Hanuman Chalisa

सिंहस्थ : क्या है महाकुंभ का पौराणिक महत्व

Webdunia
'कुंभ' का समारम्भ कब और क्यों हुआ था तथा उसे चार ही स्थानों तक सीमित क्यों माना गया। इन प्रश्नों के संतोषप्रद उत्तर अभी तक नहीं मिल पाए हैं, पर जो चेष्टाएं इस दिशा में की गई हैं वे निश्चय ही महत्वपूर्ण हैं। भारतीय दृष्टि ने 'इतिहास पुराणाभ्याम्‌' कहकर इतिहास और पुराण में भेद नहीं माना, परन्तु आधुनिक युग में इतिहास पुराण से अधिक मान्य हो गया है। 
 

 
कहीं-कहीं वह पुराण-विरोधी भी दिखाई देता है। विदेशी काल-दृष्टि सीधी रेखा का अनुसरण करती है, किन्तु भारतीय काल-दृष्टि आवर्तनमूलक है। उसमें लयात्मकता है जो भारतीय संस्कृति के लीलापरक दृष्टिकोण में संगति रखती है और भक्ति भाव से भी सम्पृक्त सिद्ध होती है। 
 
कृष्णभक्तयात्मकं तत्वं लयः सर्व सुखावहः। 
 
लीला-तत्व श्रीमद्भागवत का सार है और उसे दर्शन और व्यवहार दोनों का बल मिला है। भक्ति के प्रायः सभी सम्प्रदायों ने लीला-तत्व के साथ लय-प्रलय को आनंदात्मक माना है तथा उसे विराट रूप में देखकर सृष्टिव्यापी कल्पना की है जो किसी काल में समाप्त नहीं होती और न ही अपनी महत्ता खोती है। महाकुंभ अडिग आस्था का प्रतीक है। प्रलय के बाद भी उसके वैभव में कम‍ी नहीं आ सकती। ऐसी भावना लोक ग्राह्य है तथा कवि-प्रेरक भी।
 
किसी भी अन्य कुंभ स्थल में आस्था का ऐसा विशाल, सर्वव्यापी, अनंत विराट दर्शन नहीं होता, जो निरंतर प्रेरणास्पद हो। त्रिवेणी 'मृत' और 'अमृत' दोनों तत्वों के समीकरण से उत्पन्न ऐसी धारणा है जो मृत्यु पर मानसिक रूप से विजय प्राप्त करके जीवन में व्याप्त अमृत-तत्व को सर्वसुलभ बनाने का संकल्प करती है। इसमें इतिहास और पुराण दोनों में सहायक होते हैं। 
 
कोई किसी का निषेध या विरोध नहीं करता, क्योंकि उसकी धार्मिक दृष्टि मूलतः सांस्कृतिक दृष्टि है। आज विज्ञान भी मृत्यु पर विजय प्राप्त करने की भौतिक प्रक्रिया खोज रहा है, मृत्यु को एक रोग के रूप में देखने का साहस कर रहा है। भारतवर्ष ने आत्मा पर आस्था करके मानसिक रूप से मृत्यु पर विजय प्राप्त करने का विज्ञान रच दिया था। 'ज्ञानिहु ते अति बड़ बिज्ञानी' की धारणा व्यक्त करके भारत ने ज्ञान के ऊपर विज्ञान को माना है। अब विज्ञान का अर्थ छोटा हो गया है।
Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

सूर्य का मकर राशि में गोचर, 12 राशियों का राशिफल, किसे होगा लाभ और किसे नुकसान

2026 में इन 4 राशियों का होगा पूरी तरह कायाकल्प, क्या आप तैयार हैं?

शाकंभरी माता की आरती हिंदी– अर्थ, लाभ और पाठ विधि | Shakambari mata ki aarti

Basant Panchami 2026: वर्ष 2026 में बसंत पंचमी का त्योहार कब मनाए जाएगा

क्या सच में फिर से होने वाला है ऑपरेशन सिंदूर प्रारंभ, क्या कहती है भविष्यवाणी

सभी देखें

धर्म संसार

16 January Birthday: आपको 16 जनवरी, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

शुक्र प्रदोष का व्रत रखने से शुक्र होगा मजबूत और मिलेगा शिवजी और लक्ष्मी माता का आशीर्वाद, जानें उपाय

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 16 जनवरी 2026: शुक्रवार का पंचांग और शुभ समय

माघ मास की मौनी अमावस्या पर पितृ दोष से मुक्ति के सबसे खास 7 उपाय

मनचाहा फल पाने के लिए गुप्त नवरात्रि में करें ये 5 अचूक उपाय, हर बाधा होगी दूर