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WMO की चेतावनी, तेज गति से गर्मा रही पृथ्वी, बिगड़ रहा जलवायु संतुलन

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World Health Organization Report on Climate Imbalance
पृथ्वी की जलवायु का लेखा-जोखा रखा जाना जब से शुरू हुआ है, उसके बाद से अब तक मौसमी संतुलन फ़िलहाल अपनी सबसे ख़राब स्थिति में पहुंच चुका है। ग्रीनहाउस गैस की सघनता की वजह से पृथ्वी का ऊर्जा संतुलन हिल रहा है, वातावारण व महासागर गर्म हो रहे हैं और जमा हुआ जल पिघलता जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WMO) ने वैश्विक जलवायु की स्थिति पर अपनी नई रिपोर्ट में यह चेतावनी जारी की है।
 
यूएन मौसम विज्ञान एजेंसी के अनुसार, पिछले कुछ दशकों में ये बदलाव तेज़ गति से और व्यापक स्तर पर हुए हैं और इनके दुष्प्रभाव अगले सैकड़ों, सम्भवत: हज़ारों वर्षों तक जारी रहने की आशंका है। 2015 से 2025 की अवधि में, अब तक के सबसे गर्म 11 साल रिकॉर्ड किए गए हैं। वर्ष 2025, इतिहास में दूसरा या तीसरा सबसे गर्म साल रहा है, जो कि 1850-1900 के औसत की तुलना में 1।43 °C की
वृद्धि को दर्शाता है।
 
विश्व के अनेक हिस्सों में लोगों ने ताप लहरों, भीषण बारिश, चक्रवाती तूफ़ान समेत अन्य चरम मौसम घटनाओं का सामना किया, जिससे विशाल बर्बादी और व्यवधान दर्ज किया गया। यूएन एजेंसी ने आगाह किया है कि यह वैश्विक स्तर पर आपस में जुड़ी हुई अर्थव्यवस्थाओं और समाजों के लिए नाज़ुक स्थिति है।

ऊर्जा असंतुलन

यूएन एजेंसी ने अपनी यह रिपोर्ट, सोमवार, 23 मार्च को 'विश्व मौसम विज्ञान दिवस' के अवसर पर जारी की है, जिसकी थीम में वर्तमान स्थिति का निरीक्षण करने और भविष्य की रक्षा करने पर बल दिया गया है। यह पहली बार है जब रिपोर्ट में पृथ्वी के ऊर्जा असंतुलन को भी जलवायु परिवर्तन के संकेतकों में शामिल किया गया है।
 
पृथ्वी पर ऊर्जा की संतुलित व्यवस्था के लिए यह ज़रूरी है कि, सूर्य से प्राप्त होने वाली ऊर्जा और बाहर जाने वाली ऊर्जा लगभग एक समान ही हो, लेकिन फ़िलहाल यह स्थिति नहीं है। वातावरण की गर्मी को बाहर न जाने देने वाली ग्रीनहाउस गैस (कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन, नाइट्रस ऑक्साइड) की सघनता बढ़ने की वजह से कम मात्रा में ऊर्जा ही बाहर जा पा रही है। जबकि सूर्य से आने वाली ऊर्जा के अधिक मात्रा में होने का अर्थ है कि वातावरण में ऊर्जा जमा हो रही है। 
 

ग्रीनहाउस गैस का रिकॉर्ड स्तर

संगठन के अनुसार, 1960 में ऊर्जा सन्तुलन का रिकॉर्ड रखना शुरू किया गया था और पिछले कुछ वर्षों से यह असंतुलनबढ़ता जा रहा है और 2025 में एक नए चरम पर पहुंच गया है। यूएन मौसम विज्ञान एजेंसी के वैज्ञानिक अधिकारी जॉन कैनेडी ने कहा कि वातावरण में तीन प्रमुख ग्रीनहाउस गैस (कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन, नाइट्रस ऑक्साइड) की सघनता वर्ष 2024 में अपने रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई।
 
उन्होंने सचेत किया कि साल-दर-साल होने वाली यह सबसे अधिक वृद्धि है। विश्वभर में अनेक स्थलों से जुटाया गया डेटा दर्शाता है कि इन ग्रीनहाउस गैस का स्तर वर्ष 2025 में बढ़ना जारी रहा और पृथ्वी पर ऊर्जा सन्तुलन में बदलाव का आना भी।

जलवायु की गम्भीर स्थिति

WMO की कार्यकारी उप सचिव को बैरेट ने रिपोर्ट के जारी होने पर चिन्ता जताई कि ग्लेशियर खिसक रहे हैं और जमा हुआ जल पिघल रहा है। गर्माते महासागार और भूमि पर जमे हुए जल के पिघलने से वैश्विक औसत समुद्री जल स्तर में बढ़ोतरी हो रही है। 
 
उन्होंने बताया कि रिपोर्ट के निष्कर्ष दर्शाते हैं कि ज़िन्दगियों को बचाने के लिए मौसम के पूर्वानुमानों और समय पूर्व चेतावनी को उन हाथों में पहुंचाने के लिए और अधिक मेहनत करनी होगी, जो जीवन व आजीविका की रक्षा करने में मदद कर सकते हैं।
यूएन एजेंसी की वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि जलवायु उथलपुथल और उसके भयावह प्रभावों में कमी लाने और सर्वाधिक निर्बलों की रक्षा के लिए यह अहम है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन पिछले 30 वर्षों से अधिक समय से जलवायु स्थिति पर अपना वार्षिक अपडेट प्रकाशित करता रहा है और पिछले एक दशक में रिकॉर्ड तोड़ आंकड़े इस विषय में गहराती चिंताओं का सूचक हैं। 

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