Ramadan 2023 : छठवां रोजा है सब्र और बुलंदी की सीढ़ी

Webdunia
पवित्र कुरआन के पच्चीसवें पारे (अध्याय-25) की सूरह शूरा की तिरालीसवीं आयत में ज़िक्र है : 'व लमन सबरा व़गफरा इन्ना ज़ालिका लमिन अज़मिल उमूर'- 'जो सब्र करने वाले हैं और रहम करने वाले हैं वो बुलंद मर्तबे और अज़मत (गरिमा) वाले हैं।' यहां यह बात काबिलेगौर है कि 'सब्र' (सबरा) और 'रहम' (गफ़रा) मर्तबे और अज़मत (गौरव-गरिमा) बढ़ाने वाले हैं और पैरोकार भी। 
 
रहम रास्ता है अजमत का। सब्र, सीढ़ी है बुलंदी की। तो इसका सीधा-सा जवाब है कि मुकम्मल ईमानदारी और अल्लाह की फ़रमाबर्दारी के साथ रखा गया रोजा और रोजदार इसकी पहचान है। नेकनीयत और पाकीज़गी के साथ रखे गए रोजे का नूर अलग ही चमकता है। जज्बा-ए-रहम (दया का भाव) रोजेदार की पाकीजा दौलत है और जज्बा-ए-सब्र रोजेदार की रूहानी ताकत है।
 
कुरआने-पाक में अल्लाह को सब्र करने वाले का साथ देने वाला बताया गया है (इन्नाल्लाहा म़अस्साबेरीन' यानी 'अल्लाह सब्र करने वालों के साथ है।') रोजा इम्तहान भी है और इंतजाम भी। सब्र और संयम रोजेदार की कसौटी है इसलिए रोजा इम्तहान है।
 
सब्र की कसौटी पर रोजेदार कामयाब यानी खरा साबित हुआ तो इसका मतलब यह कि उसने आख़िरत (परलोक) का इंतज़ाम कर लिया। इसलिए रोजा इंतज़ाम है। कुल मिलाकर यह कि रोजा ऱहम का हरकारा और सब्र का फौवारा है।प्रस्तुति : अज़हर हाशमी

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

होली के बाद रंगपंचमी कब है, क्या करते हैं इस दिन?

फाल्गुन मास की पूर्णिमा का क्या है महत्व?

धुलेंडी के दिन क्या क्या करते हैं, जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त

होलाष्टक का क्या है महत्व, क्यों नहीं करते हैं कोई मांगलिक कार्य?

होलिका दहन और धुलेंडी के बाद क्यों मनाई जाती है रंग पंचमी?

सभी देखें

धर्म संसार

रंगों की वर्षा, गुलाल की फुहार... होली के इन संदेशों को भेजकर मनाइए रंगों का त्योहार

Holi 2025: होली और रंगपंचमी पर फाग यात्रा और गेर निकालने की परंपरा के 10 रोचक तथ्य

रंग एकादशी पर ब्रजभूमि में होली का धमाल, बांकेबिहारी मंदिर पर रंगोत्सव में रंगे भक्त

Holi 2025: होली धुलेंडी पर क्यों करते हैं मां संपदा देवी की पूजा, क्या है उनकी कथा

होली सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है... होली 2025 पर 10 लाइन निबंध हिंदी में

अगला लेख