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क्या शिवजी को भांग चढ़ती है?

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Sawan month 2025
offering cannabis in Shiva worship: हिन्दू धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भगवान शिव की पूजा में भांग चढ़ाने की परंपरा सदियों पुरानी है और इसे अत्यंत शुभ माना जाता है। सावन के महीने में तो भांग, धतूरा और बेलपत्र विशेष रूप से शिवलिंग पर अर्पित किए जाते हैं। खासकर सावन महीने और महाशिवरात्रि जैसे पावन अवसरों पर शिवजी को भांग चढ़ाई जाती है।ALSO READ: शिवलिंग की आधी परिक्रमा करने के पीछे का रहस्य जानें
 
शिवजी को भांग क्यों चढ़ाई जाती है? भोलेनाथ को भांग चढ़ाने के पीछे कई पौराणिक मान्यताएं और प्रतीकात्मक अर्थ हैं:
 
1. समुद्र मंथन से संबंध: सबसे प्रचलित कथा के अनुसार, जब समुद्र मंथन से 'हलाहल' नामक भयंकर विष निकला, तो भगवान शिव ने सृष्टि को बचाने के लिए उस पूरे विष का पान कर लिया। विष के तीव्र प्रभाव से उनके शरीर में प्रचंड गर्मी उत्पन्न हो गई। देवताओं ने शिवजी के मस्तिष्क को ठंडा करने के लिए उन्हें भांग, धतूरा, बेलपत्र और जल अर्पित किया। माना जाता है कि भांग और धतूरा शीतल प्रकृति के होते हैं, जिन्होंने विष के प्रभाव को कम करने में मदद की। तभी से ये चीजें भगवान शिव को अत्यंत प्रिय हो गईं।
 
2. औषधीय महत्व: आयुर्वेद में भांग और धतूरे को औषधि के रूप में भी वर्णित किया गया है। सीमित मात्रा में इनका उपयोग शरीर को शांत और नियंत्रित रखने में मदद करता है। यह भी एक कारण है कि इन्हें शिवजी पर चढ़ाया जाता है, जो स्वयं एक महान योगी और औषधियों के ज्ञाता माने जाते हैं।
 
3. संन्यासी स्वरूप: भगवान शिव को योगी, तपस्वी और संन्यासी रूप में भी देखा जाता है। कैलाश पर्वत जैसे अत्यधिक ठंडे वातावरण में रहने वाले योगी और संन्यासी अपने शरीर को गर्म रखने और ध्यान में लीन रहने के लिए कुछ विशेष औषधियों का सेवन करते थे, जिनमें भांग और धतूरा भी शामिल थे। यह शिवजी के संन्यासी स्वरूप से भी जुड़ा है।ALSO READ: शिवलिंग की आधी परिक्रमा करने के पीछे का रहस्य जानें
 
4. प्रतीकात्मक अर्थ: कुछ विद्वान मानते हैं कि भांग का सेवन नशामुक्ति का प्रतीक भी है। शिवजी को भांग अर्पित करने का अर्थ है कि भक्त अपने भीतर की सभी बुराइयों, अहंकार, क्रोध और नकारात्मकता रूपी 'नशे' को भगवान के चरणों में समर्पित कर रहे हैं। यह त्याग और शुद्धि का प्रतीक है।
 
महत्वपूर्ण बात: यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि भांग भगवान शिव को अर्पित की जाती है, न कि इसका सेवन करने के लिए प्रेरित किया जाता है। भगवान शिव स्वयं किसी नशे के आदी नहीं थे, वे तो समस्त संसार के विष को धारण करने वाले 'नीलकंठ' हैं। शिवजी को चिलम या गांजा पीते हुए दिखाना या मानना गलत धारणा है और यह उनका अपमान माना जाता है। भक्त इसे केवल एक पवित्र प्रसाद के रूप में, पूजा के हिस्से के तौर पर ही अर्पित करते हैं।ALSO READ: सावन मास में भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां, महादेव हो जाएंगे रुष्ठ

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

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