जाकिर नाईक पर 50 हजार रुपए देकर धर्म परिवर्तन कराने का आरोप

Webdunia
शुक्रवार, 29 जुलाई 2016 (09:23 IST)
इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन के प्रमुख विवादास्पद नेता जाकिर नाईक पर धर्म परिवर्तन कराने का आरोप लगा है। नाईक की संस्था आईआरएफ पर 50 हजार रुपए देकर लोगों को इस्लाम धर्म में परिवर्तित करने का आरोप है। बताया जाता है कि इस संस्था ने अब तक करीब 800 लोगों का धर्म परिवर्तन करा दिया है।  
आईआरएफ के बारे में यह सनसनीखेज खुलासा अर्शी कुरैशी ने किया है। कुरैशी को नवी मुम्बई, महाराष्ट्र एटीएस और केरल पुलिस ने 21 जुलाई को एक संयुक्त अभियान में गिरफ्तार किया था। कुरैशी पर कोच्चि की एक महिला का धर्म परिवर्तन करने का आरोप है।
 
स्थानीय जिला एवं सत्र अदालत में दाखिल एक रिपोर्ट में पुलिस ने दावा किया कि कुरैशी और पिछले हफ्ते मुंबई से ही गिरफ्तार किए गए रिजवान खान ने मेरिन उर्फ मरियम को आईएसआईएस में भर्ती कराने का इंतजाम किया था। मरियम अपने पति बेस्टिन विंसेंट ऊर्फ याहिया के साथ लापता है।
 
पुलिस ने कुरैशी और रिजवान की हिरासत मांगने के लिए अदालत में रिपोर्ट दाखिल की है। मरियम के लापता होने के मामले में कुरैशी को पहला, विंसेंट को दूसरा और रिजवान को तीसरा आरोपी बनाया गया है। कुरैशी और रिजवान को अदालत ने 14 दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया।
 
पुलिस ने दावा किया कि कुरैशी और विंसेंट ने मेरिन को मुंबई भेजकर उसे ईसाई धर्म से इस्लाम धर्म कबूल कराने और आईएसआईएस के लिए भर्ती करने की योजना मिलकर बनाई थी ताकि वह देश के बाहर और भीतर आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम दे सके। पुलिस ने कहा कि मेरिन का धर्म परिवर्तन और याहिया से उसकी शादी रिजवान खान ने ही कराई थी।
 
केरल पुलिस का दावा है कि कुरैशी के घर पर की गई छापेमारी से उसे ऐसे सबूत मिले जिससे साबित होता है कि आरोपी ने बॉम्बे ट्रस्ट की जुमा मस्जिद के जरिए मेरिन और अन्य का धर्म परिवर्तन कराया था। रिपोर्ट में कहा गया, 'आर्शी कुरैशी मुंबई के इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन के गेस्ट रिलेशन अफसर के तौर पर काम करता रहा था। यह पता लगाने के लिए गहन जांच की जरूरत है कि इस मामले में संगठन की कोई भूमिका तो नहीं।'
 
इधर, दिल्ली में ऑल इंडिया उलेमा मशाईख बोर्ड की ओर से हुई पत्रकार वार्ता में मुसलिम नेताओं ने जाकिर नाईक के 'पीस टीवी' के प्रसारण को बंद करने की मांग की है और उन पर विदेशी पैसे का खेल करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने जाकिर नाईक पर देश में युवाओं के बीच कट्टरता फैलाने का भी आरोप लगाया।
 
मुसलिम नेताओं ने आरोप लगाया कि जाकिर नाईक बड़ी बेबाकी से कुरान और हदीस की गलत व्याख्या करके न सिर्फ मुसलमानों को गुमराह करते हैं, बल्कि इस्लाम, पैगंबर साहब और उनके पारिवारिक सदस्यों का भी अपमान करते हैं। मुसलमानों के विरोध की वजह से उनके कई कार्यक्रम भी रद्द हो चुके हैं। 2008 में उन पर प्रतिबंध भी लग चुका है। बोर्ड का कहना है कि अब समय है कि ऐसी विचारधारा के खिलाफ कड़े कदम उठाकर मुसलिम युवाओं और भारतीय संस्कृति की सुरक्षा की जाए। बोर्ड ने जाकिर नाईक के खिलाफ जांच में तेजी लाने, पीस टीवी पर रोक लगाने और उनके विदेशी धन के स्रोतों की भी जांच करवाने की सरकार से मांग की है।
 
प्रेस कांफ्रेंस में बोर्ड के राष्ट्रीय सचिव शाह हसन जमीं, सज्जादा नशीं दरगाह कुतुबुद्दीन काकी महरोली के संरक्षक अब्दुल मोईद अजहरी, वाजा सैय्यद फरीद निजामी, सूफी अजमल निजामी, सैय्यद शाहबाद रिजवी, मौलाना अबु बकर, रईस अहमद अशरफी और कारी इलयास अहमद ने संबोधित किया।
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