांग करने वाले किसानों और राजनीतिक पार्टियों के कार्यकर्ताओं पर झूठे केस लगाकर उनको परेशान किया गया था, अब कांग्रेस सरकार ऐसे सभी केस वापस लेने जा रही है।
3 जून को होने वाली कैबिनेट की बैठक में इस पूरी प्रकिया के ड्राफ्ट पर चर्चा होगी। इसके साथ ही मध्यप्रदेश में किसानों की कर्जमाफी की प्रक्रिया फिर शुरू हो गई है और सरकार सभी किसानों का कर्ज माफ करेगी।