Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia
Advertiesment

सरकार के फरमान से जम्मू-कश्मीर में अफरा-तफरी, नेता ढूंढ रहे हैं 'कुछ' का जवाब

webdunia

सुरेश डुग्गर

शनिवार, 3 अगस्त 2019 (19:34 IST)
जम्मू। सरकारी फरमान के बाद कश्मीर का त्याग करने वालों में अभी भी अफरा-तफरी का माहौल है। इस दौड़ में अमरनाथ श्रद्धालुओं और पर्यटकों के साथ ही अब बाहरी राज्यों के छात्र तथा प्रवासी श्रमिक भी शामिल हो गए हैं, जो जल्द से जल्द कश्मीर को छोड़ देना चाहते हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो उन्हें बाहर निकालने का सिलसिला सरकारी तौर पर अंजाम दिया जा रहा है। जम्मू-कश्मीर के नेताओं ने राज्यपाल से मुलाकाता की। राज्यपाल सत्यपाल मलिक से मुलाकात के बाद उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर पर उन्हें सही जवाब नहीं मिल पा रहा है और उन्हें राज्य के हालात के बारे में सच नहीं मालूम हो पा रहा है। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि अफसर बताते हैं कि 'कुछ हो रहा है', लेकिन जब इस 'कुछ' के बारे में विस्तार से पूछा जाता है तो वे जवाब नहीं दे पाते हैं।
 
शुक्रवार को घाटी में जारी की गई एडवाइजरी के बाद से ही अमरनाथ यात्रियों, पर्यटकों और कश्मीर में पढ़ रहे बाहरी छात्र-छात्राओं को यहां से रवाना करने का सिलसिला जारी है। शनिवार तड़के एनआईटी श्रीनगर से करीब 800 छात्र-छात्राओं को बस के जरिए श्रीनगर से जम्मू भेजा गया जबकि अमरनाथ की यात्रा में भाग लेने वाले श्रद्धालुओं को घाटी से वापस जाने की सलाह देने के बाद श्रद्धालुओं ने अपने घरों को वापस जाना शुरू कर दिया है।
 
यही नहीं, लंगर आयोजक व सेवक भी अपने लंगर समेटकर वापस जा रहे हैं। कई श्रद्धालु व लंगर सेवक आज शनिवार को जम्मू पहुंच गए। ये श्रद्धालु व लंगर सेवक समय से पहले यात्रा से लौटने के कारण मायूस भी नजर आए। सभी श्रद्धालुओं को 1 दिन पहले ही गृह विभाग ने घाटी छोड़कर वापस घरों को लौटने के लिए कहा था।
 
इसके बाद आनन-फानन में बालटाल व पहलगाम में लगीं दुकानें, श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए लगाए गए टेंट व लंगर सभी ने अपना सामान समेटना शुरू कर दिया है। जम्मू पहुंचे लंगर सेवक ने बताया कि 2 दिन पहले से ही कुछ स्थानीय दुकानदारों ने अपनी दुकानों को बंद कर दिया था। उनसे भी लंगर बंद करने के लिए कहा गया। उन्होंने भी ट्रक बुलवाए और अपना सामान इनमें लादकर वे यहां आ गए हैं।
 
उन्होंने बताया कि वे पूरे डेढ़ महीने का सामान लेकर लंगर लगाने के लिए गए हुए थे लेकिन बीच में ही वापस आने के कारण वे मायूस हैं। उन्हें लग रहा है कि इस बार उनकी सेवा व्यर्थ हो गई और उन्हें पता ही नहीं चला कि उन्हें वापस क्यों भेज दिया गया?
 
वहीं बिना दर्शन के ही वापस लौटे गुजरात के बिट्ठल भाई का भी यही दर्द था। उनका कहना था कि वे अभी बालटाल ही पहुंचे थे कि उन्हें वहां से वापस लौटने के लिए कह दिया गया। उनके लिए यह सबसे दुखद था कि भोले के चरणों में पहुंचकर भी वे उनके दर्शन नहीं कर पाए। वे गाड़ी लेकर बालटाल से ही वापस लौट आए। इस दौरान श्रीनगर में काफी जाम लगा हुआ था और पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लगी हुई थीं। बड़ी मुश्किल से वे जम्मू पहुंचे हैं। अब यहां से वे वापस गुजरात लौट जाएंगे।
 
यात्रा के आधार शिविर भगवती नगर को भी प्रशासन ने खाली करवाना शुरू कर दिया है। किसी को भी वहां पर अब ठहरने नहीं दिया जा रहा है। इससे वहां ठहरे श्रद्धालुओं में भी रोष है। श्रद्धालुओं का कहना है कि उनके पास इतने रुपए नहीं हैं कि वे होटलों में रुक सकें और आनन-फानन में घरों में भी लौट नहीं सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन उन्हें यहां पर 10 मिनट भी रुकने नहीं दे रहा है।
 
गवर्नर बोले- अफवाहों पर न दें ध्यान : राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने ठंडा करने का प्रयास किया है। उन्होंने कश्मीरी सियासी दलों को सलाह दी कि वे अफवाहों में विश्वास न करें और शांति बनाए रखें। शुक्रवार देर रात कश्मीरी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधिमंडल के साथ मुलाकात के दौरान राज्यपाल उन्हें आश्वस्त किया।
 
प्रतिनिधमंडल में पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती, शाह फैजल, सज्जाद लोन, इमरान अंसारी शामिल थे। इन नेताओं ने राज्यपाल से देर रात मुलाकात के लिए समय मांगा। राज्यपाल ने तुरंत उन्हें समय दे दिया। प्रतिनिधिमंडल ने अमरनाथ यात्रियों पर जारी एडवाइजरी का हवाला देते हुए कहा कि इससे कश्मीर के लोगों में असमंजस की स्थिति बनी है।
 
नहीं मिला 'कुछ' का जवाब : पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला शनिवार को सवालों की पोटली लेकर राज्यपाल सत्यपाल मलिक से मिलने गए थे, लेकिन संतोषजनक उत्तरों के बिना ही वे वापस लौट आए। शनिवार को जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने श्रीनगर में राज्यपाल सत्यपाल मलिक से मुलाकात की, वहीं राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा है कि जो सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं उनको बाकी मुद्दों से मत मिलाओ, दोनों में कोई तालमेल नहीं है इसलिए डरने करने की कोई जरूरत नहीं है।
 
राज्यपाल सत्यपाल मलिक से मुलाकात के बाद उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर पर उन्हें सही जवाब नहीं मिल पा रहा है और उन्हें राज्य के हालात के बारे में सच नहीं मालूम हो पा रहा है। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि अफसर बताते हैं कि 'कुछ हो रहा है', लेकिन जब इस 'कुछ' के बारे में विस्तार से पूछा जाता है तो वे जवाब नहीं दे पाते हैं। अब्दुल्ला ने कहा कि उन्होंने राज्यपाल से पूछा कि 'आखिरकार जम्मू-कश्मीर में हो क्या रहा है?' अब्दुल्ला के मुताबिक उन्होंने राज्यपाल से इस बाबत एक बयान जारी करने की अपील की है।
 
उमर ने कहा कि जब उन्होंने राज्यपाल से अमरनाथ यात्रा बीच में रोके जाने की बात पूछी तो उन्होंने सुरक्षा का हवाला दिया। पूर्व मुख्यमंत्री उमर ने इससे पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से भी मुलाकात की थी और पीएम मोदी ने ऐसे कोई संकेत नहीं दिए कि जम्मू-कश्मीर में हालात बिगड़े हुए हैं।

उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले आर्टिकल 35ए को बनाए रखने के लिए वे हरसंभव कोशिश करेंगे। साथ ही उमर ने मांग की कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को सोमवार को संसद में जम्मू-कश्मीर के वर्तमान हालात पर जवाब देना चाहिए।

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi

अगला लेख

राज्यपाल मलिक बोले- आज चिंता की बात नहीं, कल के बारे में मैं भी नहीं जानता