अमेरिका को था डर, परमाणु तकनीक लीक कर सकता है पाक

Webdunia
रविवार, 29 जनवरी 2017 (15:44 IST)
नई दिल्ली। अमेरिकी प्रशासन 1982 में पाकिस्तान में चोरी-छिपे चलाए जा रहे परमाणु कार्यक्रमों को लेकर चिंतित था और उसे यह भी डर था कि पाकिस्तान अन्य देशों को परमाणु अवयव दे सकता है लेकिन तत्कालीन राष्ट्रपति जिया उल हक ने ऐसी किसी भी शंका को खारिज करते हुए कहा था कि पाकिस्तान की छवि खराब करने के लिए भारत इस तरह का प्रचार कर रहा है।
 
अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए ने कुछ दस्तावेज सार्वजनिक किए हैं, जिनमें इस बात का खुलासा किया गया है। जिया ने उस वक्त के अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन को एक पत्र लिखकर कहा था कि पाकिस्तान के पास न तो हैं और नहीं उसने किसी को परमाणु अवयवों के विशेष विवरण और डिजाइन दिए हैं। साथ ही परमाणु हथियारों के प्रसार में भूमिका निभाने के बारे में पाकिस्तान सोच भी नहीं सकता। 
 
जिया ने अमेरिकी राष्ट्रपति को भरोसा दिलाया था कि पाकिस्तान परमाणु बम नहीं बनाएगा। साथ ही इस बात पर जोर दिया था कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है। 
 
5 जुलाई 1982 को लिखे एक गोपनीय पत्र में जिया ने भारत के संदर्भ में कहा था कि पाकिस्तान के अमेरिका के साथ संबंधों को कमजोर करने के ‘खुले और कपटपूर्ण’ प्रयास चल रहें हैं। साथ ही क्षेत्र में चल रहे महत्वपूर्ण घटनाक्रमों से ध्यान भटकाने के लिए शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रमों को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।
 
जिया ने तत्कालीन अमेरिकी राजदूत वेरनन वाल्टर के उस दावे पर भी घोर आपत्ति की थी जिसमें उन्होंने कहा था कि उनके पास यह पुख्ता सूचना है कि पाकिस्तान परमाणु हथियारों को हासिल करने की योजना बना रहा है।

जिया ने रीगल को पत्र में लिखा, 'मुझे अमेरिकी राजदूत के इस कथन से कि पाकिस्तान ने परमाणु हथियार हासिल करने के लिए कदम उठाए हैं, से काफी पीड़ा पहुंची है।'
 
उन्होंने भारत का स्पष्ट उल्लेख करते हुए कहा कि क्षेत्र में चल रहे महत्वपूर्ण घटनाक्रमों से ध्यान भटकाने के लिए पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम को गलत ढ़ंग से पेश किया गया है। उल्लेखनीय है कि 2015 में ईरान के पूर्व राष्ट्रपति अकबर हाशिमी रफसंजानी ने खुलासा किया था कि 1980 में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को विकसित करने में पाकिस्तान ने अहम भूमिका निभाई थी।
 
1980 के दशक में रीगल को लिखे पत्र में जिया ने कहा था, 'हम आपके महान देश के साथ अपने संबंधों को तरजीह देते हैं और इस बात से आश्वस्त है कि यह चिरस्थाई साबित होंगे। अगर हम एैसे लोगों जिनके हित सध नहीं रहें हैं की तरफ से इन संबंधों पर खुलेआम और कपटपूर्ण दोनों ही तरह से हो रहे प्रहार के प्रति सजग रहेंगे तो ऐसा ही होगा।' (भाषा)
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