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मातृ दिवस पर 4 छोटी कविताएं : जीवन की सुरभि है माता

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मां, एक वृक्ष के समान
 
मां को समझ पाना बहुत मुश्किल है
मां की ममता की थाह
पाना बहुत मुश्किल है
मां एक वृक्ष के समान होती है,
उसकी जड़ों की थाह पाना
मुश्किल ही नहीं असंभव है।
-बेला जैन
 
मान करें मां का
 
कष्टों से नहीं हारती मां
दुःख-दर्द को नहीं दिखाती मां
मुस्कुराती हरदम खटती है मां
थकती है पर थकती नहीं मां
बूढ़ी होती है पर बूढ़ी नहीं होती है मां
मां के श्रम का मान करें, मनाएँ मां को
कुछ पल आराम करें
मां को ख़ुश करने का
क्यों न कुछ काम करें।
-गायत्री मेहता
 
कल्याणी कहलाती
 
नारी को वरदान है ममता
जीवन की सुरभि है माता
संस्कारों को पोषित करती
दुनिया उसे कल्याणी कहती।
-हंसा मेहता
 
मां कोई जात नहीं
 
क्या मां की भी कोई जात होती है
क्या वह हिन्दू या मुसलमान होती है
मां तो बस मां होती है
उनके आशीर्वाद के बिना
हमारी क्या पहचान होती है।
-अंजू श्रीवास्तव निगम
 
साभार- मेरे पास मां है

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