दागी नेताओं के बारे में Supreme court आज करेगा फैसला

गुरुवार, 13 फ़रवरी 2020 (10:43 IST)
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट आज गुरुवार को राजनीति में बढ़ते अपराधीकरण के खिलाफ दाखिल याचिका पर अपना फैसला सुनाएगा। कोर्ट द्वारा यह तय किया जाएगा कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले नेताओं को चुनाव लड़ने का टिकट मिलना चाहिए या नहीं? जस्टिस रोहिंटन नरीमन और एस. रवीन्द्र भट की बेंच इस मामले पर फैसला सुनाएगी।
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बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि कोर्ट चुनाव आयोग को निर्देश दे कि वह राजनीतिक दलों पर यह दबाव डाले कि राजनीतिक दल आपराधिक पृष्ठभूमि वाले नेताओं को टिकट न दें। ऐसा करने वाले राजनीतिक दलों के खिलाफ चुनाव आयोग कार्रवाई करे।
 
फ्रेमवर्क तैयार करने का निर्देश : इससे पूर्व में सुप्रीम कोर्ट ने राजनीति के अपराधीकरण को खत्म करने के लिए चुनाव आयोग को एक हफ्ते में फ्रेमवर्क तैयार करने का निर्देश दिया था। जस्टिस आरएफ नरीमन और जस्टिस रवीन्द्र भट की बेंच ने आयोग से कहा था कि राजनीति में अपराध के वर्चस्व को खत्म करने के लिए एक फ्रेमवर्क तैयार किया जाए।
 
क्या है नियम? : जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 8 दोषी राजनेताओं को चुनाव लड़ने से रोकती है, लेकिन ऐसे नेता जिन पर सिर्फ मुकदमा चल रहा है, वे चुनाव लड़ने के लिए स्वतंत्र हैं। भले ही उनके ऊपर लगा आरोप कितना भी गंभीर है।
 
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 8 (3) में प्रावधान है कि उपर्युक्त अपराधों के अलावा किसी भी अन्य अपराध के लिए दोषी ठहराए जाने वाले किसी भी विधायिका सदस्य को यदि 2 वर्ष से अधिक के कारावास की सजा सुनाई जाती है, तो उसे दोषी ठहराए जाने की तिथि से अयोग्य माना जाएगा। ऐसे व्यक्ति सजा पूरी किए जाने की तारीख से 6 वर्ष तक चुनाव नहीं लड़ सकेंगे।

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