Hanuman Chalisa

राधारमण मंदिर में 475 वर्षों से बिना माचिस के प्रयोग से हो रही ठाकुरजी की आरती

Webdunia
सोमवार, 8 मई 2017 (14:24 IST)
मथुरा। उत्तर प्रदेश में राधारानी की नगरी वृन्दावन के सप्त देवालयों राधारमण मंदिर में पिछले पौने पांच सौ वर्ष से बिना माचिस के प्रयोग के ही ठाकुरजी की आरती हो रही है।
 
इस मंदिर के मुख्य श्रीविग्रह का प्राकट्योत्सव 10 मई को मनाया जाएगा। मंदिर के सेवायत आचार्य पद्मनाभ गोस्वामी ने बताया कि गोपाल भट्ट स्वामी पर ठाकुर की बहुत अधिक कृपा थी इसी वजह से ठाकुर ने प्राकट्य के लिए उन्हें ही माध्यम बनाया था। मंदिर की प्रथम आरती के लिए अग्नि वैदिक मंत्रों के माध्यम से आज से 475 वर्ष पहले प्रकट की गई थी। इसके लिए अरण्य मंथन का सहारा लिया गया था।
 
उसके बाद ही ठाकुर ने गोपाल भट्ट स्वामी के मन में यह भाव पैदा किया कि इसी अग्नि से भविष्य में ठाकुर की आरती की जाय। यहीं कारण है कि इस मंदिर में करीब पौने पांच सौ वर्ष से माचिस का प्रयोग नहीं किया गया। आज भी ठाकुर की आरती पौने पांच सौ वर्ष पूर्व प्रकट अग्नि से की जाती है।
 
इस मंदिर की दूसरी विशेषता यह है कि इस मंदिर के श्रीविगृह में मदनमोहन, गोपीनाथ एवं गोविन्ददेव के दर्शन होते हैं, ऐसा अदभुत दर्शन ब्रज के किसी मंदिर में नही मिलेगा। राधा रमण मंदिर के सेवायत आचार्य दिनेश चन्द्र गोस्वामी ने तीन मंदिरों के विगृह के राधारमण मंदिर में दर्शन के रहस्य का उद्घाटन करते हुए बताया कि ठाकुर हमेशा भक्त के भक्ति के वशीभूत रहते हैं। गोपाल भट्ट की अटूट भक्ति के कारण ही उन्हेांने उनकी मनोकामना पूरी हुई।
 
उन्होंने बताया कि माता-पिता की आज्ञा पाकर जब गोपाल भट्ट वृन्दावन को रवाना हुए तो उनके मुख से हरिनाम की ध्वनि गूंज रही थी। उनकी भक्ति ऐसी अटूट थी कि बीहड़ जंगलों से होकर जब वे वृन्दावन जा रहे थे तो रास्ते में हिंसक जीव भी उन्हें आगे जाने का रास्ता दे देते थे। श्रीकृष्ण के दर्शन की अभिलाषा में वृन्दावन जा रहे गोपाल भट्ट को एक दिन निद्रा आ गई और उसी समय उन्होंने देखा कि पीताम्बर धारण किए मुरली लिए ठाकुर उनके सामने खड़े हुए हैं।
 
निद्रा खुलने पर उन्होंने अपने आपको वृन्दावन में यमुना तट पर तमाल, कदम्ब, आम, मौलश्री से युक्त रमणीक वन में पाया। वे इस अनुपम छटा को देखकर नृत्य करने लगे। जब वे रूप, सनातन के साथ कृष्णभक्ति का प्रचार करने लगे तो एक दिन चैतन्य महाप्रभु ने उनके पास अपना डोर कौपीन और अपने बैठने का पट्टा भेजा था जो राधारमण मंदिर के विशेष उत्सवों में दर्शनीय होता है।
 
आचार्य गोस्वामीजी ने बताया कि गोपाल भट्ट हरीनाम की धारा प्रवाहित करते हुए एक दिन नेपाल पहुंचे जहां तीसरे दिन गंडकी नदी में स्नान के दौरान जैसे ही उन्होंने गोता लगाया उनके उत्तरीय में दिव्य शालिग्राम आ गए। उन्होंने एक बार उसे नदी में ही प्रवाहित कर दिया किंतु दूसरी बार गोता लगाते ही वे फिर उनके उत्तरेय में आ गए और आकाशवाणी हुई कि गोपाल भट्ट इसी के अन्दर तुम्हारी अमूल्य निधि विराजमान है। वे उसे लेकर वृन्दावन आ गए। यहां वे उसकी सेवा पूजा करने लगे।
 
दिनेशचन्द्र गोस्वामी ने बताया कि वृन्दावन में सनातन गोस्वामी मदनमोहनजी की, रूप गोस्वामी गोविन्द देवजी की तथा मधु पण्डित गोपीनाथ जी की सेवा और श्रंगार किया करते थे। ठाकुर- श्रंगार में प्रवीण होने के कारण गोपाल भट्ट उक्त तीनों विगृह का श्रंगार नित्य किया करते थे। अधिक आयु होने पर तीन तीन जगह का श्रंगार करने में जब उन्हें कुछ अधिक समय लगने लगा तो नृसिंह चतुर्दशी को संध्या समय शालिग्राम जी का अभिषेक करते समय उन्होंने राधारमण मंदिर के श्रीविगृह के सामने ठाकुर जी से आराधना की और कहा कि हे प्रभु छोटे बालक प्रहलाद के लिए तो आप खंभ चीरकर प्रकट हुए थे किंतु उन पर कृपा क्यों नही हो रही है।
 
उन्होंने स्वयं ठाकुर से कहा कि तीनों विगृह का श्रंगार करने में काफी समय लग जाता है यदि तीनों ही स्वरूप (मदनमोहन, गोपीनाथ एवं गोविन्ददेव मंदिरों के श्री विगृह) इसी श्रीविगृह में समाहित हो जांय तो वे इसका और भव्य श्रंगार कर अपने को धन्य कर सकते हैं। इतना कहने के साथ ही गोपालभट्ट गोस्वामी उसी रासस्थली की पुलिन भूमि पर मूर्छित हो गए। यह अवसर वैशाखी पूर्णिमा की प्रभात बेला का था। (भाषा)

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

वैशाख महीना किन देवताओं की पूजा के लिए है सबसे शुभ? जानें इसका धार्मिक महत्व

ऑपरेशन सिंदूर 2.0: क्या फिर से होने वाला है भारत और पाकिस्तान का युद्ध, क्या कहता है ज्योतिष

महायुद्ध के संकेत! क्या बदलने वाला है कुछ देशों का भूगोल? ज्योतिष की चौंकाने वाली भविष्यवाणी

अक्षय तृतीया पर क्यों होता है अबूझ मुहूर्त? जानिए इसका रहस्य

बैसाखी कब है, क्या है इसका महत्व, जानिए खास 5 बातें

सभी देखें

धर्म संसार

10 April Birthday: आपको 10 अप्रैल, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 10 अप्रैल 2026: शुक्रवार का पंचांग और शुभ समय

Akshaya Tritiya 2026: अक्षय तृतीया पर सोना खरीदने का समय क्या रहेगा?

कालाष्टमी के दिन करें इस तरीके भगवान भैरव की पूजा और 5 अचूक उपाय

अमरनाथ यात्रा 2026: जाने से पहले जरूर करें ये 5 जरूरी तैयारियां, तभी रहेंगे सुरक्षित

अगला लेख