Publish Date: Sun, 11 Jan 2026 (00:43 IST)
Updated Date: Sun, 11 Jan 2026 (00:47 IST)
Uttar Pradesh news : उत्तर प्रदेश में गंगा और यमुना सहित प्रमुख नदियों की स्वच्छता सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अपशिष्ट जल का शोधन कर नदी प्रदूषण की रोकथाम को लेकर व्यापक स्तर पर काम किया जा रहा है। अब प्रदेश के शहरों से निकलने वाला गंदा पानी बिना शोधन के नदियों में नहीं जाएगा। नमामि गंगे मिशन फेज-2 के तहत सीवरेज इन्फ्रास्ट्रक्चर को व्यापक स्तर पर सुदृढ़ किया गया है। वित्त वर्ष 2025-26 में प्रदेश में चार बड़ी सीवरेज अवसंरचना परियोजनाओं का संचालन शुरू किया गया है।
इसके अंतर्गत आगरा में 31 एमएलडी और 35 एमएलडी के दो बड़े एसटीपी स्टार्ट हुए हैं। 842 करोड़ रुपए की इस परियोजना से लगभग 25 लाख लोगों को फायदा होगा। वहीं वाराणसी के अस्सी-बीएचयू क्षेत्र में 55 एमएलडी एसटीपी का संचालन किया गया है।
308 करोड़ रुपए की लागत से बनी इस परियोजना से 18 लाख से अधिक लोगों को स्वच्छता और बेहतर अपशिष्ट जल प्रबंधन का लाभ मिलेगा। शुक्लागंज (उन्नाव) में 65 करोड़ रुपए से 5 एमएलडी एसटीपी शुरू हुआ है। इससे 3 लाख से अधिक लोगों को लाभ होगा और गंगा में प्रदूषण पर प्रभावी रोक लगेगी।
अपशिष्ट जल का वैज्ञानिक तरीके से शोधन : जोगिन्दर सिंह
राज्य स्वच्छ गंगा मिशन के परियोजना निदेशक जोगिन्दर सिंह ने बताया कि प्रदेश में सीवर शोधन की कुल 74 परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। इनमें से 41 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि बाकी परियोजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से शहरी क्षेत्रों में उत्पन्न होने वाले अपशिष्ट जल का वैज्ञानिक तरीके से शोधन किया जा रहा है।
सीवेज को शुद्ध कर बना रहे पर्यावरण के अनुकूल
वर्तमान में उत्तर प्रदेश में 152 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) संचालित हैं, जो बड़ी मात्रा में सीवेज को शुद्ध कर नदियों में प्रवाहित होने से पहले उसे पर्यावरण के अनुकूल बना रहे हैं। इन संयंत्रों के माध्यम से गंगा-यमुना की स्वच्छता के साथ-साथ जनस्वास्थ्य को भी सुरक्षित किया जा रहा है।
परियोजनाओं का उद्देश्य नदियों की निर्मलता सुनिश्चित करना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में संचालित इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य विभिन्न नालों के माध्यम से नदियों में पहुंचने वाले अपशिष्ट जल का शोधन कर पूरी तरह से नदी प्रदूषण की रोकथाम करना है। इससे नदियों की निर्मलता को सुनिश्चित किया जा रहा है।
गंगा स्वच्छता के लक्ष्य को तेजी से हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ता यूपी
राज्य स्वच्छ गंगा मिशन के परियोजना निदेशक जोगिन्दर सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में नदियों के संरक्षण और पुनर्जीवन को लेकर अभूतपूर्व कार्य किए जा रहे हैं। सीवर शोधन परियोजनाओं के माध्यम से उत्तर प्रदेश गंगा स्वच्छता के राष्ट्रीय लक्ष्य को तेजी से हासिल करने की दिशा में अग्रसर है।
इन जिलों में हुआ काम
सीवर शोधन की परियोजना प्रयागराज (नैनी, फाफामऊ, झूंसी), कन्नौज, नरोरा, गढ़ मुक्तेश्वर, अनूपशहर, कानपुर, बिठूर, अयोध्या, मथुरा-वृन्दावन, छाता (मथुरा), कोसीकला (मथुरा), वाराणसी, चुनार, फिरोजाबाद, मुरादाबाद, कासगंज, इटावा, शुक्लागंज-उन्नाव, सुल्तानपुर, जौनपुर, बागपत, मुजफ्फरनगर, बुड़ाना, लखनऊ, गाजीपुर, मिर्जापुर, बरेली, कैराना, फर्रुखाबाद, मेरठ, देवबंद (सहारनपुर), सहारनपुर, शामली, हापुड़, गोरखपुर, आगरा, गुलावटी (बुलंदशहर), पंडित दीन दयाल नगर (मुगलसराय-चन्दौली), भदोही, राम नगर, हाथरस, अलीगढ़, डलमऊ (रायबरेली), मानिकपुर (प्रतापगढ़) में संचालित हैं।
Edited By : Chetan Gour
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