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Sidhu Musewala murder case : कनाडा, इटली और दुबई तक जुड़े है गैंग के तार, जानिए पंजाब में गैंगवॉर की असली कहानी

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सोमवार, 6 जून 2022 (18:37 IST)
पंजाब। सिद्धू मूसेवाला की हत्या ने पंजाब में गैंगवॉर की आपसी रंजिश की कहानियों का खुलासा किया है। पुलिस की जांच में हर रोज नई-नई गैंग्स के नाम सामने आ रहे हैं, जिनके कनेक्शन भारत के बाहर कनाडा, इटली, दुबई तक जुड़े हुए हैं। जिस गोल्डी बराड़ ने मूसेवाला की हत्या की जिम्मेदारी ली, वह कनाडा में है।
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जिस लॉरेंस बिश्नोई का नाम बार-बार इस केस में सामने आ रहा है, माना जा रहा है कि वो दिल्ली की तिहाड़ जेल से बैठकर गैंग की गतिविधियों को कंट्रोल कर रहा है। मूसेवाला की मौत के बाद एक बार फिर पंजाब का गैंगवॉर चर्चाओं में है। जानते हैं कि आखिर कितने गैंग हैं पंजाब में, इनका मकसद क्या है और वो कौन सी गैंग्स हैं, जिनके बीच अभी गैंगवॉर चल रहा है।
 
पंजाब में गैंगवॉर का सिलसिला 90 के दशक से चला आ रहा है। यह वो दौर था जब यूपी में राजनीतिक उद्देश्यों के लिए कई गैंग्स बनाई जाती थी, जिनके संबंध स्थानीय नेताओं से लेकर केंद्रीय मंत्रियों तक होते थे। यूपी की गैंग्स से प्रेरित होकर पंजाब के लड़कों ने भी ग्रुप्स बनाकर लूट, कब्जे, कत्ल, अपहरण आदि की घटनाओं को अंजाम देना शुरू कर दिया। इसी दशक के अंत में पंजाब के लोगों का नाम दक्षिण भारत के कई शहरों में हुई वारदातों में भी आने लगा। पंजाब में आज की तारीख में करीब 60 गैंग हैं, जिनके 500 के करीब सदस्य हैं। इनमें कई जेल की हवा खा रहे हैं।
 
लॉरेंस बिश्नोई ने कहा था कि मेरे दोस्त विकी मिद्दुखेरा की हत्या में मूसेवाला का हाथ था। बिश्नोई को शक था कि शरणप्रीत, जो कि मूसेवाला का मैनेजर रह चुका है, ने मिद्दुखेरा का कत्ल किया था। शरणप्रीत कनाडा चला गया, इसलिए बिश्नोई की गैंग ने मूसेवाला का कत्ल कर दिया। 
 
देविंदर सिंह सिद्धू की बंबिहा गैंग ने अब मूसेवाला की हत्या का बदला लेने के ऐलान किया है। उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा था कि गोल्डी बराड़ और लॉरेंस बिश्नोई को मूसेवाला के साथ ऐसा नहीं करना चाहिए था। बंबिहा गैंग जल्द ही मूसेवाला की मौत का बदला लेगी। इस तरह पंजाब में एक बार फिर से गैंगवॉर छिड़ने की आशंका जताई जा रही है। 
 
लॉरेंस बिश्नोई का दोस्त विकी मिद्दुखेरा, जिसकी अगस्त 2021 में हत्या कर दी गई थी, अकाली दल का छात्र नेता था। लॉरेंस बिश्नोई ने विकी की राजनीतिक पहुंच का खूब फायदा उठाया। लॉरेंस बिश्नोई की गैंग धीरे-धीरे कई गैंगस्टर्स के निशाने पर आने लगी थी। ऐसे में इन गैंगस्टर्स के लिए जेल ही सबसे सुरक्षित ठिकाना बन गया। 
 
पुलिस द्वारा तिहाड़ जेल में लॉरेंस बिश्नोई और उसके साथियों के पास से आए दिन मोबाइल फोन बरामद किए जा रहे हैं। यह इस बात की ओर इशारा करते हैं कि लॉरेंस बिश्नोई के गैंग मेंबर्स जेल से ही इन वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। कहा जा रहा है कि मूसेवाला की हत्या की प्लानिंग भी जेल से ही हुई थी। 
 
2021 में देश की सबसे सुरक्षित जेल कही जाने वाली तिहाड़ जेल जाने के बाद भी लॉरेंस बिश्नोई एक कंपनी की तरह गैंग चला रहा है। जेल से ही अपने गुर्गे संपत नेहरा को बिश्नोई टारगेट का नाम बताता है। ऑस्ट्रिया में उसका बड़ा भाई अनमोल और कनाडा में बैठे सतिंदर सिंह और गोल्डी बराड़ फिरौती के लिए फोन करते हैं। फिरौती की रकम न मिलने पर दुबई में सचिन थापन शूटर भेजकर हत्या करवाता है।

इस काम के लिए पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और राजस्थान में गैंग के 70 शूटर हैं। फिरौती की रकम का इस्तेमाल अफीम, शराब आदि के व्यापार में लगाया जाता है। बचा हुआ पैसा हवाला का जरिए ब्रिटेन और इटली भेजा जाता है, जहां बैठे गैंग मेंबर इन पैसों का निवेश ड्रग्स के कारोबार में करते हैं।

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