Hanuman Chalisa

Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia

Bhaum Pradosh Vrat: भौम प्रदोष की कथा और महत्व

Advertiesment
भौम प्रदोष व्रत कथा
Bhaum Pradosh Vrat 2026 Story and Importance: जब कैलेंडर के पन्नों पर त्रयोदशी तिथि और मंगलवार का मिलन होता है, तो बनता है भौम प्रदोष का शुभ संयोग। यह दिन केवल उपवास का नहीं, बल्कि अटूट विश्वास की परीक्षा और महादेव के साथ-साथ संकटमोचन हनुमान की असीम कृपा पाने का अवसर है। आइए जानते हैं वह पौराणिक कथा, जो सिखाती है कि यदि भक्ति सच्ची हो, तो नियति भी अपना निर्णय बदल देती है।ALSO READ: शनि, बृहस्पति, राहु और केतु के कारण 5 राशियों के लिए रहेगा राजयोग

भौम प्रदोष से जुड़ी सबसे प्रचलित कथा एक वृद्ध महिला और उसके पुत्र मंगलिया की है। 
 

भक्ति की अग्नि-परीक्षा

प्राचीन समय की बात है, एक नगर में एक बूढ़ी मां रहती थी। उनका संसार उनके पुत्र और बजरंगबली की भक्ति के इर्द-गिर्द सिमटा था। हर मंगलवार वह नियम से व्रत रखतीं। उनकी इसी निष्ठा को देख एक दिन स्वयं हनुमान जी ने उनकी परीक्षा लेने की ठानी।
 
हनुमान जी ने एक साधारण साधु का रूप धरा और वृद्धा के द्वार पर जाकर अलख जगाई— 'है कोई हनुमान भक्त, जो इस साधु की इच्छा पूरी करे?'
 

साधु की कठिन शर्त

वृद्धा ने श्रद्धापूर्वक प्रणाम किया और सेवा का अवसर मांगा। वेशधारी हनुमान जी ने कहा, 'मैं भूखा हूं और भोजन करना चाहता हूं, लेकिन मेरी शर्त है कि मुझे शुद्ध भूमि पर ही भोजन बनाना है, इसलिए तुम जमीन लीप दो।'
 
वृद्धा असमंजस में पड़ गई, क्योंकि मंगलवार के दिन मिट्टी खोदना या लीपना उनके व्रत के नियमों के विरुद्ध था। उन्होंने विनय की, 'महाराज, लीपने के अलावा आप कोई भी आज्ञा दें, मैं शिरोधार्य करूंगी।'
 
साधु ने उन्हें वचनबद्ध किया और एक ऐसी मांग रख दी जिसे सुनकर किसी भी मां की रूह कांप जाए। साधु ने कहा— 'अपने पुत्र को बुलाओ, मैं उसकी पीठ पर आग जलाकर भोजन बनाऊंगा।'
 

चमत्कार की पराकाष्ठा

वचन की पक्की वृद्धा ने भारी मन से अपने कलेजे के टुकड़े को साधु के हवाले कर दिया। साधु ने बच्चे को उल्टा लिटाया और उसकी पीठ पर चूल्हा जलाया। मां का हृदय फट रहा था, वह यह दृश्य देख न सकी और घर के भीतर जाकर छिप गई।
 
जब भोजन तैयार हुआ, तो साधु ने आवाज दी, 'माई, अपने बेटे को बुलाओ, उसे भी प्रसाद खिलाना है।' वृद्धा फूट-फूट कर रोने लगी और बोली, 'महाराज, अब उसे पुकार कर मेरे जख्मों को और न कुरेदें।'
 
लेकिन साधु के बार-बार आग्रह पर जैसे ही मां ने कांपते स्वर में अपने बेटे 'मंगलिया' को पुकारा, बच्चा खेलता हुआ बाहर आ गया। अपने पुत्र को जीवित देख मां के पैरों तले जमीन खिसक गई। तभी साधु ने अपना असली रूप दिखाया— साक्षात पवनपुत्र हनुमान!
 
सीख: हनुमान जी ने वृद्धा को गले लगाया और आशीर्वाद दिया कि जो भी भौम प्रदोष पर इस कथा को सुनेगा या व्रत रखेगा, उसके जीवन के सारे संकट और 'ऋण' (कर्ज) सदा के लिए समाप्त हो जाएंगे।
 

भौम प्रदोष व्रत का महत्व

इस व्रत को 'ऋण विमोचन प्रदोष' भी कहा जाता है, क्योंकि यह जीवन के हर प्रकार के ऋण/ कर्ज से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है। जिन जातकों की कुंडली में मंगल दोष होता है या मंगल नीच का होता है, उनके लिए यह व्रत रामबाण है। यह व्रत ग्रहों के दोषों का निवारण करके विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करता है। यह शिव और मंगल दोनों की ऊर्जा को संतुलित करता है, जिससे व्यक्ति के स्वभाव में उग्रता कम होती है और धैर्य बढ़ता है। 
 
मान्यता है कि भौम प्रदोष के दिन 'ऋणमोचक मंगल स्तोत्र' का पाठ करने से पुराने से पुराना कर्ज उतरने के रास्ते खुल जाते हैं। मंगल को ऊर्जा का कारक माना गया है। इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति के भीतर छिपे हुए डर का नाश होता है और वह कठिन परिस्थितियों का सामना करने के लिए तैयार होता है। शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष काल में शिव जी कैलाश पर्वत पर प्रसन्न मुद्रा में नृत्य करते हैं। इस समय की गई पूजा से न केवल शारीरिक व्याधियां दूर होती हैं, बल्कि अंततः मोक्ष की प्राप्ति भी होती है।
 
निष्कर्ष: यह कथा हमें सिखाती है कि संकट के समय भी जिसका धर्म और विश्वास डगमगाता नहीं, ईश्वर स्वयं उसके रक्षक बनकर खड़े होते हैं।
 
अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: Bhauṃ Pradosh 2026; भौम प्रदोष का व्रत रखने से 3 कार्यों में मिलती है सफलता
 

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi

अगला लेख

Atichari brihaspati:क्या अतिचारी बृहस्पति बढ़ाएगा गर्मी? 50 डिग्री तक जा सकता है पारा?