Publish Date: Thu, 07 Mar 2019 (09:29 IST)
Updated Date: Thu, 07 Mar 2019 (09:37 IST)
भोपाल। मध्यप्रदेश में लोकसभा चुनाव से पहले आरक्षण को बड़ा मुद्दा बनता देख कमलनाथ सरकार बैकफुट पर आ गई है। वेबदुनिया ने अपनी चार मार्च की खबर में बताया था कि लोकसभा चुनाव में मध्यप्रदेश में आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर गर्म होगा।
बीजेपी और सपाक्स पार्टी गरीब सवर्णों को दस फीसदी आरक्षण नहीं देने पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। ऐसे में विपक्ष की रणनीति की धार को कुंद करने के लिए मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आरक्षण को लेकर बड़ा ऐलान किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा मध्यप्रदेश में निर्धन सवर्णों को दस फीसदी आरक्षण दिया जाएगा। इसके साथ मुख्यमंत्री ने ओबीसी को भी 27 फीसदी आरक्षण देने की बड़ी घोषणा कर दी। अब तक मध्यप्रदेश में ओबीसी को 14 फीसदी आरक्षण मिलता है। मुख्यमंत्री की इस घोषणा के बाद सूबे की सियासत में एक बार फिर आरक्षण का मुद्दें ने जोर पकड़ लिया है।
नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने आरक्षण के मुद्दें पर सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा कि अगर मुख्यमंत्री को सवर्णों और पिछड़ों की वास्तव में चिंता है तो समिति बनाने की जगह तत्काल आरक्षण को लागू क्यों नहीं करते। वहीं ओबीसी के आरक्षण को 14 फीसदी से बढ़ाकर 27 फीसदी करने को गोपाल भार्गव तो चुनावी शिगूफा बता रहे हैं।