मप्र में चुनाव प्रचार थमा : दिग्गज नेताओं ने विरोधियों पर छोड़े तीखे तीर

सोमवार, 26 नवंबर 2018 (22:38 IST)
भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा के 28 नवंबर को होने वाले चुनाव में मतदाताओं को अपने पक्ष में प्रभावित करने के लिए सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी कांग्रेस सहित सभी राजनीतिक दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों का धुआंधार चुनाव प्रचार सोमवार शाम को थम गया। प्रचार के अंतिम दौर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी सहित विभिन्न दिग्गज नेताओं ने अपने विरोधियों पर तीखे तीर छोड़ने में कोई कोताही नहीं की।
 
 
भाजपा ने प्रदेश की सत्ता में लगातार चौथी बार वापसी के लिए 'मामा' के नाम से लोकप्रिय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को अपना मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित कर दिया है। इसके विपरीत कांग्रेस ने फिलहाल इस पद के लिए अपना कोई चेहरा घोषित करने से परहेज किया है। शिवराज दिसंबर 2005 से लगातार प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं और भाजपा 2008 और 2013 का चुनाव उनके नेतृत्व में मध्यप्रदेश फतह कर चुकी है। वर्ष 2003 का चुनाव भाजपा ने अपनी भगवा नेता उमा भारती के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में जीता था।
 
पिछले दिनों प्रदेश में चुनाव प्रचार अभियान में प्रधानमंत्री मोदी 10 आमसभाओं को संबोधित कर चुके हैं। चुनाव प्रचार के अंतिम दौर में उन्होंने गांधी परिवार पर निशाना साधा। उन्होंने राजनीति से संबंध नहीं रखने वाले अपने माता-पिता को विपक्ष द्वारा राजनीति में घसीटने का आरोप लगाया और इसके लिए राहुल गांधी को जिम्मेदार ठहराया।
 
कांग्रेस प्रमुख राहुल गांधी ने चुनाव प्रचार के तहत प्रदेश में 15 से अधिक सभाएं और रोड शो किए। प्रचार के अंतिम दौर में राहुल ने भी मोदी पर आरोप लगाया कि मुद्दाविहीन भाजपा ने उनके परिवार के लोगों का नाम राजनीति में घसीटा।
 
3 दिन पहले इंदौर में उत्तरप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर ने रुपए की गिरती कीमत की तुलना मोदी की माताजी की बढ़ती उम्र से की। इस पर उन्हें भाजपा के कोप का सामना करना पड़ा और मोदी ने आमसभा में कांग्रेस को फटकारते हुए कहा कि उनकी मां को राजनीति में घसीटा जा रहा है।
 
मोदी ने रविवार को विदिशा में कांग्रेस अध्यक्ष सहित पार्टी नेताओं पर बरसते हुए उनके परिवार को चुनावी लड़ाई में बीच में लाने के लिए लताड़ते कहा कि उनके माता-पिता सहित कई पीढ़ियों के लोगों का राजनीति से कोई संबंध नहीं रहा है जबकि कांग्रेस अध्यक्ष के परिवार के लोग राजनीति और दल में शीर्षस्थ पदों पर रहे हैं इसलिए लोकतंत्र में उनकी जवाबदेही भी है।
 
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने भी चुनाव प्रचार के दौरान प्रदेश में अपना डेरा जमाया और कई आमसभाएं और रोड शो किए। अंत में प्रदेश के अशोकनगर में एक रोड शो के दौरान वे गिर भी पड़े लेकिन उनको कोई चोट नहीं लगी।
 
पिछलों दिनों प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ का एक कथित वीडियो भी वायरल हुआ और प्रचार के दौरान इसकी चर्चा भी खूब हुई। इस वीडियो में कमलनाथ कुछ मुस्लिम नेताओं से मुस्लिम बहुल इलाकों में अधिक मतदान कराने की बात करते हुए दिखाई दे रहे थे। भाजपा ने इस वीडियो में एक समुदाय विषेश के मत लेने के आग्रह पर कमलनाथ को आड़े हाथों लेते हुए उन पर लोकतंत्र का अपमान करने का आरोप लगाया।
 
मोदी, उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, गृहमंत्री राजनाथ सिंह और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपनी आमसभाओं में कमलनाथ पर एक समुदाय विशेष के वोट लेने के आग्रह करने पर तीखी आलोचना की। उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी ने भोपाल में एक आमसभा में कहा कि कमलनाथ कहते हैं कि उनको एससी/ एसटी वोट नहीं चाहिए। योगी ने कहा कि कमलनाथजी, आपको ये अली मुबारक, हमारे लिए बजरंगबली पर्याप्त होंगे।
 
भाजपा 'अबकी बार, 200 पार' का नारा नारा देकर कार्यकर्ताओं में उत्साह भर रही है। प्रदेश में कई विधानसभा सीटों पर इस बार रोचक मुकाबला देखने को मिल रहा है। जनता भी मौन साधे हुए हैं और अपने मन की बात किसी को जाहिर नहीं कर रही है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की परंपरागत सीट बुधनी से उन्हें इस दफा मुकाबला देने कांग्रेस के पूर्व केंद्रीय मंत्री और प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव मैदान में खड़े हो गए हैं।
 
बढ़ती उम्र के आधार पर भाजपा के टिकट से वंचित किए गए पूर्व केंद्रीय मंत्री सरताज सिंह भाजपा छोड़कर होशंगाबाद सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर भाजपा के मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. सीतासरण शर्मा के खिलाफ ताल ठोंक रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के पुत्र और कांग्रेस के विधायक जयवर्धन सिंह अपनी घरेलू सीट राघौगढ़ से कांग्रेस के उम्मीदवार हैं जबकि दिग्विजय के छोटे भाई पूर्व सांसद लक्ष्मण सिंह राजगढ़ जिले की चांचौड़ा विधानसभा सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार हैं।
 
इंदौर-3 विधानसभा सीट से भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के पुत्र आकाश विजयवर्गीय भाजपा के उम्मीदवार के तौर पर मैदान में हैं। उनके सामने कांग्रेस के पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री महेश जोशी के भतीजे अश्विन जोशी किला लड़ा रहे हैं। कैलाश विजयवर्गीय इस बार स्वयं चुनाव नहीं लड़ रहे हैं बल्कि मालवा क्षेत्र में सभी 66 सीटों पर भाजपा का चुनाव प्रबंधन संभाल रहे हैं।
 
इनके अलावा छतरपुर जिले की राजनगर विधानसभा सीट के परिणाम पर भी सबकी निगाहें लगी हैं। यहां से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सत्यव्रत चतुर्वेदी कांग्रेस का टिकट नहीं मिलने से अपने बेटे नितिन चतुर्वेदी को सपा के टिकट पर राजनगर सीट से लड़वा रहे हैं। चतुर्वेदी कांग्रेस से बागी होकर अपने बेटे के चुनाव प्रचार में भी सक्रिय हैं।
 
चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी लगातार प्रदेश के लोगों से वादा कर रहे हैं कि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के 10 दिन के अंदर किसानों का कर्जा माफ कर दिया जाएगा और प्रदेश में युवाओं के रोजगार के लिए विशेष ध्यान दिया जाएगा।
 
मोदी ने किसानों की बर्बादी के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि मोदी सरकार 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य पर काम कर रही है और भाजपा की प्रदेश सरकार ने 15 साल और केंद्र सरकार के 4 साल के शासन में बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार दिया गया है।
 
चौहान ने चुनाव प्रचार में कहा कि 1993 से 2003 तक कांग्रेस के मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के शासनकाल में मध्यप्रदेश बीमारु राज्य था और 2003 में भाजपा को बीमारु हालत में प्रदेश मिला था जबकि भाजपा के 15 साल में इसे बीमारु राज्य की श्रेणी से निकालकर विकसित राज्य बनाया गया है। उन्होंने मतदाताओं से भाजपा को समर्थन देने की अपील करते हुए प्रदेश को समृद्ध राज्य बनाने का दावा किया।
 
विधानसभा चुनावों के प्रचार के अंतिम समय में सत्तारूढ़ भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने के लिए पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह ने सोमवार को प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में रोड शो किया। उन्होंने राज्य में लगातार चौथी बार विधानसभा चुनाव जीतने की चुनौती से जूझ रही अपनी पार्टी के लिए मतदाताओं से समर्थन मांगा।
 
मध्यप्रदेश में विधानसभा की 230 सीटों के लिए होने वाले चुनाव के लिए कुल 2,907 उम्मीदवार चुनावी मैदान में अपना भाग्य अजमा रहे हैं। इस अहम चुनाव में विपक्षी दल कांग्रेस पिछले 15 साल से सत्तारूढ़ भाजपा को उखाड़ने के लिए प्रयास कर रही है जबकि भाजपा ने लगातार चौथी दफा प्रदेश की सत्ता में आने के लिए 'अबकी बार, 200 पार' का लक्ष्य तय किया है।
 
मध्यप्रदेश में सत्ता में आने की दावेदार मुख्य तौर पर भाजपा और कांग्रेस 2 ही दल हैं और यहां इन्हीं 2 राजनीतिक दलों के बीच राजनीतिक जंग होती है। कांग्रेस ने प्रदेश की 229 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं जबकि 1 सीट अपने सहयोगी शरद यादव के लोकतांत्रिक जनता दल के लिए छोड़ी है। भाजपा ने सभी 230 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। आम आदमी पार्टी भी पहली दफा मध्यप्रदेश में चुनावी मैदान में है और उसने अपने 208 उम्मीदवार उतारे हैं। बसपा के 227 और सपा के 51 चुनाव लड़ रहे हैं। (भाषा)

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