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भूतपूर्व होना या अभूतपूर्व बने रहना!

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to be or remain unprecedented
भूतपूर्व होना यानी आकस्मिक रूप से या पदावधि समापन से जीवन में आई बीती यादों या बातों को अपने शेष बचे जीवन का अभिन्न अंग बना लेना है। अभूतपूर्व होने या बने रहने में किसी याद या बात या पद के मिलने या निर्वाचित होने की अनिवार्यता का कोई लेना-देना ही नहीं है!

भूतपूर्व होना यानी बहुत मशक्कत से या संयोगवश हांसिल पद या पद से हासिल अधिकार दायित्व, सुख, सुविधा, सुरक्षा और लाव लश्कर या बंगले का जीवन से यकायक निकल जाने जैसा जीवन का शेष कालखंड!ALSO READ: जीवन एक उत्सव है, तो वन महोत्सव है!
 
इसे क्या कहा जाए? शायद इस विशेषण या स्थिति को एक तरह से अतीत की व्यवस्थागत रूप से हासिल की गई पदेन उपलब्धि का आजीवन वर्तमान पर हमेशा के लिए ठहर जाना ही तो माना जा सकता है! अच्छे खासे पदासीन थे अब अचानक कालक्रम में पदावसान हो गया, पद मुक्त हो गए याने भूतपूर्व हो गए। मनुष्य यदि खालिस मनुष्य रहे तो आजीवन अभूतपूर्व ही रहेगा!
 
कोई भी व्यक्ति संयोग वश या राज्य की कृपा से या अन्यथा भी किसी तरह अपने पुरुषार्थ से या परिस्थिति वश किसी पद पर निर्वाचित होकर या बिना निर्वाचित हुए भी पहुंच जाता है या पद हासिल कर लेता है तो वह अपने शेष जीवन काल में ही भूतपूर्व होने की संभावना को स्वयं ही अर्जित कर लेता है।

यदि किसी मनुष्य ने अपने जीवन काल में कोई पद स्वयं के पुरुषार्थ से या अन्यथा संयोग वश या किसी अन्य की कृपा से हासिल नहीं किया है तो ऐसा मनुष्य अपने जीवन काल में कभी भी भूतपूर्व नहीं हो सकता है। भूतपूर्व होने के लिए अपने जीवन में कोई पद हासिल करना आवश्यक है।
 
मनुष्य के अंदर अपने मूल स्वरूप में उसके जो जन्मजात नैसर्गिक गुण या विशेषता मौजूद रहती है वे उसे कभी भी अपने जीवन काल में भूतपूर्व होने का अवसर या अधिकार नहीं देती है। भूतपूर्व होना एक ऐसा विशेषण हैं जो किसी भी मनुष्य को अपने भूत काल या अतीत के गौरव का स्मरण दिलाता है।

अभूतपूर्व होने के गुण या तो मनुष्य में जन्मजात प्रतिभा के रूप में सदैव या जन्मना मौजूद रहते हैं। पर मनुष्य को अपने जीवन काल में उन गुणों को यथा सम्भव अपने अंदर अभिव्यक्त करना होता है। 
 
जैसे आप गायन या कंठ संगीत में सिद्ध हस्त है या बांसुरी वादन में महारथ हासिल कर चुके हैं तो आपको उसे सबके सामने सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करना होता है तब आपको अभूतपूर्व माना जाने लगता हैं। आपकी स्मरण शक्ति अद्भूत हैं तो आपको उस विलक्षण स्मरण शक्ति को अन्य लोगों के समक्ष व्यक्त करना होता है तभी लोग आपकी स्मरण शक्ति का लोहा मानते हैं। 
 
आप बहुत बढ़िया चित्रकार है तो आपको अपने चित्रों से लोगों के मन में यह भाव अपनी चित्रकला के माध्यम से विकसित करना होता है। आपकी साधना और समर्पण लोगों के मन में यह भाव जगाता है कि आप अद्भुत चित्रकार, गायक या किसी अन्य क्षेत्र में महारत हासिल किए हुए हैं। आपकी वाणी, अभिव्यक्ति और बोलने का लहजा आपको अभूतपूर्व वक्ता बना देता है। लोग, श्रोता या गुणी जन आपको यह विशेषण प्रदान करते हैं। 
 
आप स्वयं अपने बारे में ऐसा विशेषण नहीं लगा सकते हैं यदि आपने स्वयं अपनी विशिष्ट पहचान या कला मर्मज्ञ होने को स्वयं के मुख से अभिव्यक्त किया तो इसे आपकी कमजोरी या प्रसिद्धि पाने की क्षुद्र लालसा माना या समझा जाता है। अपने गुणों को अपने जीवन में अपनी लेखनी, चित्र कला, या वाणी से आप स्वत: व्यक्त तो कर सकते हैं पर अपना बखान स्वयं ही नहीं कर सकते हैं।
 
भूतपूर्व भी अभूतपूर्व हो सकता है पर अभूतपूर्व कभी भूतपूर्व नहीं होता हैं ,आजीवन अभूतपूर्व ही रहता हैं। कुल मिलाकर बात इतनी सी है कि मनुष्य को अपने जीवन काल में जो स्थिति या दर्जा हासिल होता है वह बदल जाये तो ऐसा बदलाव आपको एकाएक वर्तमान से इतिहास में स्थापित कर देता है। मनुष्य मूलतः मनुष्य ही हैं। मनुष्य में कोई विशेषण नहीं है। विशेषण मनुष्य को मनुष्य की तरह रहने नहीं देता। विशेषण मनुष्य की संभावना या विस्तार को सीमाबद्ध कर देता है। 
 
मनुष्य प्रकृति की अनंत संभावना वाली एक ऐसी जीवित ऊर्जा हैं जो प्रकृति को अपनी सोच और समझ से अपने चिंतन, मनन और सृजनशीलता के अधीन करने के सपने के साथ जीवन जीते रहने का सपना साकार करने हेतु प्रागैतिहासिक काल से आज तक निरंतर संघर्षरत हैं।

संघर्ष और जीवन सनातन काल से अभूतपूर्व है और रहेगें। जीवन और जीव का अनंत जीवन प्रवाह कभी खत्म न होने वाला एक ऐसा सिलसिला हैं जो प्रकृति में अभूतपूर्व रुप से गतिशील बना हुआ है या यह सिलसिला कभी भी भूतपूर्व नहीं हो सकता हैं। जीवन अभूतपूर्व है पर इस जगत का सबसे बौद्धिक मनुष्य अपने  जीवन काल में अपनी ही बनाई व्यवस्था या कालक्रम में अभूतपूर्व से एकाएक भूतपूर्व हो जाता हैं! यही जीवन की ऊर्जा का काल क्रमानुसार आनंदमयी पर अभूतपूर्व खेल है!ALSO READ: नारी शक्ति का अधिकार और लोकतांत्रिक जिम्मेदारी
 
(इस लेख में व्यक्त विचार/विश्लेषण लेखक के निजी हैं। 'वेबदुनिया' इसकी कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेती है।)
 

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