Publish Date: Tue, 12 May 2026 (17:35 IST)
Updated Date: Tue, 12 May 2026 (17:39 IST)
BJP West Bengal Victory: भाजपा के खाते में पश्चिम बंगाल की जीत आने के बाद देश की राजनीति का माहौल तेजी से बदलता दिखाई दे रहा है। यह सिर्फ एक राज्य का चुनाव परिणाम नहीं है। इसके राजनीतिक संदेश दूर तक जाएंगे। अब साफ दिखने लगा है कि भाजपा केवल अपनी पुरानी जमीन बचाने की राजनीति नहीं कर रही, बल्कि लगातार नया भूगोल जोड़ने में लगी है। दूसरी तरफ विपक्ष अभी भी अपनी बची हुई जमीन बचाने की लड़ाई लड़ रहा है।
पश्चिम बंगाल लंबे समय तक ऐसा राज्य रहा जहां भाजपा को बाहरी पार्टी माना जाता था। पहले वामपंथ और बाद में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ने वहां राजनीति को अपने तरीके से चलाया। भाजपा कई चुनाव लड़ती रही, लेकिन सत्ता तक पहुंच नहीं पाई। इसलिए बंगाल की इस जीत को भाजपा साधारण घटना की तरह नहीं देख रही। पार्टी इसे अपनी वैचारिक और राजनीतिक दोनों तरह की बड़ी उपलब्धि बताकर पेश कर रही है।
अब देश के लगभग बाइस राज्यों में भाजपा या एनडीए की सरकारें हैं। कई राज्यों में क्षेत्रीय दल जरूर अपने-अपने प्रभाव के सहारे टिके हुए हैं, लेकिन राष्ट्रीय राजनीति में भाजपा की बढ़ती ताकत साफ दिखाई दे रही है। यही वजह है कि आने वाले विधानसभा चुनावों को अब सिर्फ राज्य स्तर की लड़ाई नहीं माना जा रहा।
आने वाले वर्षों में जिन राज्यों में चुनाव होने हैं, उनमें उत्तर प्रदेश सबसे अहम होगा। दिल्ली की सत्ता का रास्ता आज भी लखनऊ से होकर गुजरता है। विपक्ष चाहे जितनी बैठकें कर ले, लेकिन फिलहाल ऐसा माहौल नहीं दिखता कि भाजपा को सीधी चुनौती मिल रही हो। बिहार और बंगाल के चुनावों के बाद विपक्षी गठबंधन को लेकर जो उत्साह दिखा था, वह अब ठंडा पड़ चुका है।
भाजपा की ताकत सिर्फ उसका प्रचार नहीं है। उसकी असली ताकत यह है कि पार्टी और उससे जुड़े संगठन लगातार मैदान में सक्रिय रहते हैं। चुनाव खत्म होने के बाद भी भाजपा अगले चुनाव की तैयारी में लग जाती है। बूथ स्तर तक सक्रिय कार्यकर्ता, योजनाओं का सीधा लाभ लेने वाला वर्ग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता भाजपा को बढ़त दिलाती है। यही वजह है कि कई जगह सरकार के खिलाफ नाराजगी होने के बाद भी भाजपा मुकाबले में कमजोर नहीं पड़ती।
बंगाल की जीत भाजपा को सिर्फ एक और राज्य नहीं देगी, बल्कि पार्टी के भीतर यह विश्वास भी मजबूत करेगी कि अब वह देश के किसी भी हिस्से में सत्ता तक पहुँच सकती है। यही कारण है कि आने वाले समय में भाजपा और ज्यादा आक्रामक राजनीतिक विस्तार की रणनीति पर चल सकती है। दक्षिण भारत से लेकर पंजाब तक, पार्टी उन राज्यों पर ध्यान बढ़ाएगी जहाँ अभी उसकी पकड़ पूरी तरह मजबूत नहीं है।
इसके साथ-साथ पंजाब की राजनीति पर भी नजर रहेगी। पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है, लेकिन हाल के घटनाक्रमों ने वहाँ नई चर्चाएं शुरू कर दी हैं। राज्यसभा सांसदों के भाजपा के करीब जाने की खबरों के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या आने वाले समय में पंजाब सरकार पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि केवल राज्यसभा सांसदों के जाने से सरकार नहीं गिरती, क्योंकि सरकार विधानसभा के बहुमत से चलती है। लेकिन राजनीति में संकेत हमेशा सीधे नहीं होते। कई बार छोटे घटनाक्रम आगे चलकर बड़े बदलाव की भूमिका बन जाते हैं। भाजपा यदि पंजाब में अपना संगठन बढ़ाने और विपक्षी दलों में सेंध लगाने की रणनीति पर चलती है, तो आने वाले समय में वहां की राजनीति और दिलचस्प हो सकती है।
हालांकि राजनीति में कुछ भी स्थायी नहीं होता। जनता कब किसे ऊपर उठाए और किसे नीचे ले आए, इसका अंदाजा बड़े-बड़े दल नहीं लगा पाते। लंबे समय तक सत्ता में रहने वाली हर पार्टी को एक समय बाद नाराजगी, थकान और स्थानीय असंतोष का सामना करना पड़ता है। भाजपा के सामने भी आगे यही चुनौती होगी।
लेकिन फिलहाल तस्वीर साफ है। भाजपा आक्रामक विस्तार की राजनीति कर रही है और विपक्ष अभी भी अपने बिखरे हुए कुनबे को संभालने में लगा है। अब सवाल यह नहीं रह गया कि भाजपा कितने राज्य और जीतेगी। बड़ा सवाल यह है कि उसे रोकने की ताकत कौन जुटाएगा। (यह लेखक के अपने विचार हैं, वेबदुनिया का इनसे सहमत होना जरूरी नहीं है)