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पाकिस्तान ने इस साल 942 बार तोड़ा संघर्षविराम, 15 सैन्यकर्मी शहीद

Webdunia
सोमवार, 30 जुलाई 2018 (18:22 IST)
नई दिल्ली। पाकिस्तान ने नियंत्रण रेखा पर इस साल अब तक 942 बार संघर्षविराम समझौते का उल्लंघन किया और इस दौरान 15 सैन्यकर्मी शहीद हुए। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर भी इस साल पाकिस्तान की ओर से अब तक 490 बार बेवजह फायरिंग की गई जिनमें सीमा सुरक्षा बल के 12 जवान तथा अधिकारी शहीद हुए।
 
 
रक्षा राज्यमंत्री डॉ. सुभाष भामरे ने सोमवार को राज्यसभा में एक लिखित जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस वर्ष 23 जुलाई तक नियंत्रण रेखा पर संघर्षविराम उल्लंघन की 942 घटनाएं हुईं जिनमें 15 सैन्यकर्मी शहीद हुए। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर भी जून तक पाकिस्तान की ओर से 490 बार बेवजह फायरिंग को अंजाम दिया गया जिनमें बीएसएफ के 12 जवान तथा अधिकारी शहीद हुए।
 
उन्होंने बताया कि नियंत्रण रेखा पर संघर्षविराम उल्लंघन तथा अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तान की बेवजह फायरिंग में इस साल अब तक 28 नागरिकों की मौत हुई है। रक्षा राज्यमंत्री ने बताया कि नियंत्रण रेखा पर 2017 में 860, 2016 में 228 और 2015 में 152 बार संघर्षविराम उल्लंघन की घटनाएं हुईं। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर भी पाकिस्तान ने वर्ष 2017 में 111, 2016 में 221 और 2015 में 253 बार बेवजह फायरिंग की।
 
उन्होंने कहा कि नियंत्रण रेखा पर संघर्षविराम उल्लंघन की घटनाओं में वर्ष 2017 में 15, 2016 में 8 और 2015 में 6 सैन्यकर्मी शहीद हुए। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर भी पाकिस्तान की बेवजह फायरिंग में वर्ष 2017 में 4, 2016 में 5 और 2015 में 4 बीएसएफ जवान तथा अधिकारी शहीद हुए। पाकिस्तान से लगती सीमा पर संघर्षविराम उल्लंघन तथा बेवजह फायरिंग की घटनाओं में वर्ष 2017 में 12, 2016 में 13 और 2015 में 16 नागरिक मारे गए।
 
आतंकी हमलों में 3 साल में 154 सैन्यकर्मी शहीद, 234 घायल : जम्मू-कश्मीर में पिछले 3 सालों में आतंकवादियों से लोहा लेते हुए 154 सैन्यकर्मी शहीद हुए हैं और 234 घायल हुए हैं।
 
रक्षा राज्यमंत्री डॉ. सुभाष भामरे ने सोमवार को राज्यसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि 2015 से 2017 तक आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में 154 सैन्यकर्मी शहीद हुए जिनमें से 13 अधिकारी, 7 जूनियर कमीशन अधिकारी और 134 जवान शामिल हैं। विभिन्न मुठभेड़ों में 234 सैन्यकर्मी घायल हुए जिनमें 30 अधिकारी, 12 जूनियर कमीशन अधिकारी और 192 जवान हैं।
 
डॉ. भामरे ने बताया कि वर्ष 2017 में 39, 2016 में 65 और 2015 में 50 सैन्यकर्मी शहीद हुए। वर्ष 2017 में 100, 2016 में 85 और 2015 में 49 सैन्यकर्मी घायल हुए। आतंकवादियों के छिपे होने और उनकी घुसपैठ की पुख्ता खुफिया जानकारी मिलने के बाद सेना समय-समय पर आतंकवादियों के खिलाफ अभियान चलाती है। (वार्ता)

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