Publish Date: Wed, 06 May 2026 (16:21 IST)
Updated Date: Wed, 06 May 2026 (16:27 IST)
Shani jayanti 2026: साल 2026 में शनि जयंती 16 मई, शनिवार को मनाई जाएगी। शनि जयंती ज्येष्ठ मास की अमावस्या को पड़ती है। इसी दिन भगवान शनि का जन्म हुआ था। शनिश्चरी अमावस्या का संयोग शनि देव को प्रसन्न करने और कुंडली के बड़े दोषों से मुक्ति पाने का सबसे उत्तम अवसर होता है। यदि आप भी साढ़ेसाती, ढैय्या या शनि के अशुभ प्रभाव से परेशान हैं, तो इस दिन ये 5 अचूक उपाय करना न भूलें।
1. छाया दान (सबसे सटीक उपाय)
शनि देव को अपना चेहरा अत्यंत प्रिय है। एक कांसे या स्टील की कटोरी में सरसों का तेल भरें और उसमें अपना चेहरा देखकर उसे तेल सहित दान कर दें या किसी शनि मंदिर में रख आएं। यह उपाय शारीरिक कष्टों और 'अकाल मृत्यु' के भय को दूर करता है।
2. पीपल वृक्ष की सेवा
अमावस्या के दिन सूर्यास्त के बाद पीपल के पेड़ के पास सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाएं। पीपल की सात बार परिक्रमा करें और "ॐ शं शनैश्चराय नमः" का जाप करें। माना जाता है कि पीपल में शनि देव का वास होता है, इससे पितृ दोष भी शांत होता है।
3. काले कुत्ते और कौवे को भोजन
शनि देव पशु-पक्षियों की सेवा से शीघ्र प्रसन्न होते हैं। इस दिन काले कुत्ते को सरसों का तेल लगी हुई रोटी खिलाएं और कौवों को दाना डालें। यदि कुत्ता काला हो, तो यह राहु और शनि दोनों के नकारात्मक प्रभाव को खत्म कर देता है।
4. शनि मंत्र और स्तोत्र का पाठ
मानसिक शांति और कार्यों में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए इस दिन शनि चालीसा, हनुमान चालीसा या दशरथ कृत शनि स्तोत्र का पाठ अवश्य करें। हनुमान जी की पूजा करने वालों को शनि देव कभी प्रताड़ित नहीं करते।
5. जरूरतमंदों को दान (मजदूरों की सेवा)
शनि देव न्याय के देवता हैं और समाज के निचले वर्ग (मजदूरों/गरीबों) का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस दिन किसी गरीब को काले तिल, काला छाता, चमड़े के जूते या लोहे का तवा दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। किसी मजदूर को भोजन कराना साक्षात शनि देव की सेवा के समान है।
विशेष सावधानी: शनिश्चरी अमावस्या के दिन भूलकर भी घर में लोहा, तेल या काला तिल खरीदकर न लाएं। इन वस्तुओं का केवल दान करना चाहिए।
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