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वक्फ या वकुफा, क्‍या है सही शब्‍द, कौन होता है वकिफा और क्‍यों है ये चर्चा में?

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वेबदुनिया न्यूज डेस्क

, बुधवार, 2 अप्रैल 2025 (17:27 IST)
मोदी सरकार ने आज लोकसभा में वक्‍फ बोर्ड (संशोधित) पेश कर दिया है। अब इस पर बहस हो रही है। अगर लोकसभा में यह बिल पास हो जाता है तो इसे राज्‍यसभा भेजा जाएगा। हालांकि मुस्‍लिम इस बिल को लेकर विरोध कर रहे हैं।

जानते हैं क्‍या है वक्‍फ बिल, क्‍या है इसका मतलब, कहां से आया शब्‍द और मुस्‍लिम क्‍यों इस बिल का विरोध कर रहे हैं। इस बीच दोनों तरफ के शब्‍द इंटरनेट पर ट्रेंड हो रहे हैं, वक्‍फ और वकुफा। जानते हैं क्‍या सही है वक्‍फ या वकुफा। क्‍या है इसका मतलब और क्‍यों है चर्चा में।

वक्फ का मतलब क्या है : बता दें कि 'वक्फ' अरबी भाषा के 'वकुफा' शब्द से बना है, जिसका अर्थ होता है, ठहरना या रोकना। कानूनी शब्दों में समझने की कोशिश करें तो वक्फ उसे कहते हैं, ‘इस्लाम में कोई व्यक्ति जब धार्मिक वजहों से या ईश्वर के नाम पर अपनी प्रॉपर्टी दान करता है तो इसे प्रॉपर्टी को वक्फ कर देना यानी रोक देना कहते हैं। फिर वो चाहे कुछ रुपये हों प्रॉपर्टी हो, बहुमूल्य धातु हो या घर मकान या जमीन। दान की गई इस प्रॉपर्टी को ‘अल्लाह की संपत्ति’ कहा जाता है और अपनी प्रॉपर्टी वक्फ को देने करने वाले व्‍यक्‍ति को ‘वकिफा’ कहा जाता है।

क्‍या ये संपत्‍ति बेच सकते हैं : बता दें कि वकिफा द्वारा दान की गई या वक्फ की गई इन संपत्तियों को बेचा नहीं जा सकता, इसका उपयोग धर्म के अलावा किसी और मकसद के लिए नहीं किया जा सकता। कहा जाता है कि मुस्लिम धर्मगुरु पैगंबर मोहम्मद के समय 600 खजूर के पेड़ों का एक बाग सबसे पहले वक्फ किया गया था और इससे होने वाली कमाई से मदीना के गरीबों की मदद की जाती थी।

कब बना था वक्फ एक्ट : भारत में वक्‍फ का इतिहास काफी पुराना है। इसका इतिहास 12वीं सदी में दिल्ली सल्तनत के समय से जुड़ा है और भारत में आजादी के बाद 1954 में पहली बार वक्फ एक्ट बना था और फिर साल 1995 में इस एक्ट में कुछ संशोधन किए गए थे। फिर नया वक्फ एक्ट बना और इसमें साल 2013 में भी कई बदलाव किए गए।

2024 में लोकसभा में वक्फ एक्ट में संशोधन : साल 2013 के बाद 8 अगस्त 2024 को लोकसभा में वक्फ एक्ट में संशोधन कर नया वक्फ बिल पेश किया गया, जिसके खिलाफ देश भर में विरोध प्रदर्शन हुए। विरोध के बाद बिल का ड्राफ्ट तैयार किया गया और इसे संसद की जेपीसी को भेज दिया गया, जिस पर चर्चा हुई और 27 जनवरी 2025 को जेपीसी ने बिल के ड्राफ्ट को मंजूरी देकर सुझाए गए 14 संशोधनों को स्वीकार किया। इसके बाद 13 फरवरी 2025 को जेपीसी की रिपोर्ट संसद में पेश की गई। 19 फरवरी 2025 को कैबिनेट की बैठक में वक्फ के संशोधित बिल को मंजूरी मिल गई और अब आज यानी 2 अप्रैल को इसे संसद में पेश किया गया। जिसके बाद लंबी बहस हुई है।

वक्फ बिल से कैसे होगा असर : मौजूदा नरेंद्र मोदी सरकार ने अपने सहयोगी दलों की मांग को स्वीकार करते हुए नए बिल में कई परिवर्तन किए हैं, जैसे 5 साल तक इस्लाम धर्म का पालन करने वाला ही वक्फ को अपनी संपत्ति दान कर सकेगा। दान की जाने वाली संपत्ति से जुड़ा कोई विवाद होने पर उसकी जांच के बाद ही अंतिम फैसला होगा। इसके साथ ही पुराने कानून की धारा 11 में संशोधन को भी स्वीकार कर लिया गया है, जिसमें कहा गया है कि वक्फ बोर्ड के पदेन सदस्य चाहे वह मुस्लिम हों या गैर मुस्लिम, उसे गैर मुस्लिम सदस्यों की गिनती में शामिल नहीं किया जाएगा। इसका अर्थ यह कि वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिम सदस्यों की संख्या बढ़ सकती है।
Edited By: Navin Rangiyal

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