Publish Date: Tue, 28 Jan 2020 (14:20 IST)
Updated Date: Tue, 28 Jan 2020 (14:10 IST)
नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने गोधरा कांड के बाद 2002 में सरदारपुरा में भड़के दंगों में 17 दोषियों को मंगलवार को सशर्त जमानत दी। इस घटना में 33 मुस्लिमों को जिंदा जला दिया गया था। न्यायालय ने उन्हें मध्यप्रदेश जाने तथा वहां सामुदायिक सेवा करने का आदेश दिया है।
प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे, न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ ने दोषियों को दो समूह में बांटा और कहा कि एक समूह गुजरात से बाहर निकलेगा और मध्यप्रदेश के इंदौर में रहेगा। पीठ ने कहा कि दोषियों के दूसरे समूह को मध्यप्रदेश के जबलपुर जाना होगा।
सरदारपुरा दंगा मामले में उम्रकैद की सजा पाने वाले दोषियों ने गुजरात उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ शीर्ष अदालत अपील दायर कर रखी है। न्यायालय ने कहा कि जमानत की शर्तों के तहत सभी दोषियों को प्रत्येक हफ्ते छह घंटे की सामुदायिक सेवा करनी होगी। इसके अलावा उन्हें हर हफ्ते स्थानीय थाने में पेश होना पड़ेगा।
न्यायालय ने इंदौर और जबलपुर में जिला विधिक सेवा अधिकारियों (डीएलएसए) को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि दोषी जमानत की शर्तों का सख्त पालन करें। उसने डीएलएसए को दोषियों की आजीविका के लिए उचित रोगजार ढूंढने में मदद करने का भी निर्देश दिया।
साथ ही शीर्ष अदालत ने मध्य प्रदेश विधिक सेवा अधिकरण को तीन महीने बाद एक रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है जिसमें बताना होगा कि दोषियों ने शर्तों का अनुपालन किया या नहीं। इससे पहले गुजरात उच्च न्यायालय ने गोधरा कांड के बाद हुए सरदारपुर दंगों में 14 को बरी और 17 को दोषी ठहराया था। (भाषा)