ब्रिटेन की ऑस्ट्रिया पर जीत से राहत की साँस

Webdunia
- जोकिम कार्वाल्हो द्वार ा
ईमानदारी से कहूँ तो मैं ग्रेट ब्रिटेन और ऑस्ट्रिया के बीच खेले गये मैच के परिणाम को लेकर चिंतित था। ऑस्ट्रिया यदि ब्रिटेन को हरा देता तो फिर विश्व हॉकी ओलिंपिक क्वालीफाईंग टूर्नामेंट के फाइनल में पहुँचने के लिए अपने अंतिम लीग मैच में चिली पर जीत दर्ज करने के लिए हम पर दबाव बढ़ जाता।

जब हमें पता चला कि ब्रिटेन जीत गया है तो हमने राहत की साँस ली क्योंकि हम चिली के खिलाफ सहज होकर मैदान पर उतर सकते थे। निश्चित तौर पर इसमें कोई संदेह नहीं कि हम चिली को हरा सकते है। कौशल क्षमता और अनुभव हर विभाग में भारत मेजबान देश से बेहतर है। हालाँकि आधुनिक हॉकी में आप कुछ भी तय मानकर नहीं चल सकते है विशेषकर जब आप ऐसे प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ खेल रहे हों, जिसे आप अपनी टीम की तुलना में कमजोर मानते हो।

चिली को आशानुरूप दर्शकों का समर्थन मिला। हमने शिवेंद्र सिंह और गुरबाज सिंह को विश्राम दिया क्योंकि उन्हें ब्रिटेन के खिलाफ फाइनल में अहम भूमिका निभानी होगी। मैं शिवेंद्र का बचाव भी करना चाहता था क्योंकि उन्हें एक पीला कार्ड मिल चुका है। मैं उन्हें फाइनल के लिए फिट और तरोताजा चाहता हूँ।

गुरबाज ऑस्ट्रिया के खिलाफ चोटिल हो गये थे इसलिए मैं जोखिम नहीं उठाना चाहता था। गुरबाज प्रतिभाशाली खिलाड़ी है और राइट हाफ में हमारा महत्वपूर्ण खिलाड़ी है। वह फाइनल तक फिट हो जाएगा। मैं यह स्वीकार करता हूँ कि चिली के खिलाफ हमारी जीत सुनिश्चित थी। हमने गोल करने के कुछ अवसर गँवाए लेकिन ओवरआल हमने अच्छा खेल दिखाया।

अब लीग चरण समाप्त हो गया है और अब हमें वह मैच खेलना है, जिसके लिए हम पिछले दस महीने से अभ्यास कर रहे हैं। अब यह मायने नहीं रखता कि हमने क्या हासिल किया। हमें बीजिंग ओलिंपिक में पहुंचने के लिए ब्रिटेन को हराना ही होगा। अब कोई दूसरा विकल्प नहीं है।

निश्चित तौर पर दबाव होता है लेकिन मुझे लगता है कि हमारे खिलाड़ी इस महतवपूर्ण मुकाबले के लिए तैयार हैं। प्रत्येक खिलाड़ी ओलिंपिक में भाग लेना चाहता है और हमारी हॉकी टीम भी इससे भिन्न नहीं है। प्रेरणा देने के लिए यही अपने आप में काफी है और हमारे खिलाड़ी बीजिंग जाने के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं।

हम ब्रिटेन के खिलाफ पिछले मैच में हार ग ए थे लेकिन सच्चाई यह है कि हमने उस मैच में अपनी सारी रणनीति का खुलासा नहीं किया था। यहाँ तक कि हम उस तरह से नहीं खेले थे जैसे हम चाहते थे। उस हार में भी हमारे लिए कई सकारात्मक पक्ष रहे। फाइनल में हमें अपने सारे अस्त्रों का प्रयोग करना होगा। ( भाषा)

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