Hanuman Chalisa

Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia

सफर : एक खत का

Advertiesment
हमें फॉलो करें The journey of a letter
webdunia

गिरीश पांडेय

बात उस दौर की है जब खत लिखे जाते थे। तब खत लिखना अपने आप में एक मुकम्मल सफर होता था—दिमाग से शुरू होकर दिल तक पहुंचने वाला सफर। और हर सफर की तरह इसकी भी तैयारी होती थी—कलम, स्याही और कागज़। पोस्टकार्ड हो, अंतर्देशीय हो या लिफाफे में रखा पत्र—उसे भेजने के लिए पोस्ट ऑफिस या आस-पास की पत्र पेटिका तक जाना पड़ता था।
 
पत्र लिखना भी एक कला थी : यह तो हुई पत्र के सफर की बात, अब बात करते हैं पत्र लिखने की। तब पत्र लिखना भी एक कला था—गागर में सागर भरने जैसा। एक छोटे से पोस्टकार्ड या कुछ पन्नों में लेखक अपनी सारी भावनाएं, हाल-चाल और सूचनाएं समेट देता था। यह आसान काम नहीं था।
 
जब स्याही, कलम, दिल और दिमाग एक हो जाते थे, तब कोरे कागज़ पर जज़्बात उकेरे जाते थे—कभी अपने हाथों से, तो कभी किसी से लिखवाकर। ये खत वर्षों तक भावनाओं को सहेजकर रखते थे। जब भी पढ़े जाते, रिश्ते फिर से ताज़ा हो जाते, यादों के गलियारे खुल जाते और चिट्ठियों से रिश्तों की महक आने लगती थी।
 
चंद शब्दों का असीम सुकून : चिट्ठियों के कुछ शब्द भी असीम सुकून दे जाते थे—“यहां सब कुशल है, आपकी कुशलता की ईश्वर से प्रार्थना है।” ऐसे वाक्य दवा भी होते थे और दुआ भी।
 
शब्दों में भावनाएं उड़ेल देने से मन हल्का हो जाता था, गिले-शिकवे दूर हो जाते थे। लिखते या पढ़ते समय यदि आंखें नम हो जाएं, तो दिल आईने की तरह साफ हो जाता था। सामान्य दिनों में भी आत्मीय संबोधन सुकून देते थे और दुख के समय वही शब्द मन के बांध तोड़ देते थे।
 
रिश्तों का पैमाना भी थे खत : खत रिश्तों की गहराई भी बताते थे। कभी पुराने खतों को पलटकर देखिए—जिनके खत आपके पास हैं और जिनके नहीं, उनसे अपने रिश्तों पर खुद ही रोशनी पड़ जाएगी।
 
भावनाओं की अनंत यात्रा : पत्र का भौतिक सफर रेल, हवाई जहाज या मोटर से होकर अंत में साइकिल पर आते पोस्टमास्टर के साथ आपके दरवाज़े पर खत्म होता था। पर असली सफर तब शुरू होता था—हर पंक्ति के साथ आप उस जगह, उस व्यक्ति और उस परिवेश में पहुंच जाते थे, जहां से खत लिखा गया था।
 
पुराने पत्रों को पढ़ते ही गांव, शहर, पुराने ठिकाने, मित्र, रिश्तेदार, भाई-बहन—सब याद आ जाते हैं। यहां तक कि वे अपने भी, जो अब इस दुनिया में नहीं हैं, पर जिनके खत आज भी उनकी मौजूदगी का एहसास कराते हैं। हर पत्र आत्मीयता और जज़्बात का खजाना होता था—कागज़ के ये मामूली से टुकड़े रिश्तों को बेमिसाल बना देते थे।
 
आज भले ही जमाना पेपरलेस हो गया हो और स्मार्टफोन की एक उंगली से यादें डिलीट हो जाती हों, लेकिन पत्रों की प्रासंगिकता खत्म नहीं हुई है। अगर आपके पास पुराने खतों का संग्रह है, तो उन्हें पढ़िए—यादें फिर से ताज़ा हो जाएंगी और रिश्तों की खुशबू फिर से महक उठेगी। सब ताजा हो जाएगा। सब कुछ मय परिवेश याद आ जाएगा।

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi

अगला लेख

Shivaji Jayanti Massages: छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती पर भेजें ये 10 प्रेरणादायक शुभकामना संदेश