मोक्षदायिनी है मां नर्मदा

- लखन घनघोरिया

Webdunia
मां नर्मदा आस्था का केन्द्र है। यह ऐसी नदी के रूप में है जिनके दर्शन मात्र से पुण्य की अनुभूति होती है। जीवन के हर संघर्ष के समय मुझे ऊर्जा मिली है जो मां नर्मदा की ही कृपा है। यह कहना है पूर्व क्षेत्र के विधायक लखन घनघोरिया का, जो 15 वर्षों से प्रतिदिन नर्मदा दर्शन करने जा रहे हैं।

घनघोरिया को मां के प्रताप की अनुभूति हुई है। वे जब भी बड़ी-बड़ी समस्याओं से गुजरे तो मातारानी उन्हें समस्याओं से निजात दिलातीं गईं। उनकी कृपा से जनसेवा का संकल्प लिया है वो उन्हीं की कृपा से है।


FILE


मां नर्मदा के दर्शन करने से मानसिक शांति मिलती है और नए कार्यों की प्रेरणा मिलती है। नर्मदाजी की भक्ति का अलग ही आनंद है। नर्मदा के महत्व से सभी परिचित है फिर भी प्रदूषण में कमी नहीं आ रही। कहीं न कही भक्तों से भी चूक हो रही है। जो भविष्य में विकराल रूप ले सकती है।

FILE


जो शक्ति मां नर्मदा में हैं वो किसी देवी-देवता में नहीं है। मां के आशीर्वाद से हर राह में सफलता मिली। अगर नर्मदा के दर्शन रोज किए जाए तो हर व्यक्ति की मनोकामना पूरी होती है।


FILE


मां नर्मदा को जीवनदायिनी कहा जाता है जो लोगों के दुख दूर करती हैं। मां के दरबार में जो भी सच्चे मन से जाता है उसे मां सब देती है। मां नर्मदा के चरणों में मस्तक झुकाने से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है।

मां नर्मदा मोक्षदायिनी है। उनके दर्शन करने से ही पुण्य की प्राप्ति होती है। नर्मदा ही ऐसी नदी है जिनकी परिक्रमा होती है। अभी देश में जो नदियां प्रदूषण मुक्त है उनमें नर्मदा का विशेष महत्व है ।


वेबदुनिया पर पढ़ें

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

सूर्य कर्क संक्रांति कब रहेगी, क्या है इसका महत्व?

क्या 12 ही महीने बर्फ से ढका रहता है बाबा अमरनाथ का शिवलिंग? जानिए हिम शिवलिंग के रहस्य

श्रावण माह में इस बार कितने सोमवार हैं और किस तारीख को, जानिए

वर्ष 2025 में कब से शुरू हो रहा है सावन माह का सोमवार, जानिए श्रावण मास डेट एंड पूजा टाइम

सावन मास में शिवजी की पूजा से पहले सुधारें अपने घर का वास्तु, जानें 5 उपाय

सभी देखें

धर्म संसार

कावड़ यात्रा 2025: यूपी सरकार ने कमर कसी, शिवभक्तों की कावड़ के साथ छेड़छाड़ पड़ेगी महंगी

09 जुलाई 2025 : आपका जन्मदिन

09 जुलाई 2025, बुधवार के शुभ मुहूर्त

डाउजिंग: अदृश्य शक्तियों द्वारा मार्गदर्शन

चाणक्य के अनुसार कौन होता है सच्चा गुरु? क्या हैं गुरु के गुण?