Hanuman Chalisa

अलेक्सेई पेत्रोविच वरान्निकोव : जिनकी समाधि पर अंकित है रामचरित मानस का दोहा

Webdunia
सोमवार, 12 अक्टूबर 2015 (20:00 IST)
- न्यूज़ीलैंड से रोहित कुमार 'हैप्पी'
 
सोवियत रूस के प्रोफेसर अलेक्सेई पेत्रोविच वरान्निकोव हिन्‍दी और रूसी दोनों भाषाओं के अच्छे ज्ञाता थे। दोनों भाषाओं की अच्छी जानकारी व उन पर समान अधिकार होने के कारण आप सरलता से हिन्‍दी रचनाओं का रूसी में अनुवाद कर देते थे। आपकी मुख्य उपलब्धियों में रामचरित मानस का रूसी में पद्यानुवाद व मुंशी प्रेमचंद की कुछ रचनाओं का रूसी में अनुवाद सम्मिलित है। 
 
वरान्निकोव रूस के प्रमुख कवि भी थे। रामचरित मानस के सफल अनुवाद हेतु आपको रूस का सर्वोच्च सम्मान ‘ऑर्डर ऑव लेनिन' भी प्रदान किया गया था। वरान्निकोव को रामचरित मानस का अनुवाद करने में साढ़े दस वर्ष लगे थे। 
 
सोवियत रूस के बारे में मान्यता है कि वहाँ के निवासियों को धर्मशास्त्रों के प्रति कोई आस्था नहीं है और न वे परमात्मा के अस्तित्व को ही स्वीकारते हैं। धर्म को अफीम की गोली कहने की मान्यता का उद्गम-केंद्र इसी राष्ट्र को माना जाता है, किंतु वरान्निकोव  की समाधि पर रामचरित मानस का निम्नलिखित दोहा अंकित है :
 
"भलो भलाई पै लहहिं, लहै निचाई नीच।
सुधा सराही अमरता, गरल सराही मीच॥"

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

Hiccups Relief Tips: बार-बार हिचकी क्यों आती है? जानें कारण और आसान उपचार

इलाज आपकी थाली में, ध्यान नहीं दिया तो साइलेंट किलर साबित हो सकता है एनीमिया

घर संभालने वाली महिलाओं को 30 हजार; पर 'हाउस हसबैंड्स' का क्या?

भरपूर लाभ के लिए रोज करें मंडूकासन; जानिए इसे करने का सही तरीका

हिंदी साहित्य में पहेली के रूप में लिखी जाने वाली एक लयात्मक कविता: कह मुकरियां

सभी देखें

नवीनतम

Guru Hargobind Jayanti 2026: गुरु हरगोविंद सिंह जयंती: जानें उनके बताए सिद्धांत, जो आज भी हैं प्रासंगिक

राम मंदिर: सात्विकता, सुशासन और सनातन की अग्निपरीक्षा

Sant Kabir: अनपढ़ थे कबीर, फिर कैसे डिगा दी बड़े-बड़े पंडितों की गद्दी? सिकंदर लोदी भी टेक चुका था घुटने!

बॉलीवुड फ़िल्में जोड़ रही हैं भारत और लैटिन अमेरिका को

Diabetes Control Tips: बिना दवा के भी कंट्रोल हो सकती है शुगर! आजमाएं ये 10 जादुई और बेहद आसान घरेलू उपाय