Hanuman Chalisa

Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia

इंदौर में पानी के संकट पर संग्राम, कांग्रेस ने मटके फोड़े, नगर निगम घेरा, कई कॉलोनियों में बूंद बूंद को तरसे लोग

Advertiesment
indore water crisis
इंदौर में पानी का संकट गहराता जा रहा है। कई कॉलोनियों में लोग पानी के लिए तरस रहे हैं। उस पर टैंकर वाले मनमानी कर रहे हैं। लोगों को समस्या से जूझता हुआ देख कांग्रेस का शासन पर गुस्‍सा फूट पड़ा है। कांग्रेस ने शुक्रवार को नगर निगम पर जमकर प्रदर्शन किया और महापौर के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उन्‍होंने निगम प्रशासन और महापौर मुर्दाबाद के नारे लगाए। इसी तरह विरोध के तौर पर कई जगह मटके फोड़े गए।

निगम की नाकामी का नतीजा : इंदौर शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाते हुए कहा कि निगम की नाकामियों के कारण आज पूरा शहर भीषण जल संकट के दौर से गुजर रहा है। चौकसे के अनुसार शहर की लगभग आधी आबादी तक नर्मदा का पानी आज भी नहीं पहुंच पा रहा है। जिन इलाकों में पाइपलाइन मौजूद है और पानी की सप्लाई हो भी रही है, वहां भी स्थिति बेहद खराब है।

35 लोगों की मौत के बाद भी नहीं जागा: उन्‍होंने बताया कि कई इलाकों में न तो पानी का दबाव पर्याप्त है और न ही तय समय सीमा के अनुसार आपूर्ति की जा रही है। कई क्षेत्रों में लंबे समय से गंदा और दूषित पानी आने की समस्या बनी हुई है। उन्होंने बेहद कड़े लहजे में आरोप लगाया कि दूषित पानी के कारण 35 लोगों की मौत हो जाने जैसी गंभीर घटना के बाद भी नगर निगम प्रशासन ने स्थिति में सुधार के लिए कोई ठोस या प्रभावी कदम नहीं उठाए हैं।

जल संकट के इस मुद्दे पर कांग्रेस ने भाजपा के दीर्घकालिक स्थानीय शासन को आड़े हाथों लिया है। कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया कि नगर निगम में भाजपा के पिछले 27 वर्षों के निरंतर शासन के बाद भी शहर के प्रत्येक नागरिक तक नर्मदा का जल पहुंचाने की बुनियादी व्यवस्था क्यों नहीं की जा सकी। चिंटू चौकसे ने पूर्व के दावों की याद दिलाते हुए कहा कि जब नर्मदा परियोजना के तीसरे चरण की शुरुआत की गई थी, तब प्रशासन और सत्ताधारी दल द्वारा यह बड़े-बड़े दावे किए गए थे कि यह परियोजना साल 2040 तक की अनुमानित आबादी के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने में पूरी तरह सक्षम रहेगी। लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है और वर्तमान में साल 2026 की आबादी को भी दैनिक उपयोग के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है, जिससे सारे दावों की पोल खुल गई है।

टैंकर वाले कर रहे मनमानी : एक तरफ पानी की मार झेल रहे आम लोगों को टैंकर माफिया का भी शिकार होना पड रहा है। पहले से पानी के टैंकर मिल नहीं रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ टैंकर वाले मनमानी कीमत वसूल रहे हैं। छोटे टैंकर के 500 से ज्‍यादा वूसल किए जा रहे हैं। जबकि बडे टैंकर के बदले 800 और 1 हजार रुपए की वसूली की जा रही है।

जल वितरण में वीआईपी संस्कृति : आंदोलन की रूपरेखा साझा करते हुए कांग्रेस ने नगर निगम पर जल वितरण में पक्षपात और असमानता बरतने का बड़ा आरोप लगाया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि शहर में पानी का बंटवारा समान रूप से नहीं हो रहा है। कुछ रसूखदार और वीआईपी क्षेत्रों में बहुत लंबे समय तक और अत्यधिक दबाव के साथ पानी की सप्लाई की जा रही है, जबकि दूसरी तरफ शहर की आम जनता पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रही है।

ठेका व्यवस्था पर सवाल: कांग्रेस ने शहर के उन क्षेत्रों की स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की है जहां अभी तक नर्मदा की पाइपलाइन नहीं बिछाई जा सकी है। इन इलाकों में रहने वाले लोग पूरी तरह से बोरिंग के पानी पर निर्भर हैं। भीषण और तेज गर्मी के कारण वर्तमान में कई क्षेत्रों के बोरिंग सूख चुके हैं या फिर उनकी मोटरें खराब हो गई हैं। चौकसे ने आरोप लगाया कि नगर निगम के नियंत्रण वाले सरकारी बोरिंगों की स्थिति निजी बोरिंगों से भी ज्यादा बदतर है। उन्होंने नगर निगम की ठेका प्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पूरे शहर की मोटरों को सुधारने का जिम्मा केवल एक ही ठेकेदार को सौंप दिया गया है।
 रिपोर्ट : नवीन रांगियाल

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi

अगला लेख

उन्नाव रेप केस: कुलदीप सिंह सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, हाईकोर्ट का आदेश रद्द