ईसाई और इस्लाम से पहले धरती पर ये 15 धर्म प्रचलित थे, जो जुड़े हैं हिन्दुत्व से

प्रारंभ में लोग जंगली जीवन यापन करते थे। धर्म के नाम पर हजारों धर्म धर्म ऐसे थे जिनमें प्रकृति, पूर्वजों और कई काल्पिनिक देवों की पूजा करते थे। हर कबीले या समूदाय का अपना अलग देव था। लेकिन जैसे जैसे समझ बढ़ी तो धर्म का विकास होने लगा। नियम बनने लगे और सभ्यता की शुरुआत हुई।
 
 
1.हिन्दू धर्म- सबसे पहले वैदिक धर्म का प्रारंभ हुआ। लगभग 20000 ईसा पूर्व यह धर्म अस्तित्व में आया। पुराणों की रचना के बाद इसी में से पुराणिक धर्म का प्रारंभ हुआ। मतलब यह कि हिन्दू धर्म के भीतर वैदिक धर्म से पूर्व की परंपरा और रीति रिवाज भी सम्मलित होते गए।
 
2.जैन धर्म- जैन धर्म भी हिन्दू धर्म की तरह तरह बहुत ही प्राचीन धर्म है। रामायण काल में राजा जनक इस धर्म के अनुयायी थे और महाभारत काल में नेमिनाथ जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर थे। 24 तीर्थंकरों की परंपरा में यह धर्म भारत का मूल धर्म है।
 
3.यजीदी- यजीदी धर्म प्राचीन विश्व की प्राचीनतम धार्मिक परंपराओं में से एक है। यजीदियों की गणना के अनुसार अरब में यह परंपरा 6,763 वर्ष पुरानी है अर्थात ईसा के 4,748 वर्ष पूर्व यहूदियों, ईसाइयों और मुसलमानों से पहले से यह परंपरा चली आ रही है। मान्यता के अनुसार यजीदी धर्म को हिन्दू धर्म की एक शाखा माना जाता है।
 
4.यहूदी धर्म- इसराइल का राजधन यहूदी धर्म है। वैसे दो यहूदी धर्म भी हिन्दू धर्म की ही तरह पहले से ही चली आ रही प्राचीन परंपरा का ही एक सुगठित रूप है। इसका प्रारंभ 2000 ईसा पूर्व से माना जाता है। इसका प्रारंभ मूलत: प्रॉफेट अब्राहम से हुआ। फिर प्रॉफेट मूसा के काल में इस धर्म को एक नई शक्ल प्रदान की गई। यही नई शक्ल यहूदी धर्म कहलाई। मूसा मिस्र के फराओ के जमाने में हुए थे। प्रॉफेट अब्राहम धर्म में से ईसाई और इस्लाम धर्म की उत्पत्ति हुई।
 
 
5.पेगन धर्म- पेगन धर्म को मानने वालों को जर्मन के हिथ मूल का माना जाता है, लेकिन यह रोम, अरब और अन्य इलाकों में भी बहुतायत में थे। हालांकि इसका विस्तार यूरोप में ही ज्यादा था। एक मान्यता अनुसार यह अरब के मुशरिकों के धर्म की तरह था और इसका प्रचार-प्रसार अरब में भी काफी फैल चुका था। यह धर्म ईसाई धर्म के पूर्व अस्तित्व में था। प्राचीन अरब में पेगन के साथ ही यजीदी, मुशरिक, सबाईन और यहूदी धर्म प्रचलित था। इस्लाम के आने के बाद इसका अस्तित्व लगभग मिट गया। 
 
6.जरथुस्त्र (पारसी) धर्म- इस धर्म की स्थापना प्रॉफेट जरथुस्त्र ने फारस (वर्तमान में ईरान) में की थी। यह प्राचीन ईरान का राजधर्म था। इतिहासकारों का मत है कि जरथुस्त्र 1700-1500 ईपू के बीच हुए थे। यह लगभग वही काल था, जबकि राजा सुदास का आर्यावर्त में शासन था और दूसरी ओर हजरत इब्राहीम अपने धर्म का प्रचार-प्रसार कर रहे थे। ईरान में पारसी, ग्नोस्तिसिस्म, याज्दानिस्म अहल ई हक्क प्रचनल में था लेकिन वर्तमान में शिया और सूफी धर्म प्रचलन में हैं जो इस्लाम को मानने वाले हैं।
 
7.वूडू धर्म- इसे पूरे अफ्रीका का धर्म माना जा सकता है। कै‍रिबीय द्वीप समूह में आज भी यह परंपरा जिंदा है। इसे यहां वूडू कहा जाता है। बनीन देश का उइदा गांव वूडू बहुल क्षेत्र है। इसे लगभग 6,000 वर्ष से भी ज्यादा पुराना धर्म माना जाता है। ईसाई और इस्लाम धर्म के प्रचार-प्रसार के बाद इसके मानने वालों की संख्या घटती गई और आज यह पश्चिम अफ्रीका के कुछ इलाकों में ही सिमटकर रह गया है।
 
 
8.बौद्ध धर्म- यह भारत का प्राचीन धर्म है। बौद्ध धर्म के संस्थापक भगवान बुद्ध हैं। वैशाख माह की पूर्णिमा के दिन बुद्ध का जन्म नेपाल के लुम्बिनी में ईसा पूर्व 563 को हुआ। इसी दिन 528 ईसा पूर्व उन्होंने भारत के बोधगया में सत्य को जाना और इसी दिन वे 483 ईसा पूर्व को 80 वर्ष की उम्र में भारत के कुशीनगर में निर्वाण (मृत्यु) को उपलब्ध हुए।
 
9.कंफ्यूशियस धर्म- चीन के महान दार्शनिक और विचारक कंफ्यूशियस (confucius) का जन्म 551 ईसा पूर्व (28 अगस्त या सितंबर) को चीन के पूर्वी प्रांत शानडोंग (शान तुंग) के क्यूफू (छ्वी फु) शहर में हुआ था। भारत में उस काल में भगवान महावीर और बुद्ध के विचारों का जोर था। यह धर्म को मानने वाले अनुयायियों की चीन में संख्या बहुत कम थी। 
 
10.शिंतो- यह धर्म जापान में पाया जाता है। इसका अस्तित्व से ईसा पूर्व 3री शताब्दी से ईसा बाद 8वीं शताब्दी तक रहा। जापान के शिंतो धर्म की ज्यादातर बातें बौद्ध धर्म से ली गई थीं फिर भी इस धर्म ने अपनी एक अलग पहचान कायम की थी। इस धर्म की मान्यता थी कि जापान का राजपरिवार सूर्य देवी 'अमातिरासु ओमिकामी' से उत्पन्न हुआ है। उक्त देवी शक्ति का वास नदियों, पहाड़ों, चट्टानों, वृक्षों कुछ पशुओं तथा विशेषत: सूर्य और चन्द्रमा आदि किसी में भी हो सकता है।
 
11.ताओ धर्म- ईसा की दूसरी शताब्दी में ताओ धर्म की शुरुआत हुई। ताओ धर्म में प्राकृतिक आराधना होती है और इतिहास में उसकी बहुत-सी शाखाएं थीं। अपने विकास के कालांतर में ताओ धर्म धीरे-धीरे दो प्रमुख संप्रदायों में बंट गया। एक है- आनचनताओ पंथ और दूसरा है- चड यीताओ पंथ। 
 
12.नॉर्डिक- ये पूर्वी यूरोपीय देशों में प्रचलित था। कहते हैं कि इनके देवता ओडिनी, थोर इत्यादि थे।
 
13.ग्रीक- इस धर्म को यूनादी धर्म भी कहते हैं। यह धर्म आज के समय में ग्रीस और इसके आसपास के इलाके में प्रचलित था, इनके भगवान हैं जियस, हरक्यूलिस, अपोलो इत्यादि।
 
14.रोमन- ये ज्यादातर रोमन साम्राज्य में प्रचलित था, जिसमें आज के इटली, फ्रांस जर्मनी इत्यादि देश आते हैं।
 
15.रशियन धर्म- 10वीं शताब्दी के अंत तक रशिया में ईसाई धर्म नहीं था। कहते हैं कि यहां हिन्दू और पारसी धर्म से मिलता जुलता ही धर्म था। वे अग्नि, सूर्य, पर्वत, वायु या पवित्र पेड़ों की पूजा के साथ ही सबसे प्रमुख देवता थे- विद्युत देवता या बिजली देवता। आसमान में चमकने वाले इस वज्र-देवता का नाम पेरून था। कोई भी संधि या समझौता करते हुए इन पेरून देवता की ही कसमें खाई जाती थीं और उन्हीं की पूजा मुख्य पूजा मानी जाती थी। प्राचीनकाल में रूस के दो और देवताओं के नाम थे- रोग और स्वारोग।
 
 
सूर्य देवता के उस समय के जो नाम हमें मालूम हैं, वे हैं- होर्स, यारीला और दाझबोग। सूर्य के अलावा प्राचीनकालीन रूस में कुछ मशहूर देवियां भी थीं जिनके नाम हैं- बिरिगिन्या, दीवा, जीवा, लादा, मकोश और मरेना। प्राचीनकालीन रूस की यह मरेना नाम की देवी जाड़ों की देवी थी और उसे मौत की देवी भी माना जाता था। रूस में आज भी पुरातत्ववेताओं को कभी-कभी खुदाई करते हुए प्राचीन रूसी देवी-देवताओं की लकड़ी या पत्थर की बनी मूर्तियां मिल जाती हैं। कुछ मूर्तियों में दुर्गा की तरह अनेक सिर और कई-कई हाथ बने होते हैं। रूस के प्राचीन देवताओं और हिन्दू देवी-देवताओं के बीच बहुत ज्यादा समानता है। 

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