Publish Date: Fri, 13 Mar 2026 (11:11 IST)
Updated Date: Fri, 13 Mar 2026 (11:23 IST)
Night of Power: शबे कद्र इस्लाम की सबसे पवित्र और बरकत वाली रातों में से एक मानी जाती है। यह रात रमज़ान के आखिरी दस दिनों में आती है और मुसलमानों के लिए इबादत, दुआ और अल्लाह से माफी मांगने का खास मौका होती है। वर्ष 2026 में, लैलतुल कद्र/लैलात-अल-क़द्र या शबे कद्र 16 मार्च, सोमवार की शाम को पड़ने की उम्मीद है। यह गहराई से इबादत, प्रार्थना और क्षमा मांगने का समय है। कहा जाता है कि यह हज़ार महीनों से भी अधिक फलदायी समय होता है।
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शबे कद्र क्या है?
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2026 में शबे कद्र कब होगी?
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शबे कद्र का महत्व
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इस रात क्या किया जाता है?
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शबे कद्र क्या है? जानें इतिहास
इस्लाम धर्म में शबे कद्र का अर्थ है 'ताकत/कद्र की रात'। इस्लामी मान्यता के अनुसार इसी रात पैगंबर हज़रत मुहम्मद (सल्ल.) पर कुरान की पहली आयत नाज़िल हुई थी। अत: कुरान में बताया गया है कि यह रात 1000 महीनों से बेहतर है, यानी इस रात की इबादत का सवाब बहुत ज़्यादा माना जाता है। इस रात को लैलतुल कद्र (Laylatul Qadr) भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है 'ताकत या कद्र की रात'। इस्लामी मान्यता के अनुसार इसी रात कुरान शरीफ की पहली आयत नाज़िल हुई थी, इसलिए इसका महत्व बहुत अधिक माना जाता है।
2026 में शबे कद्र कब होगी?
इस्लामी परंपरा के अनुसार शबे कद्र की निश्चित तारीख तय नहीं है। यह रमज़ान के आख़िरी 10 दिनों की विषम रातों में खोजी जाती है- 21, 23, 25, 27 या 29 रमज़ान की रात। अधिकतर मुसलमान 27वीं रमज़ान की रात को शबे कद्र मानकर विशेष इबादत करते हैं।
इस हिसाब से संभावित शबे कद्र की रातें लगभग इस समय पड़ सकती हैं:
* 21 रमज़ान: 10–11 मार्च 2026 की रात
* 23 रमज़ान: 12–13 मार्च 2026 की रात
* 25 रमज़ान: 14–15 मार्च 2026 की रात
* 27 रमज़ान: 16–17 मार्च 2026 की रात (सबसे ज़्यादा मानी जाती है)
* 29 रमज़ान: 18–19 मार्च 2026 की रात
शबे कद्र का महत्व
1. कुरान का अवतरण- इसी रात कुरान की पहली आयत उतरी।
2. हज़ार महीनों से बेहतर- इस रात की इबादत का सवाब बहुत ज़्यादा बताया गया है।
3. गुनाहों की माफी- सच्चे दिल से दुआ करने पर अल्लाह से माफी मिलने की उम्मीद होती है।
4. फरिश्तों का उतरना- इस रात फरिश्ते धरती पर उतरते हैं और अमन-सुकून फैलाते हैं।
इस रात क्या किया जाता है?
* नफ़्ल नमाज़ और ताहज्जुद पढ़ना
* कुरान की तिलावत
* दुआ और इस्तिग़फ़ार (माफी मांगना)
* ज़िक्र और सदक़ा आदि।
शबे कद्र मुसलमानों के लिए केवल एक धार्मिक रात ही नहीं बल्कि आत्मिक शांति, आत्म सुधार और अल्लाह के करीब होने का अवसर भी है। इसलिए इस रात को नमाज़, तिलावत-ए-कुरान, जिक्र, सदका और खास दुआओं के साथ बिताना बहुत फायदेमंद माना जाता है।
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