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Shardiya navratri 2025: नवरात्रि में शारीरिक संबंध रखना उचित है या नहीं?

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WD Feature Desk

, शुक्रवार, 26 सितम्बर 2025 (14:56 IST)
Shardiya navratri 2025: नवरात्र को शक्ति की उपासना का पर्व माना जाता है। शास्त्रों में बताया गया है कि नवरात्रि में देवी दुर्गा की पूजा करने से तीनों प्रकार के दुःख (शारीरिक, दैविक और भौतिक) दूर होते हैं। जो लोग नवरात्रि का व्रत रखते हैं, उन्हें कुछ विशेष नियमों का पालन करना आवश्यक होता है। कुछ लोगों को यह जानने की उत्सुकता हो सकती है कि क्या नवरात्रि व्रत के दौरान शारीरिक संबंध बनाना उचित है? दरअसल, शास्त्र इस विषय को विस्तार से स्पष्ट करते हैं। आइए जानते हैं कि इस संबंध में शास्त्र और पुराण क्या कहते हैं।
 
नवरात्रि में शारीरिक संबंध रखें या नहीं?
नवरात्रि को शक्ति की उपासना का पर्व माना जाता है। धार्मिक शास्त्रों और पुराणों में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि किसी भी व्रत या उत्सव के दौरान शारीरिक संबंध बनाना उचित नहीं है। नवरात्रि व्रत रखने वाले और देवी दुर्गा की पूजा करने वाले व्यक्तियों को नवरात्रि के दौरान ऐसे विचार मन में नहीं लाने चाहिए। नवरात्रि में लगभग हर हिंदू परिवार शक्ति की देवी दुर्गा की पूजा करता है। इसलिए, यदि इस दौरान शारीरिक संबंध रखे जाते हैं, तो इससे उपवास और पूजा का लाभ नष्ट हो जाएगा। नवरात्रि में पति-पत्नी दोनों को ही शारीरिक संबंध बनाने से बचना चाहिए।
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नवरात्रि के उपवास में आवश्यक है संयम 
बहुत से लोग नवरात्रि में उपवास रखते हैं और उनके नियमों का कड़ाई से पालन करते हैं। इसलिए, यदि किसी जोड़ीदार ने उपवास रखा है, तो उनके साथ शारीरिक संबंध रखने से उपवास भंग करने का पाप लगता है। साथ ही, जो व्यक्ति उपवास भंग करता है, वह भी इस पाप में भागीदार होता है। इसलिए, नवरात्रि के उपवास के दौरान शरीर और मन को नियंत्रित रखना आवश्यक है।
 
शास्त्र क्या कहते हैं?
नवरात्रि में, देवी दुर्गा नौ रूपों में पृथ्वी पर अवतरित होती हैं। सनातन धर्म में, महिलाओं को देवी के रूप में देखने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। समाज में यह परंपरा आज भी जारी है। नवरात्रि में कुँवारी कन्याओं की पूजा की जाती है और महिलाओं को सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। मनुस्मृति कहती है,
 
“यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः।
यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः।।”
अर्थ: इस श्लोक का अर्थ है कि जिस समाज, घर और परिवार में महिलाओं का आदर किया जाता है, वहाँ देवता भी निवास करते हैं। और जहाँ महिलाओं का आदर नहीं किया जाता, वहाँ सभी कार्य निष्फल हो जाते हैं।

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