दिग्विजय सिंह का बयान, हिन्दुओं का कट्टरपंथीकरण उतना ही खतरनाक, जितना मुस्लिमों का

बुधवार, 2 अक्टूबर 2019 (20:00 IST)
इंदौर। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) ने एक बार फिर विवादित बयान दिया है। गांधी जयंती पर इंदौर के आनंद मोहन माथुर सभागृह में आयोजित कार्यक्रम में दिग्विजय सिंह ने कट्टर हिन्दुत्व को खतरनाक बताया है। सिंह ने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने इस्लामोफोबिया और कट्टरता का जिक्र किया था। हिन्दुओं की भी कट्टरता मुस्लिमों की कट्टरता की तरह ही खतरनाक है। भारत में अगर बहुसंख्यक जनसंख्या का सांप्रदायीकरण होता है तो देश को इससे बचाना मुश्किल होगा। दिग्विजय सिंह की भाषण में जुबान फिसल गई और उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान (PM Imran Khan) को ‘प्रधानमंत्रीजी’ बोल दिया। वो संयुक्त राष्ट्र संघ की आमसभा में दिए गए इमरान खान के भाषण का जिक्र करते हुए ऐसा बोल गए।
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इमरान के इस्लामोबिया का दिया हवाला : दिग्विजय ने पाकिस्तान में बहुसंख्यकों के अतिवाद से हालात बिगड़ने का हवाला देते हुए कहा कि मुस्लिमों के चरमपंथीकरण की तरह हिन्दुओं को भी चरमपंथी विचारधारा की ओर धकेलना खतरनाक है।
 
दिग्विजय सिंह ने कहा कि आपने (संयुक्त राष्ट्र महासभा के 74वें सत्र में) पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान का हालिया भाषण सुना होगा जिसमें वे इस्लामोफोबिया और इस्लामी चरमपंथ की बात कर रहे थे।
 
इसके विरोध में 'रेडिकलाइजेशन ऑफ द हिंदूज' (हिंदुओं का चरमपंथीकरण) की बात की जा रही है और 'रेडिकलाइजेशन ऑफ द हिंदूज' भी उतना ही खतरनाक है जितना खतरनाक 'रेडिकलाइजेशन ऑफ द मुस्लिम्स' (मुस्लिमों का चरमपंथीकरण) है। दिग्विजय ने कहा कि पाकिस्तान में बहुसंख्यकों का सांप्रदायीकरण हुआ है और वहां के हालात आप देख ही रहे हैं। इसी तरह अगर भारत में बहुसंख्यकों का सांप्रदायीकरण होगा, तो इसके दुष्परिणामों से हमारे देश को बचाना आसान नहीं होगा।
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गांधीजी होते तो कर देते यात्रा की घोषणा : जम्मू-कश्मीर को लेकर नरेन्द्र मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने बुधवार को कहा कि अगर महात्मा गांधी जीवित होते तो राज्य से विशेष दर्जा वापस लिए जाने के दिन ही दिल्ली से श्रीनगर तक यात्रा की घोषणा कर देते।
 
दिग्विजय ने महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर यहां आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि जिस दिन संसद में (जम्मू-कश्मीर से जुड़ा) अनुच्छेद 370 हटाया गया, उस दिन अगर महात्मा गांधी जिंदा होते, तो वे उसी दिन दिल्ली के लाल किले से श्रीनगर के लाल चौक की अपनी यात्रा की घोषणा कर देते।
 
पीएम मोदी पर साधा निशाना : सिंह ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी हमेशा कहते थे कि कश्मीर समस्या का हल जम्हूरियत (लोकतंत्र), कश्मीरियत और इंसानियत से मिल सकता है, लेकिन मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने इन तीनों सिद्धांतों को विदा देकर अटलजी की इस विचारधारा को समाप्त कर दिया।
 
बीजेपी की पदयात्रा पर उठाए सवाल : महात्मा गांधी की 150वीं जयंती से भाजपा की देशभर में शुरू हुई 'गांधी संकल्प पदयात्रा' के औचित्य पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि मैं तो इस बात को भी अजीब मानता हूं कि जिस विचारधारा ने महात्मा गांधी की हत्या की, उसी विचारधारा के लोग आज अपने कार्यकर्ताओं को संदेश दे रहे हैं कि वे एक महीने तक हर ग्राम पंचायत तक पदयात्रा करें। उन्होंने तंज किया कि मैं जानना चाहता हूं कि इस पदयात्रा के दौरान जनता के सामने गांधी दर्शन रखा जाएगा अथवा गोड़से दर्शन या गोलवलकर दर्शन को प्रदर्शित किया जाएगा। 
 
मोदी के मन में गांधीजी का सम्मान नहीं : दिग्विजय ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 'फादर ऑफ इंडिया' (भारत के पिता) कहे जाने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि अगर मोदी के मन में महात्मा गांधी के लिए थोड़ी भी इज्जत होती, तो वे तत्काल कह देते कि वे ट्रंप की दी गई इस उपाधि (फादर ऑफ इंडिया) को स्वीकार नहीं करते।
 
उन्होंने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री को कहना चाहिए था कि महात्मा गांधी ही हमारे देश के राष्ट्रपिता रहेंगे, लेकिन मुझे दु:ख है कि उन्होंने ‘फादर ऑफ इंडिया’ की उपाधि को लेकर ट्रंप की बात का विरोध नहीं किया। (भाषा) (Photo courtesy : Twitter)

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