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हिमाचल में सामने आई उड़ने वाली दुर्लभ गिलहरी, क्या है इसकी विशेषता

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वेबदुनिया न्यूज डेस्क

शिमला , शनिवार, 5 अप्रैल 2025 (20:43 IST)
Rare Flying squirrel found in Himachal: हिमाचल प्रदेश वन विभाग (HPFD) की वन्यजीव शाखा ने लाहौल और स्पीति जिले की मियार घाटी में फर से युक्त ‘उड़ने वाली दुर्लभ गिलहरी’ की पहली बार तस्वीर सामने आई है। वन विभाग के प्रवक्ता ने शनिवार को जारी एक बयान में कहा कि यह दुर्लभ तस्वीर 10 अक्टूबर से चार दिसंबर 2024 के बीच किए गए ‘कैमरा ट्रैपिंग’ सर्वेक्षण के दौरान सामने आई।
 
1994 में इसे पुन: खोजा गया था : प्रवक्ता ने कहा कि उत्तर-पश्चिमी हिमालय में पाई जाने वाली उड़ने वाली गिलहरी (यूपेटॉरस सिनेरियस) को लंबे समय तक विलुप्त माना जाता था, लेकिन लगभग 70 वर्षों के अंतराल के बाद 1994 में इसे पुनः खोजा गया। उन्होंने कहा कि इसकी उपस्थिति की पुष्टि राज्य की स्तनधारियों की सूची में एक उल्लेखनीय वृद्धि और वन्यजीव संरक्षण प्रयासों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
 
प्रवक्ता ने बताया कि ‘कैमरा ट्रैपिंग’ सर्वेक्षण भारत में हिम तेंदुओं की संख्या आकलन (एसपीएआई) पहल का हिस्सा था। उन्होंने बताया कि सर्वेक्षण में एसपीएआई प्रोटोकॉल का पालन किया गया और मियार घाटी में रणनीतिक स्थानों पर 62 कैमरे लगाए गए। यह व्यापक सर्वेक्षण वन विभाग की वन्यजीव इकाई द्वारा नेचर कंजर्वेशन फाउंडेशन के सहयोग से किया गया था।

क्या है इसकी विशेषता : उड़न गिलहरी हिमालय की एक अद्वितीय और दुर्लभ प्रजाति है, जिसे इसकी रहस्यमयी जीवनशैली और अद्भुत उड़ान क्षमताओं के लिए जाना जाता है। यह प्रजाति विशेष रूप से हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और तिब्बत के उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में पाई जाती है। इसका आकार अपेक्षाकृत बड़ा होता है और यह गिलहरी की तरह दिखने वाली प्रजाति है, लेकिन इसका शरीर और जीवनशैली सामान्य गिलहरी से अलग है। इसका शरीर भारी और लंबा होता है। इसकी पूंछ भी लंबी और घनी होती है। 
 
इस प्रजाति के शरीर के दो भागों के बीच झिल्ली जैसी संरचना होती है, जो इसे एक स्थान से दूसरे स्थान तक कूदने और हवा में रहने में मदद करती है। हालांकि, यह सचमुच उड़ नहीं सकती, लेकिन यह हवा में एक प्रकार से लटकी रहती है और पेड़ों के बीच कूद सकती है। यह गिलहरी मुख्‍य रूप से रात के समय सक्रिय रहता है। यह पेड़ों पर अपना भोजन खोजनी है, जिसमें फल, बीज, पत्तियां और कुछ छोटे कीट शामिल हैं। (भाषा/वेबदुनिया)
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

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