Publish Date: Sun, 04 Jun 2023 (17:23 IST)
Updated Date: Sun, 04 Jun 2023 (17:27 IST)
what is the interlocking system : ओड़िसा के बालासोर में हुई भीषण रेल दुर्घटना का कारण इंटरलॉकिंग सिस्टम बताया गया है। आखिर यह इंटरलॉकिंग सिस्टम क्या होता है। रेल मंत्री ने कहा कि जो इस हादसे के लिए जिम्मेदार हैं, उनकी पहचान हो चुकी है और जल्द ही उन पर एक्शन लिया जाएगा। आखिर जानिए क्या होता है इंटरलॉकिंग सिस्टम और इससे कैसे होने वाले हादसों पर ब्रेक लगता है।
क्या होता है इंटरलॉकिंग सिस्टम : इंटरलॉकिंग रेलवे में सिग्नल देने में उपयोग होने वाली एक महत्वपूर्ण प्रणाली है। इससे यार्ड में फंक्शंस इस तरह कंट्रोल होते हैं, जिससे ट्रेन के एक कंट्रोल्ड एरिया के माध्यम से सुरक्षित तरीके से गुजरना सुनिश्चित किया जा सके। इंटरलॉकिंग का मतलब है कि स्टेशन से ट्रेन के गुजरते समय अगर लूप लाइन सेट है, तो लोको पायलट को मेन लाइन का सिग्नल नहीं दिया जाएगा। इसी तरह अगर मेन लाइन सेट है तो लूप लाइन का सिग्नल नहीं दिया जाएगा।
कैसे काम करता है सिस्टम : जब कोई ट्रेन किसी रूट पर चलती है तो इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम से ट्रेंड सेंसर्स उसकी रफ्तार, स्थिति और बाकी जानकारियों का पता लगाते हैं। यह इन्फॉर्मेशन सिग्नलिंग सिस्टम को भेजा जाता है। इसके बाद सिग्नलिंग सिस्टम या उस रेल के लिए सटीक सिग्नल भेजेगा, जिससे उसकी रफ्तार, रुकावट और बाकी सेंसर्स को नियंत्रित किया जाता है। यह प्रोसेस लगातार चलती रहती है, जिससे ट्रेनों को सही सिग्नल मिलते रहते हैं।
दो प्रकार के होते हैं : रेलवे में दो प्रकार के इंटरलॉकिंग सिस्टम होता है। एक तो मैकेनिकल इंटरलॉकिंग या इलेक्ट्रिकल इंटरलॉकिंग और दूसरा इलेक्ट्रॉनिक या कंप्यूटर आधारित होता है। इलेक्ट्रोनिक इंटरलॉकिंग आज के समय में मॉर्डर्न सिग्नलिंग हैं। यह ऐसा सिग्निलंग अरेंजमेंट है।
इसमें मैकेनिकल या कन्वेंशनल पैनल से ज्यादा फायदे होते हैं। इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉंकिंग लॉजिक सॉफ्टवेयर बेस्ड होता है। इसमें मॉडिफिकेशन आसान होता है। फेल होने की स्थिति में भी इसमें कम से कम सिस्टम डाउन टाइम होता है। Edited By : Sudhir Sharma