भाजपा के यह 9 'गढ़' जीत लिए तो मध्यप्रदेश में सरकार बना सकती है कांग्रेस

विशेष प्रतिनिधि

मंगलवार, 27 नवंबर 2018 (12:37 IST)
भोपाल। मध्यप्रदेश में 15 साल से सत्ता में काबिज बीजेपी को हराना कांग्रेस के लिए इस बार भी किसी चुनौती से कम नहीं है। वैसे तो बीजेपी ने पिछले 15 सालों में सूबे में अधिकांश सीटों पर कब्जा जमाया है, लेकिन कुछ ऐसी भी सीटें हैं, जिन पर भगवा झंडा कई दशकों से फहरा रहा है। 
 
गोविंदपुरा : भोपाल की गोविंदपुरा विधानसभा सीट बीजेपी का भगवा झंडा 1974 से लगातार लहरा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज बीजेपी नेता बाबूलाल गौर इस सीट से लगातार दस बार बीजेपी के विधायक रहे हैं। इस बार पार्टी ने गोविंदपुरा सीट से बाबूलाल गौर की बहू कृष्णा गौर को टिकट दिया है। कृष्णा गौर को टिकट मिलने से पहले पार्टी में काफी हाई वोल्टेज सियासी ड्रामा देखने को मिला था।
 
रहली : सागर जिले की रहली सीट पर 1985 से बीजेपी का कब्जा है। शिवराज सरकार में कैबिनेट मंत्री गोपाल भार्गव लगातार सात बार से इस सीट से विधायक चुने जा रहे हैं। भार्गव आठवीं बार फिर से चुनावी मैदान में हैं। गोपाल भार्गव एक सीट से सबसे ज्यादा बार विधायक चुने जाने के मामले में सूबे में सिर्फ बाबूलाल गौर से पीछे हैं।
 
दमोह : बीजेपी की इस परंपरागत सीट से शिवराज सरकार में वित्तमंत्री जयंत मलैया लगातार छह बार से विधायक चुने गए हैं। इस बार भी मलैया मैदान में हैं। इस बार जयंत मलैया को अपनी ही पार्टी के बागी दिग्गज नेता रामकृष्ण कुसमारिया से कड़े मुकाबले का सामना करना पड़ रहा है।
 
इंदौर-2 : इंदौर शहर की इस सीट पर 25 साल से बीजेपी का कब्जा है। बीजेपी के दिग्गज नेता कैलाश विजयवर्गीय इस सीट से तीन बार विधायक चुने गए। इसके बाद कैलाश के खास सिपहसालार रमेश मेंदोला दो बार से इस सीट से विधायक चुने जा रहे हैं। 2013 के विधानसभा चुनाव में रमेश मेंदोला ने इस सीट पर सूबे में सबसे बड़ी जीत हासिल करते हुए रिकॉर्ड 91 हजार मतों से जीत हासिल की थी। इस बार इस सीट से विजयवर्गीय के बेटे आकाश के चुनाव लड़ने की भी चर्चा थी, लेकिन पार्टी ने आकाश को इंदौर-3 से टिकट देकर एक बार फिर रमेश मेंदोला को चुनावी मैदान में उतारा है।
 
हरसूद : खंडवा जिले के सबसे अधिक चर्चित सीट हरसूद बीजेपी का मजबूत गढ है। कैबिनेट मंत्री विजय शाह लगातार पांच बार से इस सीट से विधायक चुने जा रहे हैं। पार्टी ने इस बार फिर से विजय शाह पर दांव लगाया है।
 
विदिशा : विदिशा को बीजेपी का गढ़ माना जाता है। 1980 से लगातार इस सीट पर भगवा झंडा लहरा रहा है। बीजेपी ने इस बार इस सीट से मुख्यमंत्री शिवराज के करीबी मुकेश टंडन को मैदान में उतारा है, वहीं पार्टी ने मौजूदा विधायक कल्याणसिंह ठाकुर का टिकट एंटी इनकम्बेंसी फैक्ट्रर के चलते काट दिया है।
 
देवास : 1990 से बीजेपी देवास सीट को जीतती आ रही है। पिछले सात चुनाव से बीजेपी ने हर चुनाव में कांग्रेस को मात दी है। बीजेपी के दिग्गज नेता रहे तुकोजी राव पवार देवास सीट से 23 साल तक विधायक चुने गए है। पवार के निधन के बाद पार्टी ने उनकी पत्नी गायत्री राजे को उम्मीदवार बनाकर चुनावी मैदान में उतारा जो विधायक चुनी गईं। पार्टी ने इस बार भी गायत्री राजे पवार को चुनावी मैदान में उतारा है।
 
आष्टा : सीहोर जिले की आष्टा सीट बीजेपी का गढ़ मानी जाती है। पिछले 6 विधानसभा चुनाव से इस सीट पर बीजेपी का कब्जा है। कांग्रेस 1985 के बाद से इस सीट को जीत नहीं सकी है। बीजेपी के रणजीतसिंह गुणवान पिछले दो चुनाव से इस सीट विधायक चुने जा रहे हैं।
 
सागर : बीजेपी का गढ़ माने जाने वाली सागर सीट पर बीजेपी लगातार पिछले पांच चुनाव से कब्जा जमाए हुए है। इस बार पार्टी ने फिर शैलेंद जैन पर दांव लगाया है, जिनकी सीधी टक्कर कांग्रेस के नेवी जैन से है।

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