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‘बचपन बचाओ आंदोलन’ ने बाल विवाह की पीड़िता को बचाया

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शुक्रवार, 16 सितम्बर 2022 (18:03 IST)
जयपुर, नोबेल शांति पुरस्‍कार से सम्‍मानित कैलाश सत्‍यार्थी द्वारा स्‍थापित ‘बचपन बचाओ आंदोलन’ के कार्यकर्ताओं ने जयपुर से एक बाल विवाह की नाबालिग पीड़िता को बचाया है।  14 साल की पीड़िता का मेडिकल करवाने के बाद उसे सरकारी आश्रय गृह में भेजा गया है।

पुलिस को दिए बयान में धौलपुर जिले के एक गांव से आने वाली इस पीड़िता ने कहा है कि वह कुछ साल से अपनी मां और उसके ‘लिव इन पार्टनर’ के साथ रहती थी। कुछ समय बाद से ही मां का पार्टनर उसे प्रताड़ित करने लगा और बोझ बताने लगा। ऐसा काफी समय तक चला। फिर पिछले साल दिसंबर में उसने धौलपुर के ही एक दूसरे गांव के 40 साल के व्‍यक्ति को शादी के लिए तीन लाख रुपए में बेच दिया।

शादी के बाद से ही नाबालिग पीड़िता का पति भी उसे प्रताड़ित करने लगा। पीड़िता ने पुलिस को बताया, ‘मेरा पति मुझे घर के सारे काम करने को कहता था और बार-बार जबरन शारीरिक संबंध भी बनाता था।’ पीड़िता ने कहा कि विरोध जताने पर बुरी तरह से पिटाई की जाती थी। नाबालिग ने कहा, ‘उसका पति सबके सामने उसकी बेइज्‍जती करता था और बच्‍चा न पैदा कर पाने को लेकर ताने मारता था।’ पीड़िता ने कहा कि वह इस नारकीय जीवन से छुटकारा पाना चाहती थी और कई बार भागने की नाकाम कोशिश के बाद इस हफ्ते उसे कामयाबी मिली।

अपने पति के घर से भागने के बाद पीड़िता किसी तरह जयपुर आई। यहां बचपन बचाओ आंदोलन (बीबीए) के कार्यकर्ताओं को खबर मिली कि एक लड़की जवाहर सर्किल पर बदहवास हालत में है। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने उसकी मदद की और एफआईआर लिखवाने के लिए जवाहर नगर पुलिस स्‍टेशन ले आए।

फिलहाल पुलिस पॉक्‍सो व आईपीसी की धारा 376 के तहत जीरो एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई कर रही है। पुलिस का मानना है कि क्‍योंकि लड़की की खरीद-फरोख्‍त हुई और उसे एक स्‍थान से दूसरे स्‍थान ले जाया गया है। ऐसे में जांच के बाद धाराएं बढ़ सकती हैं।

बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराई पर चिंता जताते हुए बीबीए निदेशक मनीष शर्मा ने कहा, ‘यह घटना बताती है कि बाल विवाह की स्थिति कितनी गंभीर है और पीड़िता को जिंदगी की शुरुआत में ही कितनी तकलीफें सहनी पड़ती हैं। यह उचित समय है जब बाल विवाह को बच्‍चों के प्रति होने वाला सबसे बड़े अपराध की तरह देखा जाना चाहिए न कि सामाजिक परंपरा के रूप में।’

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