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Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति पर किस देवता की होती है पूजा?

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WD Feature Desk

, मंगलवार, 6 जनवरी 2026 (16:58 IST)
Sun God worship: मकर संक्रांति हिंदू कैलेंडर का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के दिन मनाया जाता है। इस दिन विशेष रूप से सूर्य देवता की पूजा की जाती है, क्योंकि मकर संक्रांति को सूर्य के उत्तरायण यात्रा की शुरुआत मानी जाती है, जो छह महीने तक चलती है और इसे शुभ मानी जाती है।ALSO READ: जनवरी में मकर संक्रांति के साथ पोंगल, लोहड़ी, भोगी पंडिगाई, मकरविलक्कु और माघ बिहु का महत्व
 
मकर संक्रांति एक ऐसा पर्व है जो सूर्य देवता की पूजा, तिल और गुड़ के दान और सुख-समृद्धि की प्राप्ति का प्रतीक है। यह दिन नए वर्ष की शुरुआत, उत्तरायण की यात्रा और नयी उमंगों का प्रतीक है। इस दिन सूर्य देव की पूजा और तिल-गुड़ दान करने से व्यक्ति को जीवन में शांति, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। 
 
मकर संक्रांति पर पूजा के देवता: 
 
1. सूर्य देवता : मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव की पूजा का विशेष महत्व है। इस दिन लोग सूर्य देव से अपनी समृद्धि, स्वास्थ्य और सुख-शांति की कामना करते हैं। सूर्योदय के समय स्नान करने और सूर्य देव को अर्घ्य देने का प्रचलन है।
 
2. गंगा मैया और पवित्र नदियां: कई स्थानों पर गंगा नदी में स्नान करने की परंपरा भी है, क्योंकि यह पवित्रता और शुद्धता का प्रतीक मानी जाती है। मकर संक्रांति के दिन नदी स्नान करके पितृ तर्पण करके दान-पुण्य के कार्य करते हैं।
 
3. भगवान विष्णु : मकर संक्रांति पर भगवान विष्णु की पूजा का भी विधान है। उत्तर भारत में इस दिन विष्णु जी को खिचड़ी और तिल के लड्डू का भोग लगाया जाता है। कई स्थानों पर इसे 'खिचड़ी पर्व' भी कहते हैं।
 
4. शनि देव : धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सूर्य देव अपने पुत्र शनि देव के घर (मकर राशि) जाते हैं। इसलिए, शनि दोष से मुक्ति के लिए इस दिन शनि देव की पूजा और काले तिल का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।ALSO READ: Makar Sankranti 2026: 14 जनवरी को मनाया जाएगा 'मकर संक्रांति' पर्व, वर्षों बाद बना दुर्लभ संयोग
 
मकर राशि का पालन: मकर संक्रांति के दिन मकर राशि में सूर्य के प्रवेश को लेकर विशेष रूप से सूर्य की पूजा की जाती है। यह दिन उत्तरायण का आरंभ भी है, जो ज्योतिष में शुभ समय माना जाता है। 
 
मकर संक्रांति पर पूजा विधि:
 
1. स्नान और तर्पण: सुबह सूर्योदय से पहले उबटन और स्नान करने के बाद सूर्य देवता की पूजा करनी चाहिए।
 
2. तिल और गुड़: तिल-गुड़ का प्रसाद तैयार करके सूर्य को अर्पित करते हैं।
 
3. अर्घ्य और मंत्र: सूर्य देव को अर्घ्य देने के बाद कुछ खास मंत्रों का उच्चारण किया जाता है, जैसे 'ॐ सूर्याय नमः' या 'ॐ घृणि सूर्याय नमः' का जाप करें।
 
4. दान और व्रत: इस दिन दान का विशेष महत्व है, खासकर तिल, गुड़, कपड़े, द्रव्य और वस्त्र आदि दान करने की भारतीय परंपरा है। 
 
मकर संक्रांति एक खुशियों भरा और शुभ पर्व है, जो नए वर्ष की शुरुआत, समृद्धि और सूर्य के उत्तरायण यात्रा के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।
 
अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: मकर संक्रांति पर बन रहे हैं शुभ योग, 3 राशियों को मिलेगा आशीर्वाद

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