Hanuman Chalisa

Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia

आज से उत्तर भारत में श्रावण मास प्रारंभ, दक्षिण भारत में होंगे 14 दिनों बाद, ऐसा क्यों?

Advertiesment
Why is there a difference between Sawan month in North India and South India
उत्तर भारत में साल 2025 में सावन का महीना 11 जुलाई 2025, दिन शुक्रवार से शुरू हो गया है जो 9 अगस्त 2025, शनिवार तक रहेगा। वहीं, दक्षिण और पश्चिमी भारत के कुछ राज्यों, जैसे- आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु में सावन का मास 25 जुलाई 2025 से शुरू होकर 22 अगस्त 2025 को समाप्त होगा। दोनों क्षेत्रों में 14 दिनों का अंतर क्यों?
 
1. उत्तर भारत (Purnimanta): पूर्णिमा के बाद शुरू- 11 जुलाई 2025 (शुक्रवार): 9 अगस्त 2025 (शनिवार)।
2. दक्षिण/पश्चिम भारत (Amanta): अमावस्या के बाद शुरू- 25 जुलाई 2025 (शुक्रवार) से 22 अगस्त 2025 (शुक्रवार)।
3. नेपाल/हिमालयी क्षेत्र: सौर/अन्य स्थानीय प्रणाली- 16 जुलाई 2025 से 16 अगस्त 2025 तक रहेगा।
 
क्या कारण है 14 दिनों के अंतर का:
पहला कारण भेद:-
1. दक्षिण भारत में अमांता चन्द्र कैलेण्डर पंचांग का पालन करते हैं जबकि उत्तर भारत में पूर्णिमान्त चन्द्र कैलेण्डर का पालन पालन करते हैं। अमांत यानी अमावस्या के बाद और पूर्णिमांत यानी पूर्णिमा के बाद श्रावण मास प्रारंभ। अमान्त चक्र में, चन्द्र वर्ष हमेशा मीन संक्रान्ति के बाद और मेष संक्रान्ति से ठीक पहले प्रारम्भ होता है। पूर्णिमान्त चक्र में, चन्द्र वर्ष मीन संक्रान्ति से पहले शुरू हो सकता है,
 
2. नेपाल, उत्तराखण्ड और हिमाचल के कुछ हिस्सों में, सावन मास सौर कैलेण्डर के अनुसार प्रारंभ होता है। सौर मास यानी कि मेष से मीन तक सूर्य का चक्र चलता है। उसमें कर्क संक्रांति से सावन मास प्रारंभ होगा। ALSO READ: सावन में कढ़ी क्यों नहीं खाते? क्या है आयुर्वेदिक कारण? जानिए बेहतर विकल्प
 
दूसरा कारण ऋतु चक्र में अंतर:
1. ऐसा भी कहा जाता है कि मौसम चक्र भेद के कारण भी कैलेंडर में यह असमानता है। जैसे केरल में मानसून पहले आता है उसके एक सप्ताह बाद यह मध्य भारत में पहुंचता है। यानी कि मान लो कि केरल में मानसून की शुरुआत 1 जून से हुई है तो मध्य भारत में 7 जून के बाद मानसून आएगा।
 
2. जैसे कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल आदि पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश प्रारंभ होने के एक सप्ताह बाद मैदानी क्षेत्रों में वर्षा प्रारंभ होती है। इसलिए सावन का माह भी वर्षा चक्र पर ही चलता है। ज्येष्ठ और आषाढ़ के महीनों को ग्रीष्म ऋतु और सावन एवं भाद्रपक्ष का महीना वर्षा ऋतु के माहीने हैं। ALSO READ: सावन मास प्रारंभ, जानिए कितने सोमवार, कितने प्रदोष और पूजा के शुभ मुहूर्त, विधि, रुद्राभिषेक के साथ 5 अचूक उपाय
 
3. जैसे अरुणाचय में सूर्योदय सबसे पहले होता है इसके बाद मध्य भारत में करीब 1 घंटे के बाद सूर्योदय होता है। इसी प्रकार से मौसम, ऋ‍तु और तिथियों के उदय एवं अस्त के अंतर के कारण कैलेंडर में भी अंतर देखा जा सकता है। हालांकि मूल रूप से अमांत और पूर्णिमांत के चक्र को ही माना जाता है।

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi

अगला लेख

CM योगी की शिवभक्ति, सावन के पहले दिन किया रुद्राभिषेक