हिन्दी भाषियों के खिलाफ हिंसा के बाद हजारों प्रवासी श्रमिकों ने गुजरात छोड़ा

मंगलवार, 9 अक्टूबर 2018 (21:54 IST)
अहमदाबाद। गुजरात में बलात्कार की एक कथित घटना के बाद हिन्दी भाषियों के खिलाफ हिंसा के बाद हजारों प्रवासियों ने राज्य छोड़ दिया है। हालांकि, उद्योग प्रतिनिधिमंडलों ने मंगलवार को कहा कि कारखाने में तीन दिन के अवरोध के बाद सामान्य स्थिति बहाल हो गई है। 
 
 
प्रतिनिधिमंडलों ने कहा कि बिहार के एक व्यक्ति द्वारा एक बच्ची से कथित बलात्कार के बाद फैली हिंसा के कारण उद्योगों में कामकाज कुछ दिन के लिए प्रभावित हुआ था, लेकिन मंगलवार से सामान्य स्थिति बहाल होने लगी और उत्तरी गुजरात की इकाइयों में काम फिर से शुरू हो गया। 
 
अहमदाबाद के निकट स्थित साणंद में इस घटना के बाद बहुत अधिक प्रभाव देखने को मिला था और अधिकतर कारखाने बंद पड़ गए थे। नगर में 250 बड़ी और छोटी औद्योगिक इकाइयां हैं।
 
साणंद के एक औद्योगिक प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि मंगलवार से श्रमिक कारखाने में आने लगे लेकिन इलाके के 15,000 कर्मचारियों में से 4 हजार कर्मी पहले ही अपने घरेलू राज्यों को लौट चुके हैं।
 
गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (जीसीसीआई) के अध्यक्ष जैमिन वासा ने कहा कि सामान्य स्थिति तो बहाल हो रही है लेकिन साथ ही कर्मियों, खासकर बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगों, में भय का माहौल है। वासा ने कहा, 'करीब 50 प्रतिशत प्रवासी श्रमिकों ने गुजरात के औद्योगिक इलाकों में आना बंद कर दिया है।' 
देदियासन औद्योगिक क्षेत्र के अध्यक्ष जी के पटेल के मुताबिक 1,000 प्रवासी श्रमिक अपने मूल राज्यों को लौट चुके हैं। ऑल इंडिया टेक्सटाइल्स ट्रेडर्स एसोसिशन के उपाध्यक्ष ताराचंद कसात ने कहा कि सूरत में उत्तर भारत के 7-8 लाख श्रमिक हैं। उन्होंने दावा किया कि पिछले एक सप्ताह में 20,000 हिंदी भाषियों ने राज्य छोड़ दिया है।

साबरकांठा जिले के हिम्मतनगर के निकट के एक गांव में 14 महीने की एक बच्ची से कथित तौर पर बलात्कार किया गया था। बिहार के रहने वाले आरोपी को उसी दिन गिरफ्तार कर लिया गया था।

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