Publish Date: Wed, 16 Sep 2020 (19:40 IST)
Updated Date: Wed, 16 Sep 2020 (19:53 IST)
जम्मू। लद्दाख (Ladakh) के मोर्चे की एक चिंताजनक बात यह है कि भारतीय सेना (Indian Army) को एलएसी (LAC) पर इन सर्दियों में टिके रहने की नहीं, बल्कि चीन (China) से जंग की तैयारी करनी पड़ रही है। ऐसा इसलिए क्योंकि चीनी सेना (Chinese Army) और चीनी मीडिया (Chinese media) की धमकियों के बाद यह संकेत मिलने आरंभ हुए हैं कि दोनों मुल्कों की सेनाओं के बीच एलएसी के विवादित क्षेत्रों (Disputed areas) में खूनी झड़पें हो सकती हैं।
रक्षा सूत्रों के बकौल, पैंगोंग झील, देपसांग, स्पंगुर झील, रेजांगला आदि के एलएसी के इलाकों में भारतीय सेना को युद्ध वाली स्थिति में रहने को कहा गया है। उसे अपने सैनिक साजोसामान को कुछ ही मिनटों के ऑर्डर पर जवाबी हमला करने की स्थिति में भी तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं।
अधिकारियों ने बताया कि लद्दाख में एलएसी पर जो इंतजामात किए जा रहे हैं, उनमें भयानक सर्दी से बचने के उपायों के अतिरिक्त ठीक सियाचिन हिमखंड की तरह युद्ध की स्थिति में बचाव और हमले करने की रणनीति अपनाने के लिए जरूरी इंतजाम भी शामिल हैं। जानकारी के लिए पिछले 36 सालों से दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धस्थल पर सियाचिन में शून्य से 40 डिग्री नीचे के तापमान में भी युद्ध जारी है।
अधिकारी कहते थे कि अगले महीने से लद्दाख को मिलाने वाले राजमार्ग बर्फबारी के कारण बंद होने आरंभ हो जाएंगे और ऐसे में सारा बोझ हवाई मार्ग पर आ जाएगा। एलएसी पर हालात कितने गंभीर हैं, इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि पिछले करीब तीन महीनों से सर्दियों में टिके रहने की नहीं बल्कि चीन के साथ युद्ध होने की संभावना के मुताबिक ही तैयारियां की जा रही हैं।
बर्फ में टिके रहने वाले टेंटों और पहने जाने वाले कपड़ों से अधिक जोर भयानक सर्दी में गर्मी का अहसास देने वाले बम प्रूफ बंकरों को बनाने पर दिया जा रहा है। इन बंकरों को जमीन के नीचे बनाया जा रहा है ताकि दुश्मन के हमलों से बचा जा सके।
खासकर पिल बाक्स और अन्य चौकियों को दुश्मन की नजर से बचाने का प्रयास हो रहा है। दरअसल, एलएसी पर कोई पेड़ पौधे न होने के कारण मोर्चाबंदी में बहुत ज्यादा कठिनाई पेश आ रही है।
आप पूर्ण स्वस्थ हों और दोगुनी ऊर्जा के साथ काम पर लौटें।
About Writer
सुरेश एस डुग्गर
सुरेश डुग्गर वेबदुनिया के लिए जम्मू कश्मीर से समाचार संकलन के लिए अधिकृत हैं। वे तीन दशक से ज्यादा समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं।....
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