Publish Date: Mon, 11 May 2026 (11:18 IST)
Updated Date: Mon, 11 May 2026 (13:49 IST)
जम्मू कश्मीर लगातार छठे महीने बारिश की भारी कमी देख रहा है, जिससे पानी के संकट, नदियों के घटते जलस्तर और पूरे केंद्र शासित प्रदेश में पनबिजली उत्पादन पर दबाव बढ़ने की आशंकाएं पैदा हो गई हैं। जबकि लगातार सात सर्दियों से प्रदेश को सूखे का सामना करना पड़ रहा है। अप्रैल महीने के बारिश के नए आंकड़ों ने चिंताओं को और गहरा कर दिया है; जम्मू कश्मीर में सामान्य 99.6 मिमी के मुकाबले सिर्फ 86.5 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो 13 प्रतिशत की कमी को दर्शाता है।
अप्रैल महीने के जिला-वार बारिश के आंकड़े एक गंभीर तस्वीर पेश करते हैं, खासकर कश्मीर घाटी और दक्षिण कश्मीर के कुछ हिस्सों के लिए। शोपियां में बारिश की सबसे ज्यादा कमी (67 प्रतिशत) दर्ज की गई; यहां सामान्य 102.1 मिमी के मुकाबले सिर्फ 33.9 मिमी बारिश हुई। इसके बाद कठुआ में 60 प्रतिशत की कमी देखी गई, जबकि अनंतनाग में सामान्य से 46 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई।
कुलगाम और पुलवामा में क्रमशः 39 प्रतिशत और 38 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई, जबकि श्रीनगर में सामान्य 93.9 मिमी के मुकाबले 63.8 मिमी बारिश होने से 32 प्रतिशत की कमी देखी गई। बडगाम में 34 प्रतिशत की कमी, किश्तवाड़ में 26 प्रतिशत, गांदरबल में 23 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि बांदीपोरा और बारामुल्ला दोनों में 13 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
क्या है जम्मू और उत्तर कश्मीर का हाल
हालांकि, जम्मू संभाग और उत्तरी कश्मीर के कुछ जिलों में अप्रैल के दौरान सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई। सांबा में सबसे ज्यादा 96 प्रतिशत ज्यादा बारिश दर्ज की गई, इसके बाद राजौरी (+46%), रियासी (+40%), जम्मू और उधमपुर (दोनों में +15%), पुंछ (+14%), कुपवाड़ा (+4%), रामबन (+2%) और डोडा (+1%) का नंबर आया।
जलवायु परिवर्तन को लेकर बढ़ती चिंता
दरअसल बारिश के असमान वितरण ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन को लेकर बढ़ती चिंताओं को उजागर किया है; विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि जम्मू कश्मीर में मौसम के अनियमित मिजाज और लंबे समय तक सूखे के दौर अब ज्यादा आम होते जा रहे हैं।
मौसम पूर्वानुमानकर्ताओं ने चेतावनी दी कि मौजूदा सूखा इस क्षेत्र में जलवायु संबंधी तनाव के एक लंबे पैटर्न को और भी गंभीर बना रहा है। वे कहते थे कि असली खतरा इस बात में है कि यह सिर्फ एक खराब साल की बात नहीं है। हम लगातार सात ऐसी सर्दियों से गुजरे हैं, जिनमें बारिश सामान्य से कम हुई है। हम अपने पानी के भंडार को फिर से भरे बिना ही उसे खर्च करते जा रहे हैं।
तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए मौसम पूर्वानुमानकर्ताओं का कहना था कि अधिकारियों को पानी की कमी के और बढ़ने का इंतजार करने के बजाय, अभी से तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। वे कहते थे कि सरकार को इस सच्चाई को समझना होगा और अभी से तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। हम संकट के अपने दरवाजे तक पहुंचने का इंतजार करके योजना बनाना शुरू नहीं कर सकते।
स्वतंत्र मौसम पूर्वानुमानकर्ता फैजान आरिफ कहते थे कि ऐसा लगता है कि जम्मू कश्मीर के ऊपर से बादल अपना रास्ता भूल गए हैं। वे चेतावनी देते थे कि यह लंबे समय से चला आ रहा सूखा अब सिर्फ एक मौसमी विसंगति नहीं है, बल्कि यह एक गहरी पर्यावरणीय चिंता का संकेत है।
edited by : Nrapendra Gupta
About Writer
सुरेश एस डुग्गर
सुरेश डुग्गर वेबदुनिया के लिए जम्मू कश्मीर से समाचार संकलन के लिए अधिकृत हैं। वे तीन दशक से ज्यादा समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं।....
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