Yashoda Jayanti 20026: कब है यशोदा जयंती 6 या 7 फरवरी, जानें सही डेट, मुहूर्त, पूजा विधि और कथा
, गुरुवार, 5 फ़रवरी 2026 (14:12 IST)
Yashoda Jayanti 2026 date: यशोदा जयंती भगवान श्री कृष्ण की मैया यशोदा के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है। हर साल यह तिथि फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी को आती है। इस दिन श्रद्धालु मां यशोदा और बाल गोपाल की पूजा करते हैं, व्रत रखते हैं और कथा का श्रवण करते हैं। माना जाता है कि यशोदा जयंती का व्रत करने से संतान सुख, पारिवारिक प्रेम, सुख-शांति और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। यह पर्व खास तौर पर मातृत्व, निस्वार्थ प्रेम और भक्ति का प्रतीक माना जाता है।
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यशोदा जयंती 2026: सही डेट
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कैलेंडर के मतांतर के अनुसार पूजन के शुभ मुहूर्त
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यशोदा जयंती पूजा विधि
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यशोदा जयंती की कथा
साल 2026 में तिथि के समय को लेकर थोड़ा भ्रम हो सकता है, लेकिन उदय तिथि और गणना के अनुसार सही जानकारी नीचे दी गई है:
यशोदा जयंती 2026: सही डेट
साल 2026 में यशोदा जयंती 7 फरवरी (शनिवार) को मनाई जाएगी।
हिन्दू पंचांग के अनुसार 6 फरवरी को पंचमी तिथि है और फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि 7 फरवरी को पड़ रही है। इस बार षष्ठी तिथि 7 फरवरी को 01:18 ए एम यानी रात से शुरू होगी, अत: हिंदू धर्म में त्योहार 'उदय तिथि' यानी सूर्य उदय के समय जो तिथि हो उसके अनुसार ही मनाया जाता है। इसलिए 7 फरवरी ही पूजन के लिए श्रेष्ठ दिन है।
यशोदा जयंती शनिवार, 7 फरवरी 2026 के शुभ मुहूर्त
षष्ठी तिथि प्रारंभ- 07 फरवरी, 2026 को 01:18 ए एम बजे
षष्ठी तिथि समाप्त- 08 फरवरी, 2026 को 02:54 ए एम बजे
यशोदा जयंती पूजा विधि
इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं।
स्नान और संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें।
स्थापना: एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर माता यशोदा और बाल गोपाल (कृष्ण जी) की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें।
श्रृंगार: माता यशोदा को लाल चुनरी और श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें। बाल गोपाल को माखन-मिश्री का भोग लगाएं।
दीप-धूप: घी का दीपक जलाएं और विधिवत आरती करें।
यशोदा जयंती की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, माता यशोदा ने पूर्व जन्म में भगवान विष्णु की घोर तपस्या की थी। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान ने वरदान मांगने को कहा। यशोदा जी ने इच्छा जताई कि वे भगवान को अपने पुत्र के रूप में पाकर उन्हें वात्सल्य प्रेम देना चाहती हैं।
अगले जन्म में जब भगवान विष्णु ने कृष्ण अवतार लिया, तब देवकी की संतान होने के बावजूद, योगमाया के प्रभाव से वे गोकुल में यशोदा माता के पास पहुंचे। एक बार यशोदा जी को बाल कृष्ण के मुंह में संपूर्ण ब्रह्मांड दिखाई दिया, जिसके कारण उनका भक्ति-भाव और गहरा हुआ। इस प्रकार माता यशोदा को साक्षात ईश्वर का पालन-पोषण करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इसीलिए इस दिन को मातृ-प्रेम के उत्सव के रूप में मनाया जाता है।
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