मंदसौर जिले में मानव तस्करी का बड़ा खुलासा, 30 हजार में मासूम को बेचने आई थी मां

मुस्तफा हुसैन

शुक्रवार, 21 सितम्बर 2018 (15:34 IST)
मालवा मानव तस्करी का एक बड़ा हब बनता जा रहा है और यहां तस्करी होती है लड़कियों की। मध्यप्रदेश के मंदसौर में एक बार फिर पुलिस ने मानव तस्करी का बड़ा खुलासा किया है। पुलिस ने मानव तस्करी से दो नाबालिग बच्चियों को छुड़ाकर तीन महिलाएं और दो पुरुष आरोपियों को गिरफ्तार किया है। लड़कियों की तस्करी उनसे जिस्मफरोशी का धंधा करवाने के लिए की जाती है। 
 
मालवा में बांछड़ा समुदाय के डेरों की खास जगह है और इस समुदाय में देहव्यापार को सामाजिक मान्यता है। ये समाज अपनी दो वक्त की रोटी कमाने के लिए लड़कियों से जिस्मफरोशी का धंधा करवाता है। इसी के चलते इस समाज में लड़की बड़ी कीमती चीज मानी जाती है। लड़की की पैदाइश पर बांछडा समुदाय में जमकर जश्न होता है। लेकिन, जवानी की दहलीज पर आते ही इन लड़कियों का जीवन नर्क से भी बदतर हो जाता है। इन सब बातों के मद्देनजर समुदाय ने लड़कियों की संख्‍या बढ़ाने का नया तरीका निकाला। वह यह है कि दूसरे समुदाय की गरीब परिवारों की लड़कियां पैदा होते ही खरीद लो फिर उसको पालो-पोसो, बड़ी करो और झोंक दो वेश्यावृत्ति के धंधे में। 
20 सितंबर को मंदसौर में पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। एसपी मनोज कुमार सिंह ने बताया की झारखंड की रहने वाली महिला अपनी दुधमुंही बच्ची को 30 हजार में बेचने आई थी। यह महिला एक दलाल के मार्फत यहां पर पहुंची। यह बच्ची जहां पर बेची जा रही थी, वह महिला जिस्मफरोशी का धंधा करती है। 
 
गिरफ्तार महिला ने बताया की दहेज में हमको बच्ची के ससुराल वालों को 5 लाख रुपए देने पड़ते हैं, जो हमारे पास व्यवस्था नहीं है। इसी कारण अपने 5 बच्चों में से एक बच्ची को मैंने 30 हजार में बेचने का सौदा किया है।
 
इससे पूर्व इसी वर्ष 6 जनवरी को मंदसौर पुलिस को कमलाबाई पति भारत धनगर उम्र 40 वर्ष निवासी ग्राम पानपुर से सूचना मिली की अफजलपुर थाने के डीगांवमाली गांव में ग्राम मोई चिकलिया महाराष्ट्र से दो नाबालिग लड़कियां खरीदकर लाई गई हैं, जिनसे देहव्यापार करवाया जा रहा है।
 
इस सूचना पर जब पुलिस ने पड़ताल की तो पता चला कि यहां दो नाबालिग बहनों को पुणे से लाकर बेचा गया है, जिसमे बड़ी बहन को 40 हजार रुपए और छोटी बहन को 90 हजार रुपए में। यह पता चलने के बाद पुलिस ने दोनों नाबालिग लड़कियों को बरामद कर लिया। उन्होंने पूछताछ में बताया की उन्हें सात साल पहले पुणे के ग्राम मोई चिकलिया में मजदूरी करते हुए मुकेश चौहान निवासी डीगांव हाल मुकाम चिकली ने रामसुख पिता फिरंगिया बांछड़ा निवासी डीगांव को एक लाख 30 हजार रुपए में बेच दिया। ये लोग दोनों से जिस्मफरोशी करवा रहे थे।
 
मालवा में पहला मामला : मालवा में जिस्मफरोशी के लिए मासूम बच्चियों की खरीद फरोख्त का पहला मामला उस समय सामने आया जब 15 जुलाई 2014 को नीमच पुलिस ने कुकड़ेश्वर पुलिस थाना क्षेत्र के मौया गावं मे स्थिति बांछड़ा डेरे पर दबिश दी थी, जहां श्याम लाल बांछड़ा के यहा पुलिस को एक 6 वर्षीय नाबालिग बालिका मिली। इसे वे नागदा से खरीदकर लाए थे।

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