माघ शुक्ल चतुर्थी को कहां मनाई जाती है गणेश जयंती?
, शुक्रवार, 16 जनवरी 2026 (11:07 IST)
Magh Shukla Chaturthi 2026: माघ शुक्ल चतुर्थी को मनाई जाने वाली गणेश जयंती, जिसे माघी गणेश उत्सव, तिलकुंद चतुर्थी या वरद चतुर्थी भी कहा जाता है, मुख्य रूप से महाराष्ट्र और कोंकण तटीय क्षेत्रों में बहुत धूमधाम से मनाई जाती है।
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हालांकि भाद्रपद महीने की गणेश चतुर्थी पूरे भारत में प्रसिद्ध है, लेकिन धार्मिक मान्यताओं, विशेषकर गणेश पुराण के अनुसार माघ शुक्ल चतुर्थी को ही भगवान गणेश का वास्तविक जन्म दिवस माना जाता है। वर्ष 2026 में गणेश जयंती 22 जनवरी, गुरुवार को मनाई जाएगी।
माघ शुक्ल चतुर्थी को गणेश जयंती (या माघ गणेश चतुर्थी) मनाई जाती है, और यह विशेष रूप से महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, गोवा और मध्य प्रदेश में बड़े धूमधाम से मनाई जाती है। इस दिन, भगवान गणेश की पूजा की जाती है और उनके आशीर्वाद के लिए व्रत और उपवास रखे जाते हैं।
माघ शुक्ल चतुर्थी का पर्व गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है, जिसमें लोग गणेश जी का पूजन करते हैं और फिर यह पर्व खास तौर पर महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में प्रसिद्ध है, लेकिन पूरे भारत में विभिन्न स्थानों पर इसे अलग-अलग रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है।
प्रमुख उत्सव स्थल:
महाराष्ट्र: यहां माघ गणेश जयंती का त्योहार बहुत महत्वपूर्ण है। पुणे जिले के मोरगांव (मयूरेश्वर) मंदिर और सिद्धटेक (सिद्धिविनायक) मंदिर (अष्टविनायक के प्रमुख मंदिर) में इस दिन भारी भीड़ उमड़ती है।
कोंकण क्षेत्र: रत्नागिरी के पास गणपतिपुले स्थित समुद्र तटीय मंदिर में इसे विशेष रूप से मनाया जाता है, जहां गणेश जी को 'पश्चिम द्वारदेवता' माना जाता है।
गोवा: तटीय राज्य होने के कारण यहां भी माघी गणेश उत्सव की परंपरा है।
वाराणसी (उत्तर प्रदेश): यहां भगवान गणेश को 'ढुंढिराज' के रूप में पूजा जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, इसी दिन गणेश जी ने ढुंढिराज अवतार लिया था।
विशेषताएं: इस दिन तिल का महत्व अधिक होने के कारण तिल का दान और तिल से बने व्यंजनों जैसे तिल के लड्डू का भोग लगाया जाता है, इसलिए इसे 'तिलकुंद चतुर्थी' भी कहते हैं। भाद्रपद मास की चतुर्थी की तरह इस दिन भी शाम को चंद्रमा देखना वर्जित माना जाता है।
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