बुलंदशहर में गौरक्षकों की भीड़ का हमला, पुलिस अधिकारी समेत दो की मौत

सोमवार, 3 दिसंबर 2018 (21:00 IST)
बुलंदशहर/लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बुलंदशहर के स्याना कोतवाली क्षेत्र में सोमवार को गोकशी के विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित गौरक्षकों की भीड़ और पुलिस के बीच हुई झड़प में कोतवाली निरीक्षक समेत दो लोगों की मृत्यु हो गई, जबकि चार अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। मामले की एसआईटी जांच के आदेश दिए गए हैं।
 
 
पुलिस सूत्रों ने बताया कि उत्तेजित गौरक्षकों ने चिंगरावटी पुलिस चौकी पर जमकर तोड़फोड़ कर आग लगा दी। पुलिस की कई जीप और आधा दर्जन दो पहिया वाहन फूंक डाले गए। पथराव से स्याना कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक सुबोध कुमार सिंह की सिर में पत्थर लगने से मृत्यु हो गई।

पुलिस की जवाबी कार्रवाई में चिंगरावटी गांव के एक गौरक्षक सुमित कुमार की गोली लगने से मौत हुई। झड़प के दौरान पुलिस क्षेत्राधिकारी सत्यप्रकाश, दरोगा सुरेश चौधरी, होमगार्ड का जवान राजेन्द्र के अलावा एक अन्य व्यक्ति पत्थर लगने से घायल हुए हैं।
 
जांच के आदेश : इस बीच लखनऊ में पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था आनंद कुमार ने बुलंदशहर की घटना की एसआईटी जांच के आदेश दिए हैं। मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए गाजियाबाद और नोएडा से अतिरिक्त पुलिस बल भेजा गया है। 
 
जिला मजिस्ट्रेट अनुज कुमार, एसएसपी केबी सिंह और मेरठ मुख्यालय से अपर पुलिस महानिदेशक प्रशान्त  कुमार, पुलिस महानिरीक्षक राम कुमार एवं आयुक्त अनिता मेश्राम मौके पर कैंप किए हुए हैं। एडीजी प्रशान्त कुमार ने दावा किया कि स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है। अभी किसी पक्ष की ओर से कोई मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है।
 
सूत्रों ने बताया कि स्याना क्षेत्र के गांव महाव में तड़के खेतों में दो दर्जन से अधिक गौवंश मृत अवस्था में पड़े मिले जिसे क्षेत्र में सनसनी फैल गई। मामले की सूचना मिलते ही बड़ी तादाद में गौरक्षक एवं हिन्दू संगठनों से जुडे कार्यकर्ता मौके पर पहुंच गए। जब तक पुलिस मौके पर पहुंचती, गौरक्षक गौवंश के अवशेषों को ट्रैक्टर ट्रॉली में भरकर स्याना-बुलन्दशहर रोड स्थित चिंगरावटी पुलिस चौकी पर ले आए। 
 
गौरक्षकों ने ट्रैक्टर ट्रॉली को सड़क के बीचोंबीच खड़ी कर पुलिस प्रशासन विरोधी नारेबाजी की और सड़क पर धरना शुरू कर दिया, जिससे सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। हिन्दू संगठन के कार्यकर्ताओं का आरोप है कि क्षेत्र में गौकशी धड़ल्ले से की जा रही है, जिसकी शिकायत पुलिस प्रशासन से भी की गई, लेकिन पुलिस ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की।
 
सड़क पर धरना और यातायात जाम की सूचना पर स्याना के प्रभारी निरीक्षक सुबोध कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और उन्होंने प्रभावी कार्रवाई का आश्वासन देते हुए धरना जाम समाप्त कराने का प्रयास किया, लेकिन भीड़ ने उनकी अपील को अनसुना करते हुए धरना जारी रखा। प्रभारी निरीक्षक ने स्थिति हाथ से निकलते हुए देख पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी, जिससे आसपास के थानों की पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस क्षेत्राधिकारी सत्य प्रकाश भी मौके पर मौजूद थे।
 
सूत्रों ने बताया कि पुलिस ने आंदोलनकारियों को जबरन धरने से उठाकर जाम खुलवाने का प्रयास किया जिस पर भीड़ की पुलिस से झड़प हो गई। आरोप है कि आंदोलनकारियों में कुछ उपद्रवी तत्व भी शामिल हो गए। पुलिस ने जब हवा में लाठियां लहराकर भीड़ को तितर-बितर करना चाहा, तब उपद्रवी तत्वों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। एक पत्थर इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिर में लगा जिससे वह चोटिल होकर जमीन पर गिर पड़े और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। 
 
इंस्पेक्टर के घायल होते ही पुलिस और पीएसी ने अधाधुंध लाठियां बरसानी शुरू कर दी। इसी बीच, आंदोलनकारियों की की ओर से किसी ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग की। गोली लगने से ग्राम चिंगरावटी का 27 वर्षीय सुमित घायल हो गया, जिसने बाद में दम तोड़ दिया।
 
बेकाबू उपद्रवियों ने चिंगरावटी पुलिस चौकी में आग लगा दी। पुलिस निरीक्षक, पुलिस क्षेत्राधिकारी के वाहन को पथराव करके क्षतिग्रस्त कर दिया और बाद में दोनों वाहनों को आग के हवाले कर दिया। उपद्रवी तत्वों ने पुलिस चौकी के आसपास खड़े एक दर्जन वाहनों में तोड़फोड़ की और बाद में उनमें आग लगा दी। इनमें आधा दर्जन दो पहिया वाहन भी शामिल हैं।
 
मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश : जिलाधिकारी अनुज कुमार झा ने सोमवार शाम यहां बताया कि इस घटना की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए गए हैं और अपर जिलाधिकारी (एडीएम) प्रशासन अरविन्द कुमार मिश्रा को जांच मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया है।
 
सपा-कांग्रेस ने तीखी आलोचना की : उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में कथित गोरक्षकों और पुलिस के बीच हुई झड़प में पुलिस अधिकारी समेत दो लोगों की मृत्यु के मामले में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। 
 
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मौजूदा भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सूबे की बदहाल कानून व्यवस्था का इससे ज्वलंत उदाहरण क्या होगा कि थानों और पुलिसकर्मियों को निशाना बनाया जा रहा है वहीं कांग्रेस ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण घटना करार देते हुए कहा कि सरकार की अकर्मण्यता का यह जीवंत प्रमाण है।

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