Publish Date: Thu, 16 Apr 2026 (14:39 IST)
Updated Date: Thu, 16 Apr 2026 (14:56 IST)
वैशाख अमावस्या पर पितृ दोष से मुक्ति और सुख-समृद्धि के लिए ब्रह्म मुहूर्त और अभिजित मुहूर्त का विशेष महत्व है। जानें 17 अप्रैल 2026 के शुभ मुहूर्त और क्या करें-क्या न करें।
वैशाख मास का महत्व:
हिंदू धर्म में वैशाख मास की अमावस्या का विशेष महत्व है। इसे 'सत्तू अमावस्या' के नाम से भी जाना जाता है। साल 2026 में वैशाख अमावस्या 17 अप्रैल को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान करने से न केवल पितृ प्रसन्न होते हैं, बल्कि जीवन के बड़े से बड़े कष्ट भी दूर हो जाते हैं।यदि आप भी अपनी सोई हुई किस्मत को जगाना चाहते हैं, तो 17 अप्रैल की सुबह कुछ विशेष कार्यों को करना न भूलें। आइए जानते हैं इस दिन के शुभ मुहूर्त और सावधानियां।
17 अप्रैल 2026: शुभ मुहूर्त (Auspicious Timings)
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:25 से 05:09 तक। स्नान, ध्यान और मंत्र जप के लिए सर्वश्रेष्ठ।
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:55 से 12:47 तक। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत के लिए उत्तम।
वैशाख अमावस्या: क्या करें?
1. ब्रह्म मुहूर्त में स्नान: संभव हो तो गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करें। यदि घर पर हैं, तो पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर नहाएं।
2. पितृ तर्पण: अमावस्या पितरों की तिथि है। सुबह स्नान के बाद दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों को जल अर्पित (तर्पण) करें। इससे पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।
3. पीपल की पूजा: इस दिन पीपल के पेड़ में जल चढ़ाएं और सरसों के तेल का दीपक जलाएं। पीपल में त्रिदेवों का वास माना जाता है।
4. दान का महत्व: वैशाख का महीना गर्मी का होता है। इसलिए इस दिन जल पात्र (कलश), सत्तू, पंखा, और मौसमी फलों का दान करना 'अश्वमेध यज्ञ' के समान पुण्य देता है।
5. चींटियों को भोजन: आर्थिक उन्नति के लिए सूखे आटे में चीनी मिलाकर चींटियों को खिलाएं।
भूलकर भी न करें ये काम:
1. देर तक न सोएं: अमावस्या की सुबह सूर्योदय से पहले उठना अनिवार्य है। देर तक सोने से शरीर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
2. तामसिक भोजन से परहेज: इस दिन मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज का सेवन बिल्कुल न करें। सात्विक भोजन ही ग्रहण करें।
3. वाद-विवाद से बचें: घर में कलह या किसी का अपमान न करें। विशेषकर बुजुर्गों और महिलाओं का सम्मान करें, अन्यथा पितृ रुष्ट हो सकते हैं।
4. सुनसान जगहों पर न जाएं: माना जाता है कि अमावस्या की रात नकारात्मक शक्तियां सक्रिय होती हैं, इसलिए रात के समय श्मशान या सुनसान रास्तों पर जाने से बचें।
5. ब्रह्मचर्य का पालन: इस पवित्र तिथि पर संयम रखें और ब्रह्मचर्य का पालन करें।
ब्रह्म मुहूर्त में क्यों है पूजा का महत्व?
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वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दोनों दृष्टिकोणों से ब्रह्म मुहूर्त में वातावरण सबसे शुद्ध होता है।
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वैशाख अमावस्या पर यदि आप प्रात: 4:30 के आसपास उठकर 'ॐ पितृभ्य: नम:' या 'ॐ अर्यमायै नमः' का जाप करते हैं, तो पितृदोष से मुक्ति एवं मानसिक शांति के साथ-साथ संकल्प शक्ति में वृद्धि होती है।
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वैशाख अमावस्या 17 अप्रैल 2026 को दान और अध्यात्म का संगम है। यदि आप विधि-विधान से पितरों का स्मरण करते हैं और शुभ मुहूर्त का लाभ उठाते हैं, तो आपके घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास होगा।
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