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मंगल और शुक्र : आकाश में नायक Mars और नायिका Venus का मिलन

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स्वरांगी साने

आसमान में एक अद्भुत घटना होने वाली है। दो सितारों का मिलन होने वाला है। ये सितारे हैं मंगल और शुक्र। दिन में यदि तारे देख पाएँ तो यह घटना 13 जुलाई को होने वाली है। 
 
नायक और नायिका 
मंगल और शुक्र को अंग्रेज़ी में क्रमशः मार्स और वीनस कहा जाता है। मार्स सितारों में पौरुष का प्रतीक है और वीनस को सौंदर्य की देवी कहते हैं। आकाश में इस नायक और नायिका का मिलन होने वाला है। भारतीय संदर्भों में इसे उमा-शंकर योग कहते हैं। वस्तुतः यह एक खगोलीय घटना है कि शुक्र और मंगल की युति होने वाली है। लेकिन ब्रह्मांड में होने वाली हर घटना का परोक्ष और अपरोक्ष रूप से मानव जीवन पर भी प्रभाव पड़ता है। तो जब सुदूर आसमान में ये दोनों एक-दूसरे के आमने-सामने होंगे तब बिल्कुल आपके मन में भी आपको एक तरह का संतुलन महसूस होगा। आपके भीतर का पुरुष तत्व और स्त्री तत्व संतुलित हो जाएँगे। 
 
हम सभी मनुष्य 
आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि हम स्त्री और पुरुष का भेद दैहिक नज़रिए से देखते हैं लेकिन ईश्वरीय सत्ता में हम सभी मनुष्य हैं और हमारे भीतर की स्त्री और पुरुष की ऊर्जा से हम संचालित होते हैं। इसलिए कई बार कोई महिला भी बहुत मर्दानी लग सकती है और कोई पुरुष भी शर्मीला, संकोची हो सकता है क्योंकि उसके भीतर का वह तत्व प्रबल होता है। 
 
दिल की धरती पर 
तो हम बात कर रहे थे 13 जुलाई की। सिक्के के दो पहलू होते हैं वैसे ही स्त्री और पुरुष एक ही के दो आयाम हैं। यदि किसी सिक्के में चित और पट न हुआ तो उसे सिक्का नहीं कह सकते, दोनों के एकाकार होने से पूरा सिक्का बनता है। ऐसे ही स्त्री और पुरुष तत्व का संतुलन दिखेगा। दो शक्तियाँ आपस में जब टकराएँगी, तो हो सकता है आपके अनाहत चक्र में तूफ़ान-सा आ जाए। कुंडलिनी में सात चक्रों की बात होती है उसमें से अनाहत चक्र आपके हृदय में होता है। इसे अंग्रेजी में हार्ट चक्रा कहते हैं। आपके दिल की धरती पर भूकंप की अनुभूति आप कर सकते हैं। बाहरी दुनिया में जहाँ-जहाँ स्त्री-पुरुष की भागीदारी है, वहाँ पिछले तीन सालों में कोई समन्वय नहीं रहा था तो अब संवाद के अस्त का अस्त या अस्त का उदय कह लीजिए, होगा, मतलब बंद पड़ा संवाद फिर शुरू होगा। चाहे वह पति-पत्नी का रिश्ता हो, प्रेमी-प्रेमिका का, भाई-बहन का, दोस्त का, पिता-पुत्री, का या आप कोई भी ऐसा रिश्ता ले लीजिए एकदम बातचीत का दौर शुरू हो सकता है। आकाशीय मंडल में मेल-मिलाप का दौर चलने वाला है।
 
आकाशीय घटनाक्रम 
ज्योतिष शास्त्र के आधार पर देखें तो इस वक्त वैसे भी मंगल ग्रह का गहरा प्रभाव धरती पर देखा जा सकता है। पौरुषीय ऊर्जा और ताकत को अधिक महसूस किया जा सकता है। पूरे विश्व पर इस पौरुषेय का प्रभाव किन्हीं चुनौतियों के रूप में भी आ सकता है और सात्ंवना देता हुआ भी। इस समय को बहुत रोमांचकारी समय कह सकते हैं। आकाशीय घटनाक्रम का आप बेहतर लाभ उठा सकते हैं। चुनौतियों को अवसरों में बदल सकते हैं। कठिनाइयों को उपहार की तरह ले सकते हैं। कैसे? अपने मन के द्वार भक्ति और समर्पण के लिए खोल दीजिए। इस दरवाज़े के दोनों पलड़ों को समान रूप से हमेशा के लिए खुला रखिए मतलब संतुलन में आ जाइए, फिर देखिए क्या अद्भुत संयोग आपके जीवन में आता है!

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