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PM मोदी तक पहुंचा महाकाल मन्दिर में दर्शन शुल्क, VIP कल्चर का मामला, मंदिर में बदइंतजामी को लेकर सोशल मीडिया पर छलका श्रद्धालु का दर्द

हमें फॉलो करें PM मोदी तक पहुंचा महाकाल मन्दिर में दर्शन शुल्क, VIP कल्चर का मामला, मंदिर में बदइंतजामी को लेकर सोशल मीडिया पर छलका श्रद्धालु का दर्द

वेबदुनिया न्यूज डेस्क

, शुक्रवार, 12 मई 2023 (16:45 IST)
Mahakal Temple: विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में महाकाल लोक के निर्माण के बाद श्रद्धालुओं को होने वाली परेशानी के साथ बढ़ते वीआईपी कल्चर और दर्शन शुल्क का मामला अब लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। महाकाल मन्दिर (mahakal temple) में आम श्रद्धालुओं को होने वाली परेशानी और दर्शन शुल्क एवं वीआईपी कल्चर पर रोक के लिए पिछले लंबे समय मुहिम छेड़ने वाले स्वस्तिक पीठ के पीठाधीश्वर डॉ अवधेशपुरी महाराज ने पूरे मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। वहीं महाकाल मंदिर में दर्शन व्यवस्था को लेकर स्थानीय लोग सवाल उठाने के साथ सोशल मीडिया पर भी श्रद्धालुओं का दर्द समाने आ रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखा पत्र?- क्रांतिकारी संत परमहंस डॉ. अवधेशपुरी महाराज ने पत्र में लिखा कि मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार है, जिसे हिन्दूवादी सरकार माना जाता है, किंतु यह घोर आश्चर्य एवं विडंबना ही है कि ऐसी हिन्दूवादी सरकार के कार्यकाल में भी विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकाल के दरबार में नागरिकों के संवैधानिक मूल अधिकारों का हनन किया जा रहा है। दर्शन शुल्क व वीआईपी कल्चर द्वारा गरीब और अमीर के बीच भेदभाव किया जा रहा है। गरीब भक्तों को भगवान से दूर किया जा रहा है।

मस्जिद-चर्च- गुरुद्वारे में VIP कल्चर नहीं, फिर मंदिर में क्यों?- अवधेशपुरी महाराज अपने पत्र में लिखते  कि कि अत्यंत प्रासंगिक, आश्चर्यजनक एवं चिन्तनीय विषय है कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14 विधि के समक्ष समता का अधिकार देते हुए कहता है कि राज्य क्षेत्र में किसी व्यक्ति के विधि के समक्ष समता से या विधियों के समान संरक्षण से वंचित नहीं करेगा। भारत के संविधान के आधारभूत ढांचे के अंतर्गत आने वाला यह अनुच्छेद नैसर्गिक न्याय और कानून का शासन के सिद्धांत का प्रतिपादन करता है। यह नागरिकों के मानवाधिकारों की रक्षा का मौलिक अधिकार है, किंतु इसका उल्लंघन करते हुए जहाँ एक भी मस्जिद, गिरजाघर, चर्च या गुरुद्वारे में न ही वीआईपी कल्चर है और न ही दर्शन के नाम पर शुल्क लिया जाता है किंतु हिंदुओं के मंदिरों का पहले तो सरकारीकरण किया गया है और अब उन्हें व्यावसायिक केंद्र बनाते हुए हिंदू वीआईपी कल्चर विकसित करते हुए श्रद्धालुओं से दर्शन का शुल्क लिया जा रहा है।
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अवधेशपुरी महाराज के अनुसार अनुच्छेद 25 सभी व्यक्तियों को अंतःकरण की स्वतंत्रता धर्म को अवाध रूप से मानने, आचरण करने व प्रचार करने का अधिकार देता है तो फिर शासन एवं प्रशासन वीआईपी कल्चर व दर्शन शुल्क के द्वारा भगवान महाकाल और उनके गरीब भक्तों के बीच में बाधा क्यों बन रहा है? भक्तों को भगवान से दूर क्यों कर रहा है? अनुच्छेद 26 हमें धार्मिक स्वतंत्रता धार्मिक संस्थाओं की स्थापना, संपत्ति का अर्जन, पोषण, स्वामित्व, प्रशासन एवं धार्मिक कार्यों के प्रबंधन का अधिकार देता है तो फिर हिंदू मठ मंदिरों को शासन द्वारा प्रशासित कर हिंदुओं के संवैधानिक मूल अधिकारों के साथ खिलवाड़ क्यों किया जा रहा है?

प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप का अनुरोध-प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में डॉ. अवधेशपुरी महाराज कहते हैं कि मैं एक संन्यासी होने के नाते अपने संन्यासी धर्म का पालन करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से आग्रह करता हूँ कि जब एक ओर आप एक धार्मिक स्वभाव के अति लोकप्रिय प्रधानमंत्री हैं। व्यक्ति के जन्म से लेकर मृत्यु तक अनेक जनकल्याणकारी योजनाएं संचालित कर रहे हैं। गरीबों को बीपीएल कार्ड बनाकर दे रहे हैं। उन्हें 5 किलो राशन देकर उपकृत कर रहे हैं। गरीबों और अमीरों के बीच भेदभाव कर गरीबों को भगवान से दूर कैसे कर सकते हैं? अतः आप गरीब भक्तों को भगवान से दूर न करें। भगवान महाकाल के दरबार में वीआईपी कल्चर के होने से भी गरीब भक्त अपने आपको छोटा एवं अपमानित अनुभव करता है। यह भी बन्द होनी चाहिए। इसे आप एक संत की पीड़ा, कर्तव्य, सुझाव अथवा आग्रह कुछ भी माने किंतु इस पर गंभीरतापूर्वक विचार कर दर्शन के नाम पर शुल्क की व्यवस्था एवं वीआईपी कल्चर को समाप्त करें।
 
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सोशल मंडल पर छलका रहा श्रद्धालुओं का दर्द- बाबा महाकाल के मंदिर को भव्यता प्रदान करने के लिए बनाया जा रहे महाकाल लोक वैसे तो अपनी भव्यता से पूरे देश से श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकृर्षित कर रहा है लेकिन यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के अनुभव कुछ ठीक नहीं है। सोशल मीडिया पर भी एक श्रद्धालु ने महाकाल लोक में व्याप्त अव्यवस्था पर सवाल उठाए है। सोशल मीडिया पर श्रद्धालु ने  लिखा कि “कल पहली बार महांकाल लोक कि यात्रा का सौभाग्य प्राप्त हुआ और मन बड़ा प्रसन्न था कि कई वर्षों बाद ये अवसर मिला बाबा का बुलावा आया। पर वहां जाने के बाद ऐसा लगा कि पहले की मंदिर दर्शन व्यवस्था ही बहुत बेहतर थी। बहुत परेशान हुए। ऐसा लगा करोड़ों का खर्चा किया पर आम जनता का कोई ख्याल नहीं। बाहरी आवरण पर ज्यादा ध्यान और मुख्य व्यवस्था पर ध्यान कम। सबसे पहले तो मंदिर का रास्ता बहुत लंबा और उस पर ई-रिक्शा ऊंट के मुंह में जीरा बच्चे, बुजुर्ग, परेशान, उसपर गाड़ी वाले चालकों का दुर्व्यवहार। फिर जैसे तैसे मंदिर पहुंचे आम आदमी कि तरह पुलिस वाले ने बताया 20 मिनिट में दर्शन हो जायेंगे जबकि कल कोई खास दिन या छुट्टी का दिन भी नहीं फिर भी।
 
सोशल मीडिया पर अपना दर्द बयां करते हुए श्रद्धालु आगे लिखता है कि हजार लोग और मंदिर परिसर में भयानक गर्मी केवल एक लाईन में पंखे जो इतनी उंचाई पर कि हवा भी न लगे और महज 4-6 कूलर और भीड़ को रोक दिया एक-डेढ़ घंटे। पीने के पानी कि कोई व्यवस्था नहीं और अंदर लंबा घुमावदार रस्ता जो वरिष्ठ नागरिकों और घुटनों के, मरीजों के लिए दर्दनाक है। 2-3 लोगों को चक्कर खा के गिरते देखा और बच्चों, बड़ों को पानी के लिए तरसते देखा दो घंटे बाद जब गर्भगृह पहुंचे तो वहां भी केवल 2 मिनिट और आगे बढ़ो कि पुलिस कि आवाजें ध्यान भटकाती,,लोग आस्था लेकर देश, विदेश से आते हैं और ढंग से दर्शन भी नहीं कर पाते हैं ।जब कुछ यात्रियों जो बाहर से आये थे उन्होंने देश के अन्य मंदिरों के बारे में बताया कि वहां कितनी अच्छी व्यवस्था है। यहां आकर तो उनका मोह भंगा हुआ कि दुबारा न आए। जैसे तैसे बाहर आए और देखा कि ई -रिक्शा पर भीड़ लंबा इंतजार कहीं कोई नंबर नहीं कि गेट से बुलाया जा सके। इससे अच्छा तो यह होता कि मंदिर प्रबंधन दो काउंटर खोलता व टोकन सिस्टम कर देता जैसे तैसे रिक्शा में जगह बनाई और बाहर आये।

क्या कहते हैं स्थानीय पत्रकार?-महाकाल मंदिर बुजुर्गों के लिए अलग से दर्शन व्यवस्था नहीं होने पर स्थानीय लोग भी सवाल उठाते है। लेखक और वरिष्ठ पत्रकार ड़ॉ. रमेश दीक्षित कहते हैं कि महाकाल लोक के निर्माण के बाद बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में काफी इजाफा हुआ है। निर्माण कार्य होने के चलते और बाहर से भक्तों की बड़ी संख्या आने के कारण स्थानीय स्तर पर कठिनाई हो रही है। वह कहते हैं कि महाकाल मंदिर में भीड़ के चलते उज्जैन के स्थानीय वरिष्ठ नागरिक बाबा महाकाल के दर्शन के लिए नहीं जा पा रहे है। वह कहते हैं कि जैसे तिरुपति में वरिष्ठ नागरिकों को दर्शन के लिए अलग से समय तय किया गया है, वैसा ही कुछ महाकाल मंदिर में भी हो। महाकाल मंदिर में वरिष्ठ नागरिकों के दर्शन के लिए अलग से समय निर्धारित किया जाना चाहिए।

महाकाल मंदिर में वीआईपी कल्चर पर कहते हैं कि ‘वेबदुनिया’ से बातचीत में डॉ. रमेश दीक्षित करते हैं कि वीआईपी लोगों के साथ आने वाले लोगों की संख्या की भी सीमा तय होना चाहिए। वहीं दर्शन शुल्क लेने पर वह कहते हैं कि यह लोगों पर निर्भर करता है कि वह दर्शन शुल्क देकर दर्शन करें या नहीं है।।

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