Publish Date: Fri, 06 Feb 2026 (14:14 IST)
Updated Date: Fri, 06 Feb 2026 (16:56 IST)
मध्यप्रदेश के नीमच जिले के रानपुर गांव की एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता कंचन बाई मेघवाल ने 'ममता' और 'कर्तव्य' की वो मिसाल पेश की है, जो इतिहास में दर्ज हो गई। 20 मासूम बच्चों की जान बचाने के लिए यह वीरांगना मधुमक्खियों के जानलेवा हमले के सामने दीवार बनकर खड़ी हो गई और अंततः अपनी जान गंवा दी। अब मध्यप्रदेश सरकार कंचन के परिवार को 4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान करेगी साथ ही बच्चों की पढ़ाई का खर्च भी सरकार उठाएगी।
मुख्यमंत्री ने मानवीय आधार पर कंचन बाई के परिवार को 4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने का निर्देश जारी किया है। साथ ही, सरकार ने एक बड़ा निर्णय लेते हुए यह भी घोषणा की है कि कंचन बाई के बच्चों की पढ़ाई का पूरा खर्च अब मध्य प्रदेश सरकार उठाएगी।
क्या हुआ था उस दिन
जब रानपुर के आंगनवाड़ी केंद्र के पास अचानक मधुमक्खियों ने हमला कर दिया। वहां 20 मासूम बच्चे मौजूद थे, जो इस हमले से बेखबर और लाचार थे। जब जहरीली मधुमक्खियां बच्चों की ओर बढ़ीं, तो 45 वर्षीय कंचन बाई ने अपनी जान की परवाह नहीं की। उन्होंने बच्चों को सुरक्षित घेरे में लिया और उन्हें वहां से भगाने में मदद की, लेकिन इस प्रक्रिया में हजारों मधुमक्खियों ने कंचन को अपना निशाना बना लिया। कंचन बाई तब तक नहीं डिगीं जब तक आखिरी बच्चा सुरक्षित नहीं हो गया। शरीर पर सैकड़ों डंक झेलने के बाद वे बेहोश होकर गिर पड़ीं और बाद में उन्होंने दम तोड़ दिया। Edited by : Sudhir Sharma